'इधर मत आना, DIG से बात हो गई है': फरार ठगी के मास्टरमाइंड की 'सीक्रेट Zoom कॉल' ने हिलाया पुलिस महकमा

कैनविज मामले के 800 करोड़ की ठगी के 50 हजार के इनामी आरोपी कन्हैया गुलाटी की एक ज़ूम मीटिंग वायरल हुई है. वीडियो में वह एजेंटों से बात कर रहा है, जबकि एक व्यक्ति डीआईजी से बातचीत का हवाला देकर उसे बरेली न आने की सलाह दे रहा है.

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ठगी का आरोपी कन्हैया गुलाटी (File Photo) ठगी का आरोपी कन्हैया गुलाटी (File Photo)

अंकुर चतुर्वेदी

  • बदायूं ,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:36 AM IST

Uttar Pradesh News: बदायूं से जुड़े कैनविज मामले में 800 करोड़ रुपये की कथित ठगी के आरोपी कन्हैया गुलाटी की तलाश जारी है.  उस पर 50 हजार रुपये का इनाम है, लुकआउट नोटिस जारी है और बरेली में उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे हैं. इसी बीच एक कथित Zoom मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सामने आई है, जिसमें कन्हैया अपने एजेंटों से बातचीत करता दिखाई दे रहा है. बातचीत में एक व्यक्ति DIG अजय सहानी से बात होने का दावा करते हुए कन्हैया से बरेली न आने को कहता सुनाई देता है. फिलहाल, DIG अजय साहनी ने फोन पर बताया है कि वीडियो में दिख रहे आदमी को मैं नहीं जानता हूं. मैंने ही 50000 का इनाम कन्हैया गुलाटी पर रखा है. उसके ऑनलाइन मीटिंग करने और पुलिस की पकड़ से दूर रहने पर अब EOW ही बता पाएगी, क्योंकि जांच EOW को ट्रांसफर हो चुकी है. 

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इस वीडियो ने बदायूं से लेकर बरेली तक पुलिस की कार्रवाई और कन्हैया की कथित गतिविधियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और उसमें कही गई बातों को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. 

बरेली मत आना, मेरी DIG से 15 मिनट बात हुई है’

वीडियो में ‘विनय’ नाम का व्यक्ति कन्हैया से यह भी कहता सुनाई देता है कि “आप बरेली मत आना. ” इसके पीछे वह दावा करता है कि उसकी DIG बरेली अजय सहानी से करीब 15 मिनट बातचीत हुई है. बातचीत में बरेली के SP City मानुष पारिख का भी जिक्र आता है।.  विनय के अनुसार, SP City भी कन्हैया के पीछे पड़े हैं. 

बातचीत के दौरान ठग कन्हैया गुलाटी की आवाज में यह कहते हुए सुनाई देती है कि उसे फोन न किया जाए, सिर्फ मैसेज कर दिया जाए और वह खुद जरूरत के मुताबिक फोन कर लिया करेगा. इसी दौरान ‘विनय’ नाम का एक व्यक्ति कन्हैया से कहता सुनाई देता है कि करीब 40 Lions के फोन ही उठाए जाएं और उन्हीं से बात की जाए, बाकी लोगों के फोन न उठाए जाएं. वायरल स्क्रीन रिकॉर्डिंग में करीब 49 लोग Zoom मीटिंग में दिखाई देते हैं. दावा है कि ये सभी कैनविज कंपनी से जुड़े ‘Lions’ स्तर के लोग हैं. 

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मीटिंग में कई लोग कन्हैया गुलाटी से अपने payout और funds को लेकर सवाल करते सुनाई देते हैं. उनसे रकम जारी करने और कंपनी के पास मौजूद फंड दिखाने की मांग की जा रही है. यह बातचीत उस समय की है जब कन्हैया गुलाटी पुलिस की नजर में फरार आरोपी है. 

50 हजार का इनाम, लुकआउट नोटिस फिर भी ऑनलाइन संपर्क

कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बदायूं बरेली में मिलाकर में 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज है. पुलिस की ओर से उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. कन्हैया गुलाटी के विदेश भागने की संभावना के चलते पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किए हुए है. 

बदायूं में भी दर्ज हैं मुकदमे

कैनविज प्रकरण का असर सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है.  कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बदायूं में भी मुकदमे दर्ज हैं. बदायूं में भी कंपनी से जुड़े निवेशकों ने रकम वापस न मिलने और कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायतें की थीं. यही वजह है कि बरेली में फरार चल रहे कन्हैया की गतिविधियां बदायूं के निवेशकों और यहां दर्ज मामलों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं. 

पुलिस के अनुसार, कन्हैया गुलाटी ने निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर रकम लगवाई थी. निवेशकों को हर महीने पांच प्रतिशत तक ब्याज और 22 महीने बाद पूरी रकम लौटाने का भरोसा दिया गया था. बाद में भुगतान बंद होने के बाद निवेशकों ने मुकदमे दर्ज कराए. 

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जिस व्यक्ति पर 50 हजार रुपये का इनाम है, जिसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी है और जिस पर सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले दर्ज हैं, अगर वह अपने नेटवर्क के लोगों के साथ ऑनलाइन मीटिंग कर रहा है तो जांच एजेंसियां उसके डिजिटल संपर्क और नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं?

पुलिस के सामने अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती

कैनविज मामले में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता अपनी रकम वापस पाने की है.  अब तक सामने आए मामलों और मुकदमों के बीच कन्हैया की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. वहीं इस Zoom रिकॉर्डिंग ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है. अगर एक इनामी और लुकआउट नोटिस वाले आरोपी तक उसके एजेंट ऑनