अयोध्या कितनी बदली? आजतक पंचायत में संत बोले- लाठियों और कर्फ्यू के दौर से निकलकर मिली वैश्विक पहचान

श्रीराम जन्मभूमि दीपोत्सव और नरक चतुर्दशी के पावन अवसर पर आयोजित 'पंचायत आजतक अयोध्या' के मंच पर अयोध्या संतों ने अयोध्या के कायाकल्प, सनातन संस्कृति, राम मंदिर निर्माण के संघर्ष और सुरक्षा व्यवस्था पर खुलकर विचार रखे. साथ ही संतों ने राममंदिर में चंदा चोरी पर भी बात रखी.

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आजतक पंचायत अयोध्या के मंत पर संत (Photo-ITG) आजतक पंचायत अयोध्या के मंत पर संत (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:43 AM IST

 'पंचायत आजतक अयोध्या' के मंच पर आयोजित अयोध्या कितनी बदली के विशेष सत्र के दौरान अयोध्या के प्रमुख संत समाज ने सनातन संस्कृति, राम मंदिर के विकास, सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावे के मामलों पर विस्तार से अपने विचार रखे. इस दौरान हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, स्वामी करपात्री महाराज और जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य सहित अन्य धर्माचार्यों ने हिस्सा लिया.

संतों ने सनातन संस्कृति, राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या के बदलते स्वरूप पर खुलकर अपनी बात रखी. हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, स्वामी करपात्री जी महाराज सहित अन्य धर्माचार्यों ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में विकास और प्रशासनिक व्यवस्था के स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं.

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राम मंदिर में कथित चोरी के मुद्दे पर संतों ने दावा किया कि मंदिर में कोई चोरी नहीं हुई है, बल्कि बैंक लेन-देन से जुड़ी गड़बड़ी का मामला था. संतों ने अयोध्या में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले रामभक्तों को कई तरह की पाबंदियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन मॉडल की सराहना करते हुए संतों ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है. उनके मुताबिक, योगी आदित्यनाथ देश और दुनिया में एक प्रभावशाली नेतृत्व के रूप में उभरे हैं.

'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे'

'पंचायत आजतक' कार्यक्रम में संतों ने भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के पीछे संत समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और रामभक्तों के संघर्ष व समर्पण को याद किया.

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महंत राजू दास और अन्य धर्माचार्यों ने कहा कि 1980 के दशक से लेकर राम मंदिर निर्माण तक का सफर लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान का साक्षी रहा है. संतों ने अतीत को याद करते हुए कहा कि एक समय अयोध्या में रामभक्तों को राम नाम लेने और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने तक में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.

महंत राजू दास ने कहा कि 'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' का संकल्प आज भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर के रूप में साकार हुआ है.

राजूदास ने ने 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए राम मंदिर आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले रामभक्तों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने दिगंबर अखाड़ा गली में हुए घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि निहत्थे रामभक्तों के बलिदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। संतों ने इस बलिदान की स्मृति को देश और दुनिया तक पहुंचाने की अपील भी की.

विक्रमादित्य से लेकर आधुनिक अयोध्या का पुनरुद्धार 

'पंचायत आजतक' के मंच पर जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य जी महाराज और अन्य संतों ने अयोध्या के पौराणिक एवं धार्मिक महत्व पर विचार रखे. संतों ने कहा कि अयोध्या केवल एक नगर या भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति का प्रमुख केंद्र है. यह नगरी पूरी दुनिया को मानवता और धर्म का संदेश देती है.

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संतों ने धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन काल में महाराजा विक्रमादित्य ने अयोध्या के प्राचीन धार्मिक स्थलों और तीर्थों का पुनरुद्धार कराया था. उनके अनुसार, उस समय अयोध्या के 196 पवित्र स्थलों की पहचान की गई थी.

संतों ने कहा कि जिस तरह प्राचीन काल में अयोध्या का पुनरुद्धार हुआ था, उसी तरह वर्ष 2017 के बाद आधुनिक अयोध्या के विकास और पुनरुद्धार को नई गति मिली है,

उन्होंने नैमिषारण्य और मखभूमि (बस्ती के मखौड़ा धाम) की धार्मिक मान्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन पवित्र स्थलों का भगवान श्रीराम के प्राकट्य और रामायण परंपरा से विशेष संबंध है. संतों के मुताबिक, आज अयोध्या एक बार फिर अपने प्राचीन और आध्यात्मिक स्वरूप की ओर बढ़ रही है.

