उत्तर प्रदेश के शामली में आयुष मलिक धर्म परिवर्तन मामले को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक खबरों के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है. पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जो इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना फैला रहे थे. इन लोगों ने दावा किया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को फटकार लगाई है, जबकि पुलिस के मुताबिक यह जानकारी पूरी तरह गलत और तथ्यहीन है.
पूरा मामला 6 जून का है, जब देवराज मलिक ने शामली कोतवाली में शिकायत दी थी कि चांदनी कुरैशी, उसके पिता और अन्य परिजनों ने उसके बेटे आयुष मलिक का इस्लाम धर्म में धर्म परिवर्तन करा दिया है. शिकायत में यह भी कहा गया था कि उन्हें और उनकी पत्नी को धर्म बदलने और संपत्ति अपने नाम कराने के लिए धमकाया जा रहा है.
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की कई धाराओं और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, लेकिन 24 जुलाई 2026 को शामली की जिला अदालत ने उन्हें जमानत दे दी.
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इसके बाद 9 सितंबर को आयुष मलिक के दोस्त बताने वाले सुल्तान कारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. उन्होंने मांग की कि आयुष मलिक को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, उनका बयान लिया जाए और उन्हें स्वतंत्र रूप से रहने की इजाजत दी जाए.
हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ने 16 सितंबर 2026 को आयुष मलिक को कोर्ट में पेश किया. दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को अपनी इच्छा के मुताबिक कहीं भी रहने और आने-जाने की आजादी दे दी.
पुलिस ने साफ किया कि कोर्ट ने पुलिस से कोई हलफनामा नहीं मांगा और पुलिस ने कोई हलफनामा दाखिल भी नहीं किया. यह मामला पूरी तरह पिता और बेटे के बीच का विवाद है. गलत जानकारी फैलाने वालों में एक्स पर करिश्मा अजीज, निखत अली, द मुस्लिम, वसीम अकरम त्यागी, सैयद कैफ हसन और फेसबुक पर नदीम साई शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ शामली कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
शरद मलिक