'बंगाल में मुस्लिम IAS-IPS के साथ भेदभाव', महुआ मोइत्रा ने UN से की शिकायत, एक्शन की मांग

UN को लिखी चिट्ठी में सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि जिन अधिकारियों के साथ भेदभाव किया गया है उनमें एक बात समान है. और इसी वजह से उनके साथ भेदभाव किया गया है और वह है उनका धर्म.

Advertisement
महुआ मोइत्रा ने कहा है कि मुस्लिम अफसरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. (Photo: ITG) महुआ मोइत्रा ने कहा है कि मुस्लिम अफसरों के साथ भेदभाव किया जा रहा है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:30 PM IST

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में सीनियर मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है. इस मुद्दे पर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी को पत्र लिखा है. महुआ मोइत्रा ने अल्पसंख्यक मामलों पर UN के स्पेशल रैपोर्टियर को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि वरिष्ठ मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों को गृह मंत्री अमित शाह के दौरों से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया. ऐसा उनके धर्म के कारण किया गया है. 

Advertisement

महुआ मोइत्रा ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए यह मुद्दा उठाया था और आरोप लगाया था कि उत्तरी बंगाल में गृह मंत्री के कार्यक्रमों से मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों को दूर रखा गया. उन्होंने सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर वकार रज़ा, पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स के प्रमुख जावेद शमीम और IAS अधिकारी खलील अहमद का नाम लिया था. 

बाद में इस पोस्ट को लेकर डायमंड हार्बर में TMC सांसद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) में अल्पसंख्यक मामलों के विशेष अधिकारी प्रोफ़ेसर निकोलस लेवराट को लिखे अपने पत्र में मोइत्रा ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त में पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान गृह मंत्री की यात्राओं के समय तीन मौकों पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों को या तो जाने के लिए कहा गया या उन्हें आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल न होने के लिए कहा गया. 

Advertisement

अल्पसंख्यक मामलों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त मानवाधिकारों के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होते हैं. इनका काम वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, बाधाओं की पहचान करना और राष्ट्रीय, जातीय, धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना है. 

उन्होंने चिट्ठी में आरोप लगाया, "इन तीनों अधिकारियों में एक बात समान है, और यही बात उन्हें उन साथियों से अलग करती है जिन्हें बने रहने की इजाज़त दी गई थी और वह है उनका धर्म."

TMC सांसद ने स्पेशल रैपोर्टेयर से आग्रह किया कि वे भारत सरकार से उन अधिकारियों को कथित तौर पर बाहर रखने के कारणों और उस अधिकार के बारे में जानकारी मांगें जिसके तहत ऐसे निर्देश जारी किए गए थे. 

उन्होंने स्पेशल रैपोर्टेयर से यह भी अनुरोध किया कि वे सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहें कि किसी भी अधिकारी को धर्म के आधार पर आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर न रखा जाए और पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियां ​​बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें. 

TMC सांसद ने UN के अधिकारी से अनुरोध किया कि वे अपने अधिकार-क्षेत्र के तहत जो भी उचित समझें, वह कार्रवाई करें. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »