ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पार्टी के कुछ बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. टीएमसी ने इन नेताओं पर जालसाजी करने और पार्टी के नाम व चुनाव चिन्ह के अनधिकृत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. यह शिकायत राज्यसभा सांसद डोला सेन ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की ओर से दर्ज कराई.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बागी नेताओं ने टीएमसी सुप्रीमो की अनुमति के बिना बैठकों का आयोजन किया, फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक मैसेज प्रसारित किए और खुद को पार्टी का आधिकारिक प्रतिनिधि बताने की कोशिश की. यह कार्रवाई उस समय की गई है जब टीएमसी के बागी विधायकों ने खुद को पार्टी की 'राष्ट्रीय कार्यसमिति' घोषित करते हुए अलग बैठकों का आयोजन शुरू कर दिया.
गत 22 जून को ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने वाले 64 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक बैठक बुलाई और 'राष्ट्रीय कार्यसमिति' के गठन की घोषणा की थी. इस समिति में अरूप रॉय को चेयरपर्सन बनाया गया, जबकि ममता बनर्जी को मार्गदर्शक की भूमिका देने का प्रस्ताव रखा गया. वहीं, बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी को टीएमसी से निलंबित कर दिया. इस कदम पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि बागी नेता पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का दुरुपयोग कर रहे हैं और ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ विश्वासघात कर रहे हैं.
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कुणाल घोष ने यह भी दावा किया कि कुछ बागी नेता दबाव में काम कर रहे हैं और पश्चिम बंगाल की जनता टीएमसी के आधिकारिक नेतृत्व को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को खारिज कर देगी. टीएमसी के बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि नई कार्यसमिति पार्टी के संविधान के अनुसार गठित की गई है और विशेष सत्र की कार्यवाही चुनाव आयोग को भेजी जाएगी.
उन्होंने कहा कि जल्द ही जिला समितियों, राज्य इकाई और प्रवक्ताओं का पैनल भी गठित किया जाएगा ताकि संगठन का विस्तार किया जा सके. ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि बागी गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है. हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो इस गुट की मुख्य सलाहकार (चीफ एडवाइजर) बन सकती हैं. बागी विधायकों ने इलेक्शन कमिशन में भी असली टीएमसी होने का दावा किया है.
तपस सेनगुप्ता