मैक्सिम गोर्की ने अपने अमर उपन्यास 'मदर' में जब एक औद्योगिक कस्बे की जिंदगी को उकेरा था, तो उस दौर की सबसे बड़ी मानवीय आकांक्षा थी- कामगारों के लिए एक सम्मानजनक जीवन, सिर पर सुरक्षित छत और उनके बच्चों के लिए बेहतर भविष्य का सपना. उस दौर के औद्योगिक कस्बों की मुख्य पहचान चिमनियों का धुआं, मशीनों की आवाज और दिन-रात की भागदौड़ हुआ करती थी.
आज उस दौर के लगभग सौ साल बाद दुनिया काफी बदल चुकी है. धुएं उगलती चिमनियों की जगह अब चमचमाती हाई-टेक लैब्स ने ले ली है. लेकिन 'कंपनी टाउन' यानी कंपनी के अपने शहर का आइडिया एक बार फिर से बिल्कुल नए अवतार में लौट रहा है.
अमेरिका के टेक्सास में ऑस्टिन शहर से थोड़ी दूरी पर, कोलोराडो नदी के शांत किनारों के पास एक नया कस्बा आकार ले रहा है-स्नेलब्रुक. यह 21वीं सदी का एक ऐसा शहर है जहां पुरानी थकान और धुएं की जगह हाई-टेक सुविधाएं हैं और जहां काम करने के साथ-साथ रहने का अंदाज भी एकदम अलग है.
ऑस्टिन के पास प्रोजेक्ट अमेजिंग के नाम से बन रहा यह रिहायशी इलाका द बोरिंग कंपनी, स्पेसएक्स और न्यूरालिंक जैसी बड़ी टेक कंपनियों के परिसरों से एकदम सटा हुआ है. इस पूरे कस्बे को बसाने का मकसद एकदम सीधा है- कर्मचारियों को हर दिन के लंबे ट्रैफिक जाम और भागदौड़ से बचाना, ताकि ऑफिस पहुंचने में समय बर्बाद न हो और वे अपने काम के साथ-साथ परिवार को भी पूरा वक्त दे सकें.
इस कस्बे का नाम 'स्नेलब्रुक' रखे जाने की वजह भी काफी दिलचस्प है. 'द बोरिंग कंपनी' का मुख्य काम ऐसी टनल मशीनें बनाना है जो एक घोंघे यानी स्नेल की रफ्तार से भी कई गुना तेजी से जमीन के नीचे सुरंग खोद सकें.
अगर हम गोर्की के जमाने के पुराने औद्योगिक कस्बों से स्नेलब्रुक की तुलना करें, तो यह जगह किसी सपनों के शहर यानी यूटोपिया जैसी लगती है. यहां कर्मचारियों की सहूलियत, आराम और वर्क-लाइफ बैलेंस का खास खयाल रखा गया है.
बैस्ट्रोप इलाके में जहां 2-बेडरूम वाले घर का किराया हर महीने लगभग 2,200 डॉलर यानी करीब 1.8 लाख रुपये होता है, वहीं स्नेलब्रुक में कर्मचारियों को केवल 800 डॉलर यानी लगभग 67,000 रुपये में पूरी तरह सुसज्जित मॉड्यूलर घर मिल जाते हैं.
यहां की गलियों के नाम भी बहुत अनोखे हैं. सड़कों के नाम नेताओं के बजाय सुरंग खोदने वाली मशीनों के पुर्जों पर रखे गए हैं. इस कस्बे के अंदर ही कर्मचारियों के बच्चों के लिए मॉन्टेसरी स्कूल भी शुरू किया जा चुका है. इसके अलावा स्विमिंग पूल, मॉडर्न जिम, टेनिस और पिकलबॉल कोर्ट जैसी खेलकूद और मनोरंजन की सुविधाएं भी तैयार हैं.
गोर्की की 'मदर' में जिस बेहतर जिंदगी, बच्चों की अच्छी पढ़ाई और परिवार की सुरक्षा का सपना देखा गया था, स्नेलब्रुक उसी सपने को 21वीं सदी के आधुनिक अंदाज में पूरा करने की एक कोशिश है.
स्नेलब्रुक एक साफ-सुथरा, हरा-भरा और पूरी तरह टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ इलाका है. यहां का पूरा फोकस इस बात पर है कि काम करने की जगह और रहने का माहौल शांत, आरामदायक और तनावमुक्त हो.
यहां का एक साफ-सुथरा नियम यह भी है कि अगर कोई कर्मचारी कंपनी छोड़ता है या नौकरी से अलग होता है, तो उसे 30 दिनों के अंदर अपना घर खाली करना होता है. यह नियम इस टाउनशिप की पूरी व्यवस्था का एक तय हिस्सा है.
कानूनी और प्रशासनिक तौर पर देखें तो स्नेलब्रुक फिलहाल बास्ट्रोप काउंटी के नियमों के तहत एक प्राइवेट रिहायशी परिसर के रूप में काम कर रहा है. वहीं दक्षिण टेक्सास में बना स्टारबेस प्रोजेक्ट स्थानीय वोटिंग और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद एक आधिकारिक नगर पालिका बन चुका है. स्नेलब्रुक भी धीरे-धीरे अपनी एक अलग और आत्मनिर्भर पहचान बना रहा है.
नया प्रयोग कर रही हैं कंपनियां
यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि आज की बड़ी टेक कंपनियां सिर्फ काम लेने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने कर्मचारियों को दफ्तर के पास ही एक आसान, सुविधायुक्त और खुशहाल जिंदगी देने के नए प्रयोग कर रही हैं. आने वाले समय में यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि स्नेलब्रुक का यह मॉडल दुनिया के दूसरे शहरों के लिए कितना बड़ा उदाहरण बनता है.
संक्षेप में कहें तो स्नेलब्रुक सिर्फ मॉड्यूलर घरों, पिकलबॉल कोर्ट और सड़कों से बना कस्बा नहीं, बल्कि भविष्य के शहरी समाज का एक बड़ा कैनवास है. गोर्की के दौर में जहां कामगारों की लड़ाई बुनियादी अधिकारों और सम्मान की थी, वहीं 21वीं सदी के इस स्नेलब्रुक की असली परीक्षा सुविधा और कॉर्पोरेट नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखने की है. आने वाला वक्त ही तय करेगा कि टेक्नोलॉजी और बोर्डरूम के फैसलों से बस रहे ये नए 'कंपनी टाउन' सचमुच इंसानी जीवन को आसान बनाने वाला नया 'यूटोपिया' साबित होते हैं, या फिर कॉरपोरेट सीमाओं में बंधा एक अलग प्रयोग?
संदीप कुमार सिंह