अयोध्यावासियों के जीवन स्तर में आया बदलाव

अयोध्या में रोजगार, व्यापार और पर्यटन से जुड़े सवालों पर संतों ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण और दीपोत्सव जैसे आयोजनों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है,

जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं. वे केवल यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं को देखने नहीं आते, बल्कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के दर्शन और इस पवित्र भूमि के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने आते हैं.

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संतों के अनुसार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, परिवहन और अन्य रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है, इससे अयोध्या के लोगों के जीवन और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव आया है.

उन्होंने कहा कि अयोध्या का विकास केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक महत्व भी पूरी दुनिया में बढ़ रहा है.

संत समाज ने अवध भूमि को बताया रामराज्य का प्रतीक

कार्यक्रम के दौरान संतों ने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाइयों का स्मरण करते हुए अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला, जगद्गुरु कृपालु राम भूषण देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि अवध की माताओं और संतों के आशीर्वाद से ही श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य संभव हो सका है.

उन्होंने कहा कि अवध की माताओं और संत समाज के सामूहिक संकल्प का ही परिणाम है कि आज अयोध्या रामराज्य की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

संतों ने कहा कि जो लोग मोह-माया से ऊपर उठकर राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पित रहते हैं, वे समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं. आज अयोध्या का बदलता स्वरूप देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी संस्कृति, धर्म और राष्ट्र के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा बन रहा है.

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राम मंदिर में चोरी का दावा पूरी तरह खारिज

संतों ने राम मंदिर के दानपात्र से चोरी की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मंदिर परिसर या पुजारियों द्वारा कोई गड़बड़ी नहीं की गई है. महंत राजू दास और अन्य धर्माचार्यों ने स्पष्ट किया कि मुख्य मंदिर से लगभग 700 मीटर दूर बने गणना कक्ष में चढ़ावा गिनने के लिए बैंक द्वारा तैनात कर्मचारियों ने निर्धारित प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया.

संतों ने कहा कि गलती बैंक कर्मियों और गणना कक्ष में मौजूद कर्मचारियों की थी, जिन पर वैधानिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. विपक्षी दलों द्वारा इस घटना का इस्तेमाल पूरे संत समाज, ब्राह्मणों और अयोध्या को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है.

महंत राजू दास और अन्य संतों ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर के अंदर कोई चोरी नहीं हुई है और न ही किसी पुजारी, संत या ट्रस्ट के सदस्य की इसमें कोई संलिप्तता है. यह बताया गया कि मंदिर परिसर से दूर बैंक और गणना कक्ष की प्रक्रिया के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा गड़बड़ी की गई थी, जिस पर प्रशासन और एसआईटी अपनी कार्रवाई कर रही है. संतों ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म, ब्राह्मणों और संतों को बदनाम करने के लिए एक राजनीतिक षडयंत्र रचा जा रहा है. 

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अयोध्या चुनाव और राजनीतिक बयानबाजी

अयोध्या लोकसभा सीट पर चुनाव परिणाम और स्थानीय नाराजगी को लेकर भी खुलकर बात रखी गई. महंत राजू दास और अन्य संतो ने कहा कि चुनाव में हार-जीत स्थानीय उम्मीदवार या कुछ राजनीतिक बयानों के कारण हुई थी, न कि भगवान राम या राम मंदिर के प्रति अयोध्या की जनता की आस्था में कोई कमी के कारण.

उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पहले राम के अस्तित्व को नकारते थे और अदालत में हलफनामा देते थे, वे आज राजनीतिक लाभ के लिए राम और मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं.


कृष्ण जन्मभूमि के निर्माण के लिए आगे आएं 

विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए संतों ने कहा कि जो लोग भाजपा और संघ का विरोध करते-करते राम विरोधी बन गए हैं, वे कभी रामलला के दर्शन करने नहीं आते. संतों ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि विरोधियों को सनातन और मंदिरों की वाकई चिंता है, तो उन्हें आगे आकर मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का समर्थन करना चाहिए.

संतों ने कहा कि कृष्ण जन्मभूमि को लेकर विपक्ष को चुनौती संतों ने विपक्षी दलों और नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें सनातन धर्म और मंदिरों की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें आगे आकर मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए समर्थन देना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह सभी को मिलकर कृष्ण जन्मभूमि के लिए आगे आना चाहिए, लेकिन ऐसे मौकों पर विपक्षी नेताओं की जुबान बंद हो जाती है.

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