मेरठ: मुस्कान-साहिल को फांसी के बाद भी वीरान पड़ा है मेरठ का यह मकान, अंदर आज भी टंगे हैं कातिलों के कपड़े; बुजुर्ग मालिक बेचने को बेहाल

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड से जुड़ा मकान 18 महीने बाद भी पुलिस की सील में बंद है. 70 वर्षीय मकान मालिक ओमपाल सिंह इसे बेचकर गांव जाना चाहते हैं, लेकिन ताला न खुलने और खरीदार न मिलने से परेशान हैं. बेटे की मौत के बाद अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपती बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं.

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चर्चा में मेरठ का नीला ड्रम कांड वाला मकान (Photo- ITG) चर्चा में मेरठ का नीला ड्रम कांड वाला मकान (Photo- ITG)

उस्मान चौधरी

  • मेरठ ,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम सौरभ हत्याकांड से जुड़ा मकान घटना के 18 महीने बाद भी पुलिस की सील के दायरे में बंद है. लगभग 70 साल के बुजुर्ग मकान मालिक ओमपाल सिंह अपने इस मकान को बेचना चाहते हैं, लेकिन ताला न खुलने और खरीदार न मिलने के कारण वह लगातार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं. 

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आपको बता दें कि मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में लगभग दो सौ गज के मकान में रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग ओमपाल सिंह ने अपने घर का निचला हिस्सा सौरभ और मुस्कान को किराए पर दिया था. मार्च 2025 को यहीं पर सौरभ की हत्या की गई थी. हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस ने कमरे और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया था, जिसकी चाबी आज भी पुलिस के पास है. कोर्ट द्वारा दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी यह मकान बंद है. ओमपाल सिंह इसे बेचकर अपने गांव जाना चाहते हैं, लेकिन पुलिस की सील और खरीदार न मिलने के कारण वह असमर्थ हैं.

दर्दभरी दास्तान और बुजुर्ग की लाचारी

मकान मालिक ओमपाल सिंह और उनकी 65 वर्षीय पत्नी इस मकान में अकेले रहते हैं. उनके इकलौते बेटे की मौत कम उम्र में हो चुकी है, बहू ने दूसरी शादी कर ली और पोते का भी निधन हो गया. कभी इसी मकान के किराए से उनका गुजारा चलता था, लेकिन अब यही मकान उनके लिए बड़ी परेशानी बन चुका है. ओमपाल सिंह शुगर, बीपी और हार्ट के मरीज हैं और आंखों की कमजोरी से जूझ रहे हैं.

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किराए पर दिया गया था मकान

ओमपाल सिंह ने हत्याकांड से लगभग तीन साल पहले यह मकान साढ़े तीन हजार रुपये महीने पर दिया था, जो बाद में बढ़कर छह हजार रुपये हो गया था. उनके अनुसार सौरभ बहुत सीधा-साधा लड़का लगता था और मुस्कान भी कभी ऐसी नहीं लगी कि वह ऐसा जघन्य हत्याकांड कर सकती है. साहिल के आने-जाने पर पूछने पर मुस्कान ने उसे अपना भाई बताया था.

न्याय की गुहार और अनसुलझी समस्या

घटना को 18 महीने बीत चुके हैं और घर के बाहर आज भी वही कपड़े और वाशिंग मशीन रखी है. ओमपाल ने पुलिस अधिकारियों से बात करने के बाद वकील भी किया, लेकिन मामला कोर्ट में होने के कारण अभी तक कोई हल नहीं निकला है. वह अपने मकान को बेचकर गांव लौटना चाहते हैं ताकि बाकी का जीवन सुकून से काट सकें.

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