मौत की सजा के बाद जेल में मुस्कान को मिली नई साड़ी, साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जेल में नए कपड़े मिले हैं. मुस्कान को एक साड़ी और सूट, जबकि साहिल को सफेद रंग के दो जोड़ी कुर्ता-पायजामे मिले हैं. मुस्कान बैरक नंबर 12-बी में रहेगी और उसे सिलाई का काम दिया गया है. साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा और खेती-बाड़ी का काम करेगा.

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मुस्कान-साहिल को सजा के साथ जुर्माना भी देना होगा (Photo- ITG) मुस्कान-साहिल को सजा के साथ जुर्माना भी देना होगा (Photo- ITG)

उस्मान चौधरी

  • मेरठ ,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:42 AM IST

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की जिंदगी अब जेल की नई दिनचर्या के बीच गुजरेगी. दोनों को जेल में पहनने के लिए नए कपड़े दिए गए हैं. मुस्कान को एक साड़ी और एक सूट मिला है, जबकि साहिल को सफेद रंग के दो जोड़ी कुर्ता-पायजामे दिए गए हैं. जेल में दोनों को काम भी किए गए हैं. मुस्कान सिलाई का काम करेगी, जबकि साहिल को खेती-बाड़ी से जुड़ा काम सौंपा गया है. उधर, मृत्युदंड के फैसले के बाद दोनों की बेचैनी और मुस्कान की बेटी की परवरिश को लेकर चिंता भी चर्चा में है.

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अदालत से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद जेल में मुस्कान और साहिल की दिनचर्या में बदलाव आया है. जेल प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, मुस्कान को पहनने के लिए एक साड़ी और एक सूट दिया गया है. साड़ी सफेद रंग की है, जबकि सूट क्रीम रंग का बताया गया है. वहीं, साहिल को सफेद रंग के दो जोड़ी कुर्ता-पायजामे दिए गए हैं. अब दोनों को जेल के निर्धारित कपड़ों में ही रहना होगा. जेल के भीतर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी तय नियमों और बंदी व्यवस्था के अनुसार चलेगी. अदालत में सुनाए गए फैसले के बाद दोनों के लिए जेल की दिनचर्या पहले की तरह सामान्य नहीं रह गई है. अब उन्हें जेल के भीतर निर्धारित काम भी करना होगा.

बैरक नंबर 12-बी में रहेगी मुस्कान, साहिल का बैरक नंबर 15

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जेल में मुस्कान और साहिल को अलग-अलग बैरक में रखा गया है. मुस्कान का बैरक नंबर 12-बी है, जबकि साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा. दोनों की पहचान अब जेल के रिकॉर्ड में उनके बंदी नंबर से भी दर्ज होगी. जेल रिकॉर्ड के अनुसार, साहिल को बंदी नंबर 395/2026 और मुस्कान को बंदी नंबर 396/2026 आवंटित किया गया है. जेल की प्रशासनिक प्रक्रिया में बंदियों की पहचान, उनकी गतिविधियों और संबंधित रिकॉर्ड के लिए इन नंबरों का इस्तेमाल किया जाता है. मुस्कान और साहिल को अलग-अलग बैरक में रखने के साथ उनकी दिनचर्या और काम भी निर्धारित किए गए हैं. जेल में बंदियों को काम सौंपना वहां की व्यवस्था का हिस्सा होता है. इसी के तहत मुस्कान को सिलाई और साहिल को खेती-बाड़ी से जुड़ा काम आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है.

फैसले के बाद बेचैनी, रात में नहीं आई नींद

सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के बाद मुस्कान और साहिल की मानसिक स्थिति को लेकर भी जानकारी सामने आई है. जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों बेचैन बताए जा रहे हैं. सजा सुनाए जाने से पहले की रात भी वे ठीक से सो नहीं सके. बताया गया कि दोनों ने रात का खाना नहीं खाया. सुबह नाश्ता दिया गया, लेकिन उन्होंने उसे भी नहीं खाया. इस मामले में दोनों को अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था. अदालत में सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कम उम्र, जेल में अच्छे व्यवहार और सुधार की संभावना का हवाला देते हुए उम्रकैद की मांग की थी. वहीं, सरकारी पक्ष ने अपराध की गंभीरता और सुनियोजित तरीके से की गई हत्या का हवाला देकर अधिकतम सजा देने की मांग की थी. अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया. इसके बाद जेल में उनकी आगे की दिनचर्या, बंदी नंबर और काम से जुड़ी व्यवस्थाएं चर्चा में हैं. मुस्कान अपनी बेटी की परवरिश को लेकर चिंतित बताई जा रही है. मां के जेल में होने और पिता सौरभ की हत्या के मामले में अदालत के फैसले के बाद बच्ची की देखभाल का सवाल परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो गया है.

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सजा सुनाए जाने से ठीक पहले सुबह के वक्त मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में लिखित रूप में दिया कि यदि उनकी बेटी को फांसी भी दी जाती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. साथ ही परिवार ने सौरभ को एक बहुत ही अच्छा लड़का बताया. गौरतलब है कि मुस्कान के मां-बाप उससे मिलने जेल में भी नहीं गए.  

जज ने सुनाया फैसला, कोर्ट में लगे नारे 

अरविंद कुमार मिश्रा (जिला और सत्र न्यायाधीश) ने नीला ड्रम हत्याकांड की सुनवाई के दौरान महाभारत का जिक्र किया. वहीं, सजा के ऐलान के बाद कोर्ट रूम में भारत माता की जय के नारे लगे. पीड़ित पक्ष ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है.   सजा के ऐलान से पहले सौरभ की मां ने 'आजतक' से कहा था कि बेटे की हत्या के बाद मेरे परिवार ने न्याय पाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया. इसलिए प्रशासन और उन सभी लोगों का आभार, जिन्होंने इस मामले में हमारा पल-पल साथ दिया. जिन गवाहों ने अदालत में हमारे पक्ष में बयान दिए उनका भी धन्यवाद. सौरभ की मां शुरू से इस केस में फांसी की मांग कर रही थीं. 

वकील ने कही ये बात 

मामले में वकील कृष्ण कुमार दुबे ने कहा कि दोनों दोषियों को इस अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई है. मुस्कान-साहिल को धारा 302 के तहत 50 हजार रुपये और धारा 238A के तहत 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है.  उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने कई तर्क दिए थे- जैसे कि हत्या को किसी ने नहीं देखा और मुस्कान की बेटियां हैं- लेकिन इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया गया. क्योंकि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत इतने मजबूत, अहम और सटीक थे कि उनसे उनका अपराध पूरी तरह साबित हो गया.

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