समंदर में दिखा चक्रवात 'पोलो' का खौफनाक रूप, सैटेलाइट में कैद हुई तूफान की 'आंख'

चक्रवात 'पोलो' फिर कैटेगरी 5 की ताकत तक पहुंच गया है. सैटेलाइट फुटेज में खुले समुद्र के ऊपर इसकी 'आंख' दिखाई दी. मेक्सिको के प्रशांत तट के कई हिस्सों में तूफान का असर अभी भी बना हुआ है.

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सैटेलाइट फुटेज में कैद हुई चक्रवात पोलो की आंख. (Photo: ITG) सैटेलाइट फुटेज में कैद हुई चक्रवात पोलो की आंख. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:47 AM IST

चक्रवात 'पोलो' ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. शुक्रवार को यह दोबारा कैटेगरी-5 के तूफान में बदल गया. सैटेलाइट फुटेज में मेक्सिको के प्रशांत तट से दूर खुले समंदर में इसकी 'आंख' घूमती हुई दिखाई दी. इस दौरान तूफान की अधिकतम लगातार हवाओं की रफ्तार 285 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई.

शुक्रवार सुबह 8 बजे 'पोलो' मेक्सिको के काबो कोरिएंटेस से करीब 470 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था. यह 19 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की तरफ बढ़ रहा था. अनुमान है कि वीकेंड के दौरान इसका रास्ता धीरे-धीरे बदलेगा. पहले यह उत्तर-पश्चिम, फिर उत्तर की ओर मुड़ सकता है.

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अगले हफ्ते मैक्सिको के एक और हिस्से के करीब पहुंचेगा

मियामी स्थित मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक, 'पोलो' अगले हफ्ते की शुरुआत में बाजा कैलिफोर्निया सुर के पास पहुंच सकता है. मौजूदा अनुमान में इसके एक बड़े तूफान के रूप में वहां पहुंचने की बात कही गई है. हालांकि, अभी जो रास्ता दिख रहा है, उसके मुताबिक 'पोलो' लॉस काबोस के टूरिस्ट इलाके के उत्तर से गुजर सकता है. यानी फिलहाल इसके सीधे लॉस काबोस से गुजरने का अनुमान नहीं है.

मैक्सिको के तट पर दिख रहा तूफान का असर

रॉयटर्स के मुताबिक, 'पोलो' की वजह से मैक्सिको के प्रशांत तट के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को भी समुद्र में तेज हलचल रही. यहां ऊंची लहरें उठ रही हैं, तेज हवाएं चल रही हैं. कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हुई. तूफान की वजह से इस हफ्ते पहले ही कई कदम उठाने पड़े थे. कुछ जगहों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. बंदरगाह बंद किए गए, जबकि कई स्कूलों में भी छुट्टी करनी पड़ी.

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मौसम विशेषज्ञ मैक्सिको के दक्षिण में मौजूद एक अलग मौसमी सिस्टम पर भी नजर रख रहे हैं. आने वाले दिनों में इसके एक और उष्णकटिबंधीय चक्रवात में बदलने की संभावना है. फिलहाल यह सिस्टम 'पोलो' से अलग है. मौसम विशेषज्ञ इसकी गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि आने वाले दिनों में इसकी दिशा और ताकत का पता चल सके.

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