उत्तर प्रदेश के संभल में 50 करोड़ की पांच बीघा जमीन को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. एक साल तक SDM कोर्ट में चली सुनवाई के बाद विवादित जमीन को दोबारा 'आर्य समाज मंदिर' और ग्राम समाज के नाम दर्ज कर दिया गया है. अदालत के आदेश के बाद राजस्व रिकॉर्ड से अवैध रूप से दर्ज मुस्लिम नामों को हटा दिया गया है.
आदेश मिलते ही तहसील प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची. वहां जमीन की पैमाइश की गई तो 3,350 स्क्वायर मीटर जमीन पर 10 पक्के मकान और एक मजार बनी हुई मिली. प्रशासन ने अवैध कब्जाधारियों को चेतावनी दी है कि वो खुद जमीन खाली कर दें, वरना बुलडोजर कार्रवाई होगी.
बता दें कि ये मामला संभल के शेर खां सराय इलाके का है. यहां स्थित गाटा संख्या 103, 106 और 107 की कुल 3,350 स्क्वायर मीटर जमीन पर आर्य समाज मंदिर ने अपना दावा ठोंका था. आर्य समाज मंदिर प्रतिनिधियों ने करीब एक साल पहले संभल जिला प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई थी.
शिकायतकर्ता का दावा था कि साल 1960 में हुई चकबंदी प्रक्रिया के दौरान इन तीनों गाटा संख्याओं की जमीन आधिकारिक रूप से 'आर्य समाज मंदिर' के नाम दर्ज की गई थी. लेकिन बाद में फर्जीवाड़े और मिलीभगत के जरिए इस जमीन पर निजी लोगों के नाम दर्ज करा लिए गए.
SDM कोर्ट का फैसला: निरस्त हुए 11 नाम
शिकायत मिलने के बाद ये मामला संभल एसडीएम विकास चंद्र के न्यायालय में दर्ज हुआ. एक साल तक चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दस्तावेज और सबूत पेश किए. सुनवाई के दौरान SDM कोर्ट ने तहसीलदार से मौके की रिपोर्ट मांगी.
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में पता चला कि 3,350 स्क्वायर मीटर जमीन आर्य समाज मंदिर की ही है और इस पर अवैध रूप से पक्के मकान और मजार बनाया गया है. रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम विकास चंद्र ने फैसला सुनाते हुए जमीन को फिर से आर्य समाज मंदिर और प्रधान ग्राम समाज के नाम दर्ज कर दिया गया.
इस जमीन से अब अकीला बेगम, अहमद हसन, गुलाम वारिस, मोहम्मद अली, मोहम्मद आलम, मोहम्मद हसन, माहिर हुसैन, तकिरुल्लाह, नुरुल्ला, शब्बीरन और सुल्तान के नामों को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है.
तहसीलदार का बयान: प्लाटिंग करके बेची गई थी जमीन
मामले की जानकारी देते हुए तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया, 'गाटा संख्या 103, 106 और 107 राजस्व रिकॉर्ड में आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज जमीन थी, जिसका मैनेजमेंट ग्राम समाज के प्रधान को सौंपा गया था. लेकिन पहले ग्राम समाज के प्रधान और कुछ स्थानीय लोगों ने पूरी जमीन पर अवैध कब्जा करके प्लॉटिंग कर दी और इसे बेच दिया. इस जमीन पर एक मजार और 10 से ज्यादा मकान बना लिए गए थे.'
उन्होंने आगे कहा, 'जांच रिपोर्ट के आधार पर SDM कोर्ट ने जमीन को दोबारा आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज कर दिया है. हमारी अपील है कि लोग जमीन को खुद से खाली कर दें, वरना नियम के मुताबिक बेदखली और बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी.'
मुस्लिम पक्ष का दावा: 150 साल पुरानी है दरगाह
दूसरी तरफ, प्रशासनिक कार्रवाई और अल्टीमेटम के बाद स्थानीय मौलाना मुशर्रफ हुसैन ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं. मौलाना मुशर्रफ हुसैन ने कहा, 'ये मजार लगभग 100 से 150 साल पुरानी है, जो मुगल बादशाह अकबर के जमाने की बताई जाती है. इस मजार पर सालाना उर्स के लिए व्यवस्थाएं होती रही हैं. प्रशासन भले ही इसे आर्य समाज की जमीन बता रहा है, लेकिन हमारे बुजुर्ग बताते हैं कि ये खरीदी हुई जमीन थी जिस पर दरगाह बनाई गई थी.'
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बुलडोजर एक्शन की तैयारी
फिलहाल मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, नापजोख की रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब तहसीलदार कोर्ट में धारा 67 के तहत अवैध बेदखली की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी. नोटिस की मियाद पूरी होने के बाद मजार और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर भी चल सकता है.
अभिनव माथुर