60 दिन की डेडलाइन खत्म, फिर भी US-ईरान डील बेनतीजा... जानें पेजेश्कियान ने ट्रंप के साथ समझौते का क्यों किया समर्थन?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते का समर्थन किया है. उन्होंने इसे देश को युद्ध और शांति के बीच फंसे हालात से निकालने का सबसे बेहतर रास्ता बताया है. उन्होंने कहा कि इस समझौते में आत्मसमर्पण का कोई प्रावधान नहीं है और इस मामले में ईरान सुप्रीम लीडर की नीतियों के मुताबिक ही आगे बढ़ेगा.

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पेजेश्कियान ने ये भी कहा कि ईरान सुप्रीम लीडर के फैसलों के हिसाब से ही चलेगा. (File Photo: Reuters) पेजेश्कियान ने ये भी कहा कि ईरान सुप्रीम लीडर के फैसलों के हिसाब से ही चलेगा. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के ज्ञापन का समर्थन किया है. उन्होंने इसे 'न युद्ध, न शांति' जैसे हालात से देश को बाहर निकालने का सबसे बेहतर रास्ता बताया है.

रविवार को सरकारी समाचार एजेंसी IRNA को दिए अपने बयान में राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा, 'इस समझौते में एक भी ऐसा प्रावधान नहीं है जो आत्मसमर्पण के बराबर हो.'

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पेजेश्कियान ने आगे कहा, 'सुप्रीम लीडर ही नीतियां तय करते हैं, और हम उसी रास्ते पर चलेंगे.'

आर्थिक संकट और नए सुरक्षा प्रमुख की चेतावनी

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने इस समझौते को देश की आर्थिक स्थिति से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि युद्ध के इस गतिरोध वाले दौर में ईरान विदेशी निवेश आकर्षित करने में असमर्थ है. अमेरिका और इजरायल के साथ जारी इस युद्ध के बीच कड़े प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा है.

दूसरी ओर, ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के नए प्रमुख ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देश ईरान पर ज्यादा प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी धमकियों का समर्थन करते हैं, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब 'अमेरिकी इलाका', ट्रंप ने शेयर किया मैप... ईरान पर नए प्रतिबंध भी

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बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जून में साइन किए गए इस MoU में ईरान के साथ युद्ध खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की गई थी. हालांकि, ये अवधि पिछले सप्ताह खत्म हो चुकी है, लेकिन ग्लोबल शिपिंग के लिए होर्मुज को फिर से खोलने जैसे मुद्दे पर अभी तक समझौते के कोई आसार नहीं दिखे हैं.

28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिका और ईरान की जंग को अब 6 महीने हो चुके हैं. लेकिन अब तक इस पर समझौता नहीं हो पाया है. ऐसे में ईरानी अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है.

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