30 लाख का इनाम, TPC की कमान और वाराणसी में एनकाउंटर... कौन था बृजेश गंझू, जिसकी तलाश में जुटी थीं एजेंसियां?

वाराणसी में ATS के साथ मुठभेड़ में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली बृजेश गंझू उर्फ गोपाल की मौत हो गई. बृजेश पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और NIA की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस के मुताबिक, वह प्रतिबंधित नक्सली संगठन TPC का कमांडर था और उसके खिलाफ टेरर फंडिंग, रंगदारी, विकास कार्यों में बाधा डालने और पुलिस-सुरक्षाबलों पर हमले जैसे कई गंभीर आरोप दर्ज थे.

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वाराणसी में हुए एनकाउंटर में मारा गया नक्सली कमांडर. (Photo: ITG) वाराणसी में हुए एनकाउंटर में मारा गया नक्सली कमांडर. (Photo: ITG)

रोशन जायसवाल / संतोष शर्मा

  • वाराणसी/लखनऊ,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:22 PM IST

यूपी के वाराणसी में रविवार सुबह एक एनकाउंटर हुआ. इसमें 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी TPC का कमांडर था. उस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और NIA ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. आखिर बृजेश गंझू था कौन? उसके ऊपर इतने बड़े इनाम की वजह क्या थी? और झारखंड का रहने वाला ये नक्सली वाराणसी में क्या कर रहा था? पूरी कहानी समझिए.

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पुलिस के मुताबिक, बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता झारखंड के चतरा जिले के लूटू थाना क्षेत्र का रहने वाला था. बृजेश का नाम प्रतिबंधित नक्सली संगठन TPC से जुड़ा था. TPC यानी तृतीय प्रस्तुति कमेटी. झारखंड में एक्टिव रहे इस संगठन से बृजेश के जुड़े होने और कमांडर की भूमिका निभाने की बात पुलिस की ओर से कही गई है. बृजेश पर कई गंभीर आरोप थे. इनमें टेरर फंडिंग, रंगदारी, नक्सली संगठन की गतिविधियां चलाना, विकास कार्यों में बाधा डालना और पुलिस-सुरक्षाबलों पर हमला करना शामिल है. इन्हीं मामलों की वजह से वह सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था.

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झारखंड सरकार और एनआईए ने रखा था इनाम

बृजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इसमें 25 लाख रुपये झारखंड सरकार की ओर से और 5 लाख रुपये NIA की ओर से बताए गए. यानी अलग-अलग एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं. वह लंबे समय से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर था. अब कहानी झारखंड से निकलकर वाराणसी पहुंचती है. ATS के मुताबिक, 20 सितंबर की सुबह बृजेश अपने एक साथी के साथ बाइक पर सवार होकर टेंघरा मोड़ से मुगलसराय की तरफ जा रहा था. रास्ता रामनगर थाना क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसी दौरान ATS को मुखबिर से सूचना मिली कि 30 लाख का इनामी नक्सली इसी इलाके में मौजूद है.

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इसके बाद टीम ने उसकी तलाश शुरू की. पुलिस ने उसे रोककर गिरफ्तार करने की कोशिश की. लेकिन पुलिस के मुताबिक, बृजेश रुकने के बजाय बाइक से कूद गया और फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद जवाबी फायरिंग हुई.

मुठभेड़ के दौरान बृजेश की तरफ से हुई फायरिंग में पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोलियां लगीं. ATS के मुताबिक, DYSP विपिन राय और हेड कॉन्स्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी. यानी पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी. इसके बाद हुई क्रॉस फायरिंग में बृजेश को गोली लगी. पुलिस उसे लेकर अस्पताल पहुंची. वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

बृजेश गंजू झारखंड का था और उस पर वहां से जुड़े गंभीर मामले बताए जा रहे थे. ऐसे में सवाल है कि वह वाराणसी क्यों आया था? क्या वह यहां किसी से मिलने आया था? क्या वाराणसी में उसका कोई नेटवर्क था? क्या उसके साथ मौजूद व्यक्ति को उसकी गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी थी? इन सवालों के जवाब अभी जांच का हिस्सा हैं. बृजेश की वाराणसी में मौजूदगी और उसके संभावित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.

