राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आठ आरोपियों के 50 से ज्यादा रिश्तेदार भी रडार पर, 10 जिलों में खंगाली जा रही प्रॉपर्टी

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं है. अयोध्या पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर निकाली गई रकम आखिर गई कहां. इसी कड़ी में 8 गिरफ्तार आरोपियों के साथ उनके करीब 50 रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा 10 जिलों से मांगा गया है. पुलिस को शक है कि रकम जमीन, मकान या दूसरी संपत्तियों में इन्वेस्ट की गई हो सकती है.

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आरोपियों के रिश्तेदारों की संपत्ति का मांगा ब्योरा. (Photo: Representational) आरोपियों के रिश्तेदारों की संपत्ति का मांगा ब्योरा. (Photo: Representational)

समर्थ श्रीवास्तव

  • अयोध्या,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. शुरुआती फोकस जहां कथित गबन और गिरफ्तारियों पर था, वहीं अब पुलिस की नजर पैसों के पूरे ट्रेल पर है. अयोध्या पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अगर चढ़ावे से कथित तौर पर रकम निकाली गई, तो आखिर वह पैसा गया कहां?

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में पत्र भेजे हैं. इन जिलों के प्रशासन और राजस्व विभाग से 8 गिरफ्तार आरोपियों और उनके करीब 50 रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है.

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पुलिस ने जिन जिलों से जानकारी मांगी है, उनमें लखनऊ, बस्ती, प्रतापगढ़, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, सीतापुर, हरदोई, अंबेडकरनगर और प्रयागराज शामिल हैं. इन जिलों के अधिकारियों से पिछले दो वर्षों में खरीदी गई कृषि भूमि, मकान, प्लॉट, व्यावसायिक संपत्तियों और दूसरी चल-अचल संपत्तियों का विवरण जुटाने को कहा गया है.

जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर किसी ने अवैध तरीके से पैसा कमाया हो, तो जरूरी नहीं कि वह सारी संपत्ति अपने ही नाम पर खरीदे. कई मामलों में निवेश रिश्तेदारों या करीबी लोगों के नाम पर भी किया जाता है. यही वजह है कि पुलिस सिर्फ आरोपियों की संपत्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहती. जांच में उनके परिवार के करीब 50 सदस्यों को भी शामिल किया गया है.

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पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं हाल के वर्षों में ऐसी संपत्तियां तो नहीं खरीदी गईं, जिनका हिसाब आरोपियों की घोषित आय से मेल नहीं खाता.

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कहीं संपत्तियां बेनामी तरीके से तो नहीं खरीदी गईं. पुलिस उन सभी खरीद-फरोख्त की जांच कर रही है, जो पिछले दो साल में हुई हैं. अगर किसी संपत्ति की कीमत आरोपियों की आय से कहीं ज्यादा पाई जाती है या भुगतान का सोर्स संदिग्ध मिलता है, तो उसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा.

अयोध्या पुलिस ने सिर्फ जिला प्रशासन को ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग, नगर निगमों और उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद से भी रिपोर्ट मांगी है. राजस्व अधिकारी जमीनों के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संपत्तियां कब खरीदी गईं, किसके नाम पर दर्ज हैं और उनका भुगतान किस माध्यम से किया गया.

सीओ आशुतोष तिवारी कर रहे निगरानी

पूरे वित्तीय जांच अभियान की निगरानी सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी कर रहे हैं. पुलिस का मानना है कि इस मामले में सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पैसों के पूरे नेटवर्क को समझना भी जरूरी है. इसी वजह से जांच का फोकस अब बैंक खातों, संपत्तियों, रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन पर है.

पुलिस जिन आठ गिरफ्तार आरोपियों और उनके परिवारों की संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटा रही है, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रामशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं. इन सभी के साथ उनके रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी जांच की जा रही है.

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जब सभी 10 जिलों से रिपोर्ट अयोध्या पुलिस को मिल जाएगी, तब बैंक रिकॉर्ड, आय के स्रोत और संपत्तियों का मिलान किया जाएगा. अगर जांच में यह सामने आता है कि कथित तौर पर चढ़ावे की रकम से संपत्ति खरीदी गई है या किसी रिश्तेदार के नाम पर निवेश किया गया है, तो पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है.

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