पुरानी कहावत है कि मजबूरी इंसान को सबकुछ सीखा देती है. यही मजबूरी उत्तर प्रदेश के वाराणसी के बाढ़ पीड़ितों नाविकों के आगे बाढ़ की विभीषिका के रूप में हर वर्ष आ जाती है. जब प्रशासन नौका संचालन पर रोक लगा देता है. देर से ही सही इस बार गंगा ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. जिसके चलते वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पार चला गया है और नौका संचालन पर भी रोक हफ्तों से लगी हुई है.
अब जब काशी के हजारों नाविक नाव का संचालन नहीं कर पा रहे तो इस मौसमी बेरोजगारी में दूसरे हुनर में अपने आप को ढाल लिया है. कोई वहीं गंगा घाट पर फोटोग्राफी सीखकर सैलानियों और आस्थावानों की तस्वीरें खींच रहा है, तो कोई छोटी फूल-माला की दुकान ही खोल लिया है.
एक नाविक शिवाकांत साहनी पिछले 5-6 वर्षों से बाढ़ के सीजन में फोटोग्राफी करते हैं. 'आजतक' से खास बातचीत में बताते हैं कि वे आम लोगों की तरह महीने की नौकरी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें रोज कमाई करनी होती है और रोज खर्च भी रहता है, इसीलिए उन्होंने कैमरा लेने की सोची.
उन्होंने बताया कि एक फोटो खींचकर और डेवलप करके देने का उसकी लागत 12 रुपया आती है और उसे आगे 30-50 रुपए में बेच देते है. प्रतिदिन 10-20 फोटो ही खींच पाते हैं, क्योंकि बहुत सारे फोटोग्राफर हो गए है. इस तरह रोजाना 300-500 रुपए कमा लेते हैं.
शिवाकांत ने बताया कि सभी घाटों को मिला लें तो नाविक से फोटोग्राफर बने लोग 300 तक होंगे और सभी फोटोग्राफर को मिला लें तो 500 से ऊपर संख्या होगी. देखें VIDEO:-
युवा नाविक विकास साहनी भी गले में कैमरा लटकाए लोगों की फोटो दशाश्वमेध घाट पर खींचता नजर आया. उसने बताया कि सामान्य दिनों में नाव चलाते हैं और बाढ़ के दिनों में फोटोग्राफी करते हैं. दिनभर में 10-15 फोटो तक क्लिक कर लेते हैं. रोज कुल प्रॉफिट 300-500 रुपए हो जाता है. उन्होंने बताया कि अच्छे कैमरों वाले मोबाइल के आ जाने से लोग उसी से तस्वीरे क्लिक कर लेते है और रील भी बना लेते हैं, जिससे उनके काम पर बहुत असर पड़ा है.
नाव बंद हो जाने पर फूल माला की छोटी दुकान दशाश्वमेध घाट पर लगाने वाले सागर साहनी ने बताया, नाव चलाकर 600-700 रुपए प्रतिदिन कमाते थे, लेकिन अभी माला बेचकर 300-400 रुपए ही कमा पाते हैं. ये काम मजबूरी में करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल से बाढ़ के मौसम में फूल-माला बेच रहे हैं, जिससे परिवार चल जा रहा है. फूलमाला ही बेचने वाले एक अन्य नाविक शंकर साहनी ने भी कमोबेश ऐसा ही बताया.
रोशन जायसवाल