अखिलेश यादव का एक फोन और खुल गया चढ़ावा चोरी कांड! सपा नेता का दावा, बताई इनसाइड स्टोरी

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने दावा किया है कि इस पूरे मामले की जानकारी सबसे पहले अखिलेश यादव को मिली थी. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट के भीतर ही कर्मचारियों के बीच चोरी किए गए चढ़ावे के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मामला बाहर आया.

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अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ. (Photo: FB/@Pawanpandey) अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ. (Photo: FB/@Pawanpandey)

कुमार अभिषेक

  • अयोध्या,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:29 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब सियासी और धार्मिक दोनों स्तरों पर बड़ा विवाद बनता जा रहा है. समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या से पूर्व विधायक पवन पांडे (तेज नारायण पांडे) ने दावा किया है कि राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की चोरी की जानकारी सबसे पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को मिली थी. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने खुद उन्हें फोन कर इस मामले की पुष्टि की थी.

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'यूपी तक' (UP TAK) के पॉडकास्ट में पवन पांडे ने दावा किया कि अखिलेश यादव को पहले से सूचना मिली थी कि राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी हो रही है. पवन पांडे के मुताबिक, जब अखिलेश यादव ने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने अपने स्तर पर पुष्टि की कि मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की चोरी हुई है और बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है. इसके बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद पूरे देश में इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई.

​चोरी में शामिल लोग बंटवारे को लेकर भिड़े: पवन पांडे

सपा के पूर्व विधायक पवन पांडे ने दावा किया कि यह मामला दो वजहों से बाहर आया. पहला- उनके मुताबिक 'भगवान राम ने ही इस सच को सामने लाने के लिए अखिलेश यादव को चुना.' वहीं दूसरा कारण उन्होंने यह बताया कि कथित तौर पर चोरी में शामिल लोग आपस में बंटवारे और हिस्सेदारी को लेकर भिड़ गए, जिसके बाद मामला बाहर आने लगा. पवन पांडे ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले लोगों के बीच 'कौन ज्यादा पैसा और आभूषण बाहर ले जा रहा है' इसे लेकर विवाद शुरू हुआ. 

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इसी टकराव के बाद कथित चोरी की बातें बाहर आने लगीं. पवन पांडे ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए आभूषण, चांदी और नकदी तक गायब की जा रही थी. समाजवादी पार्टी के नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट में पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे. उन्होंने 2021 के जमीन खरीद विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि 2 करोड़ रुपये की जमीन कुछ ही समय में 20 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी, लेकिन उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनके मुताबिक, चढ़ावा चोरी का मामला भी लंबे समय से दबाया जा रहा था.

राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की ही चलती है: पवन पांडे

पवन पांडे ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बिना चंपत राय की मर्जी के ट्रस्ट में पत्ता तक नहीं हिलता था. उन्होंने दावा किया कि चढ़ावा चोरी करने वालों को संरक्षण दिया गया और इसी वजह से बाद में इस्तीफे देने पड़े. सपा नेता ने कहा कि अगर चंपत राय पूरी तरह निर्दोष होते तो इस्तीफा नहीं देते. पवन पांडे ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने आरोप लगाए अगर वे गलत थे, तो उनके खिलाफ ट्रस्ट की ओर से मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है.

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समाजवादी पार्टी नेता ने SIT जांच पर भी सवाल उठाए. पवन पांडे ने कहा कि उन्हें जांच पर भरोसा नहीं है, क्योंकि ट्रस्ट ही शिकायतकर्ता भी है और उसी को रिपोर्ट भी सौंपी जानी है. उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. सपा नेता ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और अगर वहां चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है तो यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ धोखा है. उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और मामले की परत-दर-परत जांच होनी चाहिए.

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