'सर... हमें छोड़कर मत जाइए'! ट्रांसफर की खबर सुनते ही फूट-फूटकर रो पड़े बच्चे, शिक्षक की विदाई का वीडियो वायरल

एक शिक्षक की असली कमाई क्या होती है? न वेतन... न पुरस्कार... बल्कि अपने छात्रों का प्यार... पश्चिम बंगाल के अंडाल में जब बच्चों को पता चला कि उनके टीचर का ट्रांसफर हो गया है, तो पूरा स्कूल भावुक हो गया. किसी बच्चे ने उनका हाथ नहीं छोड़ा, तो किसी ने रोते हुए कहा कि सर, हमें छोड़कर मत जाइए.

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टीचर के ट्रांसफर पर रोने लगे बच्चे. (Photo: Screengrab) टीचर के ट्रांसफर पर रोने लगे बच्चे. (Photo: Screengrab)

अनिल गिरी

  • दुर्गापुर,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

स्कूल में अक्सर छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चे सबसे पहले बाहर भागते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल के एक सरकारी स्कूल में मंगलवार को कुछ अलग ही नजारा था. यहां छुट्टी नहीं, बल्कि अपने सबसे प्रिय शिक्षक की विदाई थी. जैसे ही बच्चों को पता चला कि उनके सर का ट्रांसफर हो गया है, पूरा स्कूल आंसुओं से भर गया. कोई बच्चा शिक्षक का हाथ पकड़कर रोने लगा, तो कोई उनसे लिपट गया. अब इस भावुक विदाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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यह कहानी पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के अंडाल स्थित श्रीरामपुर फ्री प्राइमरी स्कूल की है. यहां पिछले 15 वर्षों से शिक्षक संदीप करमाकर बच्चों को पढ़ा रहे थे. सरकारी नौकरी में ट्रांसफर कोई नई बात नहीं होती. लेकिन इस बार एक ट्रांसफर ने पूरे स्कूल को रुला दिया.

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जैसे ही बच्चों को पता चला कि उनके शिक्षक का तबादला हो गया है, वे खुद को संभाल नहीं सके. कई बच्चे रोते हुए उनके पास पहुंच गए. किसी ने उनका हाथ पकड़ लिया. कोई लिपट गया. और हर बच्चे की जुबान पर बस एक ही बात थी- सर... हमें छोड़कर मत जाइए. कुछ बच्चे यह तक कहते सुनाई दिए कि आप चले गए, तो हम स्कूल नहीं आएंगे. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद दूसरे शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय लोग भी भावुक हो गए.

ऐसे बने बच्चों के 'फेवरेट सर'

संदीप करमाकर पिछले करीब 16 वर्षों से शिक्षक हैं, जिनमें से अधिकांश समय उन्होंने इसी स्कूल में बिताया. स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब वे इस स्कूल में आए थे, तब हालात आज जैसे नहीं थे. धीरे-धीरे उन्होंने सिर्फ बच्चों को पढ़ाया ही नहीं... बल्कि स्कूल का माहौल भी बदल दिया. अनुशासन बेहतर हुआ. पढ़ाई का स्तर सुधरा. स्कूल की बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ. जो बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके थे, उन्हें भी दोबारा स्कूल से जोड़ा गया. यही वजह है कि बच्चे उन्हें सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि अपने मार्गदर्शक की तरह देखते थे.

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विदाई के दौरान खुद संदीप करमाकर भी भावुक नजर आए. उन्होंने बच्चों को समझाते हुए कहा कि यह सरकार का ट्रांसफर आदेश है और सरकारी नियमों के तहत उन्हें नई जगह कार्यभार संभालना होगा. उन्होंने बच्चों से पढ़ाई जारी रखने की अपील की और कहा कि वे इस स्कूल और यहां के बच्चों का प्यार कभी नहीं भूलेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी इच्छा है कि स्कूल आगे बढ़े और यहां के सभी विद्यार्थी जीवन में अच्छे इंसान बनें.

आज के दौर में सोशल मीडिया पर शिक्षकों और छात्रों के विवाद वाले वीडियो अक्सर देखने को मिल जाते हैं. लेकिन यह वीडियो कुछ अलग है. यह किसी विवाद का नहीं... बल्कि विश्वास, सम्मान और अपनापन का वीडियो है. यह दिखाता है कि एक अच्छा शिक्षक सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता... वह बच्चों के जीवन का हिस्सा बन जाता है. शायद इसी वजह से यह वीडियो हजारों लोगों को भावुक कर रहा है, जिसमें एक शिक्षक और उसके विद्यार्थियों के बीच का सच्चा रिश्ता दिखाई देता है.

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