'आग बहुत तेजी से फैल रही थी, लोग चीख रहे थे', चश्मदीद हासिम ने बताया बस अग्निकांड का खौफनाक मंजर

यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई. देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों और धुएं से घिर गई. हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई. उरई के हासिम खान ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस में फंसे करीब 13 से 14 यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की. इस दौरान उन्हें कमर में अंदरूनी चोट आई.

Advertisement
चश्मदीद ने बताया बस में आग का खौफनाक मंजर. (Photo: Screengrab) चश्मदीद ने बताया बस में आग का खौफनाक मंजर. (Photo: Screengrab)

मोहम्मद अलीम सिद्दीकी

  • जालौन,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

यमुना एक्सप्रेसवे पर देर रात दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में अचानक लगी आग ने यात्रियों को कुछ ही पलों में मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया. बस में आग लगने के बाद देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं और धुआं अंदर भरने लगा. यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई. इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री बुरी तरह झुलस गए. इसी भयावह हादसे के बीच जालौन के उरई के लहरिया पुरवा निवासी हासिम खान ने ऐसा साहस दिखाया, जिसे हादसे में बची जिंदगियों से जोड़कर देखा जा रहा है. हासिम खुद बस में सवार थे. आग लगने के बाद जब यात्री अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया. उनके मुताबिक, उन्होंने करीब 13 से 14 यात्रियों को बस से बाहर निकलने में मदद की.

Advertisement

मिली जानकारी के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई स्लीपर बस दिल्ली से महोबा जा रही थी. बस का नंबर BR32 PA8647 बताया गया है. यह बस राज कल्पना ट्रैवल्स की बताई जा रही है. कंपनी की बसें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार के अलग-अलग मार्गों पर संचालित होती हैं. हासिम खान भी इसी बस में सवार थे. उन्होंने बताया कि वह नोएडा से बस में बैठे थे. बस कुछ ही दूरी चली थी कि अचानक आग लगने की जानकारी हुई. देखते ही देखते हालात बिगड़ने लगे. हासिम के मुताबिक, आग लगने के बाद ड्राइवर और कंडक्टर बस को रोककर बाहर निकल गए. इसके बाद बस के अंदर मौजूद यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई. हर कोई किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाना चाहता था.

धुएं और लपटों के बीच यात्रियों को निकालते रहे

Advertisement

हासिम ने बताया कि आग बहुत तेजी से फैल रही थी. यात्रियों को बाहर निकलने के लिए ज्यादा समय नहीं मिल रहा था. बस के अंदर धुआं भर चुका था और चारों तरफ आग की लपटें दिखाई दे रही थीं. सबसे ज्यादा परेशानी पीछे की सीटों पर बैठे यात्रियों को हुई. आग और धुएं के बीच उनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था. इसी दौरान हासिम ने हिम्मत जुटाई और बस के अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया. हासिम के अनुसार, उन्होंने करीब 13 से 14 लोगों को बस से बाहर निकलने में मदद की. इस दौरान वह खुद भी लगातार खतरे में थे. आग बढ़ती जा रही थी, लेकिन बस के अंदर फंसे यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर वह उन्हें बाहर निकालने में जुटे रहे. उनके लिए उस समय अपनी जान से ज्यादा बस में फंसे लोगों को बाहर निकालना जरूरी था. इसी कोशिश में वह कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करने में सफल रहे.

बचाव के दौरान हासिम को खुद भी चोट लगी. उन्होंने बताया कि जब वह यात्रियों को बाहर निकालने में मदद कर रहे थे, तभी उनके ऊपर कुछ यात्री गिर गए. इससे उनकी कमर में अंदरूनी चोट आई. हादसे के दौरान स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी. हासिम के मुताबिक, आग की लपटें तेज होती जा रही थीं और बस के टायर फटने जैसी आवाजें भी सुनाई दे रही थीं. ऐसे माहौल में बस के अंदर मौजूद लोगों के बीच डर और अफरा-तफरी का माहौल था. बस में यात्रियों के सामान के अलावा अन्य सामान भी रखा हुआ था. हासिम के मुताबिक, इससे आग की भयावहता और बढ़ गई.

Advertisement

इस हादसे में हासिम का अपना सामान भी बस के अंदर रह गया. उन्होंने बताया कि उनका बैग बस में था. उस बैग में करीब 1 लाख 14 हजार रुपये रखे हुए थे.  आग के बीच उनके पास अपना सामान निकालने का समय नहीं था. वह अपने बैग और उसमें रखे पैसों की चिंता करने के बजाय बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में जुटे रहे. बस में आग तेजी से फैल रही थी और हर पल स्थिति खतरनाक होती जा रही थी. ऐसे में हासिम ने यात्रियों को बाहर निकालने को प्राथमिकता दी. उनका सामान और पैसे बस में ही रह गए.

हासिम ने बताया कि बस के पीछे की तरफ फंसे कई यात्री बाहर नहीं निकल पाए. कुछ लोग आग की चपेट में आ गए. इस हादसे में कुल 9 लोगों की मौत हो गई.  हादसे के दौरान बस के अंदर का मंजर बेहद भयावह था. आग और धुएं के बीच यात्रियों को बाहर निकलने के लिए संघर्ष करना पड़ा. कई लोगों के लिए यह संघर्ष जिंदगी और मौत के बीच का था. हासिम खुद इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी हैं. उन्होंने जो देखा और जिस तरह यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की, वह उनके लिए भी बेहद खौफनाक अनुभव रहा.

Advertisement

हादसे की याद अब भी नहीं भूल पा रहे हासिम

यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ यह हादसा यात्रियों के लिए बेहद दर्दनाक रहा. एक तरफ बस आग की लपटों में घिरती चली गई और दूसरी तरफ यात्री अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. इसी बीच उरई के हासिम खान ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की. करीब 13 से 14 यात्रियों को बाहर निकालने में मदद करने के दौरान उन्हें कमर में अंदरूनी चोट भी आई. उनका करीब 1 लाख 14 हजार रुपये वाला बैग भी बस में रह गया. हासिम के मुताबिक, पीछे की तरफ फंसे कई यात्री बाहर नहीं निकल पाए और कुछ आग की चपेट में आ गए. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हुई. हादसे का वह मंजर हासिम के लिए भी जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन गया है.


 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »