'फ्रांस में प्रोटेस्ट के पीछे इस्लामी और वामपंथी नेटवर्क, भारत अगला टारगेट!', अमेरिकी पत्रकार ने चेताया

फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट ने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं कि ये प्रदर्शन विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए बढ़ाए जा रहे हैं.

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अमेरिकी पत्रकार ने कहा फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और भारत में प्रदर्शनों का संबंध (File Photo) अमेरिकी पत्रकार ने कहा फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और भारत में प्रदर्शनों का संबंध (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:20 AM IST

फॉक्स न्यूज की जांच में फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की गई है, जिनमें लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट, समाजवादी संगठन और राजनीतिक पार्टियां शामिल हैं. रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और विदेशी फंडिंग के आरोप लगाए गए हैं, जो इन प्रदर्शनों को बढ़ावा दे रहे हैं. भारत में हो रहे प्रदर्शनों से भी इनका संबंध बताया गया है.

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 50 संगठनों में से सिर्फ 15 छात्र या युवा समूह थे. जबकि बाकी 35 संगठनों में लेबर यूनियन, कम्युनिस्ट और समाजवादी संगठन, राजनीतिक पार्टियां और फिलिस्तीन का समर्थन करने वाला एक समूह शामिल था. 

फॉक्स न्यूज ने विरोध-प्रदर्शनों को बढ़ावा देने में अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. इसके साथ ही, आरोप लगाए गए हैं कि कम्युनिस्ट और इस्लामी विचारधारा का समर्थन करने वाले प्लेटफॉर्म इनकी पहुंच बढ़ाने में मदद कर रहे थे. 

फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और भारत में प्रदर्शनों का संबंध
अमेरिकी पत्रकार अस्रा नोमानी ने कम्युनिस्ट और सामाजिक संगठनों के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और भारत में हो रहे प्रदर्शनों के बीच संबंध का दावा किया है.

नोमानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि जिन घटनाओं को लेकर उन्होंने पहले "NEXT: INDIA" यानी 'अगला टारगेट: भारत' कहकर आगाह किया था, वे अब हो रही हैं. उन्होंने अपनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट भी साझा की. इसमें आरोप लगाया गया  है कि कुछ विचारधारा से जुड़े लोग व्यापक कम्युनिस्ट एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्र आंदोलनों का इस्तेमाल करते हैं.

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अपनी पोस्ट में नोमानी ने शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के कारोबारी नेविल रॉय सिंघम का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सिंघम से जुड़े लाखों डॉलर का इस्तेमाल भारत में प्रोपेगैंडा और प्रभाव बढ़ाने वाले अभियानों के लिए किया गया है. नोमानी ने विजय प्रसाद को सिंघम का करीबी बौद्धिक सहयोगी और आयोजक बताया. इससे पहले की एक रिपोर्ट में फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और उन्हें कथित अंतरराष्ट्रीय समर्थन देने वाले नेटवर्क से जुड़े 50 संगठनों की पहचान किए जाने का भी दावा किया गया.

'इंडियन अलायंस पेरिस' का भी जिक्र
इस रिपोर्ट में 'इंडियन अलायंस पेरिस' का भी जिक्र किया गया है. यह फ्रांस में छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों का एक संगठन है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस संगठन में जनवरी 2023 में न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में NATO के विस्तार के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम को सह प्रायोजित किया था. यह कार्यक्रम 'द पीपल्स फोरम' में हुआ था, जो न्यूयॉर्क में कम्युनिस्ट गतिविधियों का केंद्र है. 

रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस केंद्र को 2017 में कारोबारी नेविल रॉय सिंघम से 22.44 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली थी. इस कार्यक्रम का उदाहरण देकर रिपोर्ट में अलग-अलग देशों के संगठनों के बीच संबंध की ओर इशारा किया गया.

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भारत के संगठनों का जिक्र
अपनी हालिया पोस्ट में, नोमानी में दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन का भी जिक्र किया. इन प्रदर्शनों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे समूह शामिल रहे हैं. उन्होंने अपनी पोस्ट में कॉकरोच जनता पार्टी का भी जिक्र किया. नोमानी ने भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े लोगों से ऐसे संगठनों और व्यक्तियों के बारे में जानकारी साझा करने को कहा.

उन्हें आशंका है कि ये नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं. उन्होंने खास तौर पर विजय प्रसाद का नाम लेते हुए कहा कि उनकी जांच-पड़ताल की जानी चाहिए.

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हरीश साल्वे ने जताई थी विदेशी फंडिंग की आशंका
वरिष्ठ वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने सोमवार को कहा था कि देश में चल रहे आंदोलन की फंडिंग विदेशों से हो रही है और इसके पीछे विदेशी ताकतें हैं. उन्होंने कहा कि भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है.
लंदन में हरीश साल्वे ने कहा, "ये प्रयास बाहर से फंडेड है, मैं तो आरोप लगा रहा हूं कि ये बाहर से फंडेड है, ये बाहर से मोटिवेटेड है."

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सीनियर वकील ने बाहरी शक्तियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि बाहर के देश खास करके अमेरिका को देख लो बड़ा नाखुश है इंडिया से और हमारे फाइनेंस मिनिस्टर ने भी कह दिया है सब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स हो रहे हैं, कनाडा के साथ वार्ता आगे बढ़ रही है, अमेरिका के बारे में पूछा तो वित्त मंत्री ने सीधा कह दिया कि ये एक स्तर पर आकर ये अटक गई है."

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