SIT रिपोर्ट से पहले संभल हिंसा पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, आरोपी मोहम्मद वारिस पर लगा रासुका

संभल हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. हिंसा के मुख्य आरोपियों में शामिल मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) लगा दिया गया है. यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब विधानसभा के मानसून सत्र में इस मामले की एसआईटी रिपोर्ट पेश किए जाने की तैयारी है. इससे पहले दो अन्य आरोपियों पर भी रासुका लगाया जा चुका है.

Advertisement
नवंबर 2024 में संभल में हुआ था उपद्रव. (File Photo: ITG) नवंबर 2024 में संभल में हुआ था उपद्रव. (File Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

संभल हिंसा मामले में यूपी सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है. अब इस मामले के आरोपी मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है. इस फैसले के बाद संभल हिंसा केस में रासुका के तहत कार्रवाई झेलने वाले प्रमुख आरोपियों की संख्या और बढ़ गई है.

सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में संभल हिंसा मामले की विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सदन में पेश की जानी है. माना जा रहा है कि सरकार हिंसा के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट मैसेज देना चाहती है.

Advertisement

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने मोहम्मद वारिस को हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल माना है. इसी आधार पर उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाने का फैसला लिया गया. इससे पहले इसी मामले में मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम पर भी रासुका लगाया जा चुका है. यानी अब तक संभल हिंसा मामले में तीन प्रमुख आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई हो चुकी है.

यह भी पढ़ें: UP: संभल हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा पर शिकंजा, अब पुलिस ध्वस्त करेगी नेटवर्क

एसआईटी की रिपोर्ट से पहले सरकार की यह कार्रवाई राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम मानी जा रही है. संभल हिंसा का मामला उत्तर प्रदेश की प्रमुख कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं में शामिल रहा है.

अब इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे अब विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में हिंसा की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, जांच के निष्कर्ष और जिम्मेदार लोगों से जुड़े अहम बिंदु शामिल होंगे.

Advertisement

क्या था संभल हिंसा का मामला?

संभल हिंसा नवंबर 2024 में उस समय हुई थी, जब यहां न्यायालय के आदेश पर मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वे का स्थानीय लोगों के एक समूह ने विरोध किया था. यह सर्वे उस याचिका के आधार पर कराया जा रहा था, जिसमें दावा किया गया था कि मौजूदा जामा मस्जिद जिस जगह पर बनी है, वहां पहले हरिहर मंदिर था. सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए थे और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था.

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, आगजनी और झड़पें हुईं थीं. हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया था. इस हिंसा में मौतें हुईं, सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए थे. घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन स्कूल बंद कर दिए थे. इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं गई थीं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »