फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में भारतीय पायलट पर हमला हुआ. यात्रियों ने हमलावर ओमानी को-पायलट को पकड़कर उसके हाथ बांध दिए. लेकिन इसी बीच क्रू के कुछ सदस्यों ने यात्रियों से उसे खोलने को कहा. यह दावा उन इजरायली यात्रियों ने किया है, जिन्होंने हमलावर को काबू करने में मदद की थी. यात्रियों का कहना है कि उन्होंने क्रू की बात मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद विमान में क्रू और यात्रियों के बीच बहस शुरू हो गई.
द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, त्ज्विका मानेस और डैनियल श्लिक्टर ने बताया कि जब उन्होंने हमलावर को पकड़कर बांध दिया, तब क्रू के कुछ सदस्यों ने उसे खोलने की मांग की. इस बात को लेकर विमान में बहस शुरू हो गई. यात्रियों ने क्रू की मांग मानने से इनकार कर दिया. हालांकि, रिपोर्ट में क्रू के किसी सदस्य के हमले में शामिल होने की बात नहीं कही गई है. फ्लाईदुबई ने कहा कि मामले की जांच चल रही है, इसलिए वह क्रू के व्यवहार पर अभी कुछ नहीं कह सकती.
यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई. विमान में 174 यात्री सवार थे. UAE के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक, ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर विमान में इस्तेमाल होने वाले क्रैश एक्स से हमला किया. इसके बाद उसने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की.
हमले में घायल होने के बावजूद कैप्टन मछार ने कॉकपिट का दरवाजा खोला. इसके बाद त्जविका मानेस, यानिव हायून और आसफ राजुआन समेत तीन इजरायली यात्री कॉकपिट में पहुंचे. उन्होंने को-पायलट को काबू कर लिया. यात्रियों ने उसे पेट के बल लिटाकर उसके हाथ पीठ के पीछे बांध दिए. इसके लिए जिप टाई और हेडफोन के तारों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें डैनियल श्लिक्टर ने जुटाया था.
'हम उसे मारना नहीं चाहते थे'
त्जविका मानेस के मुताबिक, क्रू के कुछ सदस्यों ने उनसे हमलावर को खोलने के लिए कहा. उनका कहना था कि यात्रियों को उसे मारने का अधिकार नहीं है. इस पर मानेस ने कहा कि उनका मकसद हमलावर को मारना नहीं, बल्कि उसे किसी को नुकसान पहुंचाने से रोकना था. यात्रियों ने घायल को-पायलट को ऑक्सीजन मास्क भी दिया. डैनियल श्लिक्टर ने कहा कि वे चाहते थे कि हमलावर जिंदा रहे, ताकि उससे पूछताछ की जा सके. उनका कहना था कि इसी वजह से उन्होंने उसे ऑक्सीजन दी. रिपोर्ट के मुताबाकि, दोनों यात्रियों ने बताया की बहस तब बढ़ गई जब क्रू के कुछ सदस्यों ने कहा कि विमान में उनकी बात मानी जानी चाहिए. उन्होंने यात्रियों से कॉकपिट के बाहर से हटने को भी कहा. इसके बाद यात्रियों ने क्रू के सदस्यों को विमान की पांचवीं या छठी कतार में बैठा दिया. कॉकपिट के दरवाजे पर नजर रखने के लिए एक अन्य यात्री को तैनात किया गया. इस बीच विमान में मौजूद रिजर्व पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया था.
30 सेकंड में 14 हजार फीट से ज्यादा नीचे आया विमान
इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर उतारा गया. फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, घटना के दौरान विमान 30 सेकंड से भी कम समय में 14 हजार फीट से ज्यादा नीचे आ गया था. UAE के अटॉर्नी जनरल ने शनिवार को इस घटना को आतंकी हमला बताया. जांच एजेंसियां हमले की वजह, पहले से इसकी योजना बनाए जाने और किसी के निर्देश पर ऐसा किए जाने की संभावना की जांच कर रही हैं. सऊदी अधिकारियों ने शुरुआती जांच के बाद को-पायलट को UAE के हवाले कर दिया था.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में दावा किया था कि को-पायलट कट्टरपंथी इस्लामी विचारों से प्रभावित था और आत्महत्या की सोच रखता हुआ दिखाई दे रहा था. उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि ऐसे देश के पायलट को इस उड़ान में कैसे तैनात किया गया, जिसके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं. ओमान के इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं. नेतन्याहू ने यह भी कहा था कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हमलावर के साथ कोई और शामिल था या नहीं और क्या इसमें ईरान की भूमिका थी.
हमले के बाद कैप्टन स्मित मछार को पहले सऊदी अरब के तबुक में इलाज दिया गया. अगले दिन उन्हें UAE ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे वीडियो कॉल पर बात की और मुश्किल हालात में तेजी से फैसले लेने के लिए उनकी तारीफ की.
कैप्टन मछार ने बताया कि हमले के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया था, जिससे उन्हें हिम्मत मिली. शनिवार को UAE के उपप्रधानमंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम ने अबू धाबी में उनसे मुलाकात की. उन्होंने यात्रियों की जान बचाने के लिए पायलट के साहस, जिम्मेदारी और इंसानी जीवन के प्रति उनके समर्पण की सराहना की.
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