चीन पर तीखे हमले करने वाले ट्रंप के सुर क्यों बदले? शी जिनपिंग बने खास दोस्त

डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग की मेजबानी करेंगे और उनसे व्यापार, टेक्नोलॉजी, रेयर अर्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बातचीत करेंगे. यह उस ट्रंप से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने कभी चीन को अमेरिका की आर्थिक गिरावट के लिए मुख्य विलेन बताया था.

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अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहे हैं. (File Photo: Reuters) अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहे हैं. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:27 PM IST

एक समय ऐसा था जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते समय चीन का जिक्र किए बिना रह ही नहीं पाते थे. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और अपने पहले कार्यकाल के दौरान अक्सर वे चीन पर जोरदार हमले करते थे. उन्होंने नौकरियां छीनने, कारखाने बंद करवाने और मध्यम वर्ग को कमजोर करने के लिए बीजिंग को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन समय के साथ उनका नजरिया काफी बदल गया. 

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अब, अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेज़बानी करने की तैयारी कर रहे हैं. इसमें उनका शानदार स्वागत और स्टेट डिनर शामिल है, जो आम तौर पर अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों के लिए ही आयोजित किए जाते हैं.

शी जिनपिंग गुरुवार को एक अहम दौरे पर वाशिंगटन पहुंचेंगे. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी, रेयर अर्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा होने की उम्मीद है. हालांकि, सबसे दिलचस्प बात यह नहीं है कि वे किस बारे में बात करेंगे, बल्कि यह है कि ट्रंप जिनपिंग के बारे में किस तरह बात कर रहे हैं.

ट्रंप ने इस महीने कहा, वे बहुत अच्छे इंसान हैं, हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. हमारे व्यापारिक संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमारे प्रतिस्पर्धी हैं. बता दें, यह उस ट्रंप से बिल्कुल अलग है जिन्होंने कभी चीन को अमेरिका की आर्थिक गिरावट का मुख्य विलेन बताया था.

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2025 में सत्ता में लौटने पर ट्रंप का पहला रुख टकराव वाला था. उन्होंने टैरिफ लगाए, उन्होंने और टैरिफ लगाने की धमकी भी दी. उनके प्रशासन ने चीनी टेक्नोलॉजी पर पाबंदियां कड़ी कर दीं और बीजिंग को अपना आर्थिक व्यवहार बदलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की.

इसके जवाब में चीन ने अपने सबसे बड़े हथियार क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल किया, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद जरूरी हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि अमेरिका को स्पष्ट जीत नहीं मिली.

इस बीच इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एडवाइजर माइकल कोवरिग ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के प्रति अपना नजरिया काफ़ी बदल लिया है क्योंकि बहुत ज़्यादा टैरिफ और निर्यात पाबंदियां लगाने की उनकी शुरुआती कोशिश नाकाम रही थी.

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