भारत के सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बालेन शाह से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने को लेकर अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई. यह मुलाकात सिंहदरबार स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई, जहां भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखा जा रहा है.
नेपाल में भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि जनरल सेठ ने प्रधानमंत्री शाह से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने पर अच्छी बातचीत हुई. प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी हित और सैन्य संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की.
इसी महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री शाह ने भारतीय राजदूत श्रीवास्तव से पहली बार अकेले में मुलाकात की थी और भारत के साथ अपने देश के पुराने रिश्ते को और गहरा करने की जरूरत बताई थी. पिछले कुछ हफ्तों में शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े अधिकारियों से अकेले न मिलने का अपना पुराना नियम बदल दिया है.
जनरल सेठ 17 से 19 अगस्त तक नेपाल की चार दिन की सरकारी यात्रा पर हैं. उन्हें यह न्योता नेपाल सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने दिया था. सोमवार को नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने एक समारोह में जनरल सेठ को नेपाल सेना का मानद जनरल बनाया. भारत और नेपाल 1950 से एक दूसरे के सेनाध्यक्षों को यह मानद पद देते आ रहे हैं. यह दोनों देशों की एक पुरानी और खास सैन्य परंपरा है.
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सोमवार को जनरल सेठ ने आर्मी हेडक्वार्टर में जनरल सिग्देल से भी बातचीत की और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. आमतौर पर नेपाल के नेता शुरू से ही भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने को अहमियत देते रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और आम लोगों के स्तर पर गहरे रिश्ते हैं.
हालांकि प्रधानमंत्री शाह ने अभी तक भारत या चीन किसी की भी यात्रा नहीं की है. इसके बजाय विदेश मंत्री शिशिर खनाल जून में नई दिल्ली और बीजिंग दोनों जगह गए थे. शाह से पहले प्रधानमंत्री रहे केपी शर्मा ओली ने 2024 में पद संभालने के बाद पहले चीन का दौरा किया था, जो पुरानी परंपरा से अलग था क्योंकि पहले नेपाल के प्रधानमंत्री पहली विदेश यात्रा पर भारत जाते थे.
31 मई को संसद में अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री शाह ने कहा था कि उन्हें पता चला है कि नेपाल ने भारत की कुछ जमीन पर कब्जा किया हुआ है. शाह ने यह भी कहा कि सीमा विवाद पर भारत से बातचीत के अलावा काठमांडू चीन और ब्रिटेन के भी संपर्क में है. इसके दो दिन बाद भारत ने साफ कह दिया कि सीमा विवाद सुलझाने में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं होगी.
भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है. भारत हमेशा से कहता आया है कि यह इलाके उत्तराखंड का हिस्सा हैं. शाह के इस बयान के बाद नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने भारत गए थे और वहां बड़े नेताओं से मुलाकात की थी.
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि भारतीय सेनाध्यक्ष की इस यात्रा से दोनों देशों के पुराने और भरोसेमंद रक्षा संबंध और मजबूत होते हैं, जो साझा मूल्यों और सेना से सेना के गहरे रिश्तों पर टिके हैं. जनरल सेठ ने नेपाल आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, शिवपुरी का भी दौरा किया, जहां उन्होंने सैन्य शिक्षा और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार रखे. मंगलवार को उन्होंने काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में भी पूजा की.
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