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एक तरफ पुलिस बृजेश को लंबे समय से तलाश रही थी और उसके ऊपर 30 लाख रुपये का इनाम था. दूसरी तरफ रविवार सुबह वाराणसी में उसकी मौजूदगी की सूचना मिली. ATS ने उसे रोकने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, उसने फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल ले जाने के बाद उसकी मौत हो गई.

बृजेश गंझू पर वसूली के आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक, बृजेश गंझू पर झारखंड के कोयलांचल इलाकों में सक्रिय कंपनियों, आउटसोर्सिंग एजेंसियों, ट्रांसपोर्टरों, रेलवे ठेकेदारों और बीड़ी पत्ता कारोबारियों से वसूलने के आरोप थे. एजेंसियों के अनुसार, इस तरह जुटाई गई रकम का इस्तेमाल नक्सली संगठन की गतिविधियों के लिए किया जाता था. NIA की जांच में कोयला परियोजनाओं से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और TPC तक पहुंचने वाली रकम की भी पड़ताल की गई थी. टेरर फंडिंग मामले में भी बृजेश गंझू समेत कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी.

बृजेश गंझू का पारिवारिक कनेक्शन भी सामने आया है. उसका भाई गणेश गंझू सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुका है. इसके बावजूद बृजेश लंबे समय से अपने पैतृक घर से दूर जंगलों और दूसरे ठिकानों से TPC को चला रहा था. सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान उसके पैतृक घर की कुर्की किए जाने की बात भी सामने आई है.

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MCC से शुरू हुआ था नक्सली सफर

बृजेश गंझू के नक्सली बनने की कहानी भी इस मामले का अहम हिस्सा है. उसने 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में झारखंड में सक्रिय माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर यानी MCC से जुड़कर नक्सली गतिविधियों में कदम रखा था. शुरुआती दौर में वह संगठन में सामान्य कैडर के तौर पर काम करता था. समय के साथ वह संगठन की रणनीति और हथियारों के इस्तेमाल में माहिर होता गया. बाद में संगठन के भीतर मतभेद के बाद उसने अलग रास्ता अपनाया और वर्ष 2001-02 के दौरान MCC से अलग होकर TPC के गठन की दिशा में आगे बढ़ा.

वर्ष 2006 में रिहा होने के बाद से ही पुलिस बृजेश गंझू की तलाश में थी. उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज थे. इसके बाद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा और जंगलों तथा दूसरे ठिकानों से संगठन की गतिविधियां संचालित करता रहा.

ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने एनकाउंटर पर क्या कहा?

उत्तर प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर और यूपी ATS चीफ अमिताभ यश ने वाराणसी में 30 लाख के इनामी नक्सली बृजेश गंझू उर्फ गोपाल के एनकाउंटर को लेकर आजतक से बातचीत की. अमिताभ यश के मुताबिक, बृजेश गंझू बेहद खतरनाक नक्सली था और उसके बारे में यूपी ATS को लगातार Specific इनपुट मिल रहा था. इसी के आधार पर वाराणसी के रामनगर इलाके में घेराबंदी की गई थी. पुलिस टीम ने उसे पकड़ने की कोशिश की, जिसके बाद क्रॉस फायरिंग हुई.

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ADG लॉ एंड ऑर्डर ने बताया कि बृजेश गंझू के खिलाफ 45 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे. इनमें से दो मामलों की जांच NIA कर रही है. वह झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन TPC का कमांडर भी रह चुका था.

अमिताभ यश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नक्सली गतिविधियां पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं, लेकिन कुछ स्लीपर सेल अभी भी मौजूद हैं. यूपी ATS इन स्लीपर सेल्स पर लगातार नजर बनाए हुए है. उन्होंने बताया कि एनकाउंटर के दौरान बृजेश गंझू के साथ एक और व्यक्ति मौजूद था, लेकिन फिलहाल उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है. उसकी तलाश और पहचान को लेकर जांच जारी है.

ADG के मुताबिक, बृजेश गंझू पर नक्सली हमलों के अलावा पुलिसकर्मियों की हत्या में भी शामिल होने के आरोप थे. फिलहाल एजेंसियां उसके आपराधिक रिकॉर्ड और नक्सली नेटवर्क से जुड़े दूसरे पहलुओं की जानकारी जुटा रही हैं.

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(सुरेंद्र कुमार गुप्ता के इनपुट के साथ)

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