बारिश, बेबसी और बुझे चूल्हे... यूपी के महोबा में सड़क पर चल रही नाव, तबाह हुई जिंदगी की कहानी

यूपी में महोबा के बीजा नगर में सड़क पर नाव चल रही है, घरों में पानी घुसा है और चूल्हों की आग बुझ चुकी है. जिला मुख्यालय 2 किलोमीटर दूर है, लेकिन रास्ता ऐसा कि पैदल निकलें तो कमर तक पानी है. 38 घंटे की बारिश ने सिर्फ गांव को नहीं डुबोया, लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी रोक दी. ये कहानी है उस गांव की, जहां बारिश थम गई... लेकिन बेबसी अब भी है.

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महोबा में बारिश के बीच बिगड़े हालात, सड़क पर चल रही नाव. (Photo: Screengrab) महोबा में बारिश के बीच बिगड़े हालात, सड़क पर चल रही नाव. (Photo: Screengrab)

नाह‍िद अंसारी

  • महोबा,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:17 PM IST

यूपी के महोबा में इन दिनों बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. जाने के लिए सड़क नहीं, नाव चाहिए. घर से बाहर निकलें तो कमर तक पानी. घर के अंदर जाएं तो अनाज, कपड़े और सामान पानी में डूबे हुए. चूल्हा जलाना हो तो लकड़ी गीली. कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए नाव या कमर तक पानी में उतरने की मजबूरी.

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महोबा के बीजा नगर गांव में इन दिनों कुछ ऐसा ही हो रहा है. 38 घंटे की मूसलाधार बारिश ने गांव को ऐसा घेरा कि लोगों की जिंदगी पानी के बीच फंस गई. जिला मुख्यालय यहां से बस 2 किलोमीटर दूर है. इतनी दूरी कि आम दिनों में शायद पैदल भी पहुंच जाएं. लेकिन इन दिनों बीजा नगर के लोगों से अगर पूछा जाए कि मुख्यालय कितनी दूर है, तो शायद जवाब किलोमीटर में नहीं मिलेगा.

क्योंकि रास्ते में पानी है. इतना पानी कि सड़क दिखाई नहीं दे रही. और जहां सड़क नहीं दिखती, वहां लोग नाव चला रहे हैं. जिस रास्ते पर रोज लोग पैदल चलते थे, बाइक चलती थी, बच्चे स्कूल जाते थे, अब उसी सड़क पर नाव चल रही है. 38 घंटे की मूसलाधार बारिश ने बीजा नगर को ऐसा घेरा कि गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क ही टूट गया.

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बारिश अब थम चुकी है, लेकिन मुसीबत अभी नहीं थमी. गांव के करीब 10 घरों में पानी घुस चुका है. घर का अनाज, कपड़े और गृहस्थी का सामान पानी में खराब हो गया. मवेशियों के लिए रखा भूसा तक पानी की भेंट चढ़ गया. यानी बारिश खत्म होने के बाद भी ग्रामीणों के सामने घर को फिर से खड़ा करने की चुनौती है. घर में पानी और बाहर पानी. ऐसे में खाना बने तो कैसे बने?

लकड़ियां भीग चुकी हैं. चूल्हे जल नहीं रहे. जिन परिवारों के पास गैस सिलेंडर था, उनमें से कई के सिलेंडर खत्म हो चुके हैं. लेकिन नया सिलेंडर लेने बाजार जाएं तो रास्ता पानी में डूबा है. नतीजा ये कि कुछ परिवार दिन में एक वक्त खाना खाकर गुजारा करने को मजबूर हैं.

कोई बीमार पड़ा तो पानी पार करना पड़ेगा

बारिश और जलभराव में सबसे ज्यादा मुश्किल उन लोगों की है, जिन्हें अस्पताल जाना है. मालती और खेमराज जैसे ग्रामीण अपने बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने के लिए कभी नाव का सहारा ले रहे हैं, तो कभी कमर तक पानी में उतरकर रास्ता पार कर रहे हैं. कोई बीमार हो तो पानी में उतरकर जाना पड़ेगा. रास्ते में टूटे हुए नाले भी पड़े हैं. पानी के नीचे क्या है, दिखाई नहीं देता. ऐसे में हर कदम के साथ हादसे का खतरा बना हुआ है.

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गांव के बच्चों की पढ़ाई भी इस पानी में फंस गई है. बीजा नगर का जूनियर हाईस्कूल करीब एक महीने से बंद बताया जा रहा है. वजह वही जलभराव. स्कूल जाने वाला रास्ता पानी में डूबा है, तो बच्चे स्कूल पहुंचें कैसे? मजदूरों की हालत भी अलग नहीं है. पानी के कारण मजदूरी पर जाना बंद है. गांव में नाव चलाने वालों को छोड़ दें तो बाकी लोगों की आवाजाही लगभग थम गई है. यानी बारिश ने सिर्फ रास्ते नहीं डुबोए, लोगों की रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई तक रोक दी.

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ग्रामीणों का कहना है कि पिछले महीने भी बारिश के बाद गांव में ऐसे ही हालात बने थे. यानी बीजा नगर के लिए जलभराव कोई एक दिन की परेशानी नहीं है. इस बार 38 घंटे की लगातार बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पहले भी जिलाधिकारी से मदद की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन उनके मुताबिक अब तक न तो पर्याप्त राहत सामग्री पहुंची और न ही पानी की निकासी का कोई स्थायी इंतजाम हुआ.

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर है. बीजा नगर जिला मुख्यालय से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर है. लेकिन फिलहाल ये 2 किलोमीटर ऐसा रास्ता बन गया है, जिसे पार करने के लिए नाव चाहिए. बीजा नगर के लोग अब बस यही चाहते हैं कि पानी निकले, रास्ते खुलें और प्रशासन गांव तक पहुंचे. क्योंकि उनके लिए ये सिर्फ बारिश नहीं है. ये रोजमर्रा की जिंदगी के रुक जाने की कहानी है. और फिलहाल उस जिंदगी का रास्ता... पानी के बीच से होकर जाता है.

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