'वक्फ के नाम पर कौम को गुमराह कर रहे मुस्लिम नेता, इन्हीं के कब्जे में प्रॉपर्टी', Waqf Amendment Act पर बोले BJP नेता मोहसिन रजा

यूपी बीजेपी के नेता मोहसिन रजा ने कहा कि मौलवीनुमा मुस्लिम धर्मगुरु कहे जाने वाले कुछ नेता पूरी कौम को गुमराह कर रहे हैं, क्योंकि यही लोग वक्फ की प्रॉपर्टी को अपने कब्जों में लेकर बैठे हैं. वक्फ अल्लाह के नाम पर नहीं बल्कि बंदों के नाम पर दान की हुई चीज है. 

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यूपी बीजेपी के नेता मोहसिन रजा यूपी बीजेपी के नेता मोहसिन रजा

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ ,
  • 23 मई 2025,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST

यूपी बीजेपी के नेता और पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने वक्फ संशोधन कानून के पक्ष में दलील दी है. उन्होंने कहा है कि वक्फ का जिक्र कुरान में नहीं है. अल्लाह ने इसको लेकर कोई हुक्म नहीं दिया और न ही इस बारे में कोई संदेश दिया. वक्फ इस्लाम की एसेंशियल प्रैक्टिस नहीं है. 

मोहसिन रजा ने आगे कहा कि मौलवीनुमा मुस्लिम धर्मगुरु कहे जाने वाले कुछ नेता पूरी कौम को गुमराह कर रहे हैं, क्योंकि यही लोग वक्फ की प्रॉपर्टी को अपने कब्जों में लेकर बैठे हैं. वक्फ अल्लाह के नाम पर नहीं बल्कि बंदों के नाम पर दान दी हुई चीज है. 

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वहीं, वक्फ को अल्लाह की दी हुई चीज बताने पर मोहसिन रजा ने कहा कि पता नहीं लोग कैसे अपनी तरफ से इतनी बड़ी बात कह रहे हैं, जबकि ये सच नहीं है. हद तो तब हो गई जब इसको लेकर आप सुप्रीम कोर्ट तक भी चले जा रहे हैं और वहां दलीलें दे रहे हैं. असल में हकीकत ये है कि ये लोग वक्फ को अल्लाह की देन बताकर उसकी प्रॉपर्टी को हड़पना चाहते हैं. ये लोग वक्फ प्रॉपर्टी से किसी गरीब का वेलफेयर नहीं होना देना चाहते हैं. 

इससे पहले मोहसिन रजा ने विपक्षी दलों और मुस्लिम धर्मगुरुओं पर निशाना साधते हुए कहा था कि कई ऐसे मुस्लिम नेता है, जिनके पास वक्फ की अकूत संपत्ति है, अब इनसे उसका जवाब मांगा जाएगा, इसलिए ये परेशान हैं. मुस्लिमों के नाम पर राजनीति करने वाले एक मुसलमान को लाकर ये कहलवा दें कि वक्फ की संपत्ति से मुसलमानों को कोई लाभ पहुंचा है. कोई लाभ नहीं मिला है, उन्हें वंचित रखा गया है. 

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गौरतलब है कि वक्फ कानून में किए गए संशोधन के खिलाफ मुस्लिम संगठनों में नाराजगी है. वहीं, इसको लेकर केंद्र सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं, बल्कि सिर्फ एक दान की प्रक्रिया है. वक्फ बोर्ड सिर्फ धर्मनिरपेक्ष कामकाज करते हैं, जबकि मंदिर पूरी तरह धार्मिक संस्था होते हैं और उनका प्रबंधन मुस्लिम व्यक्ति भी संभाल सकता है.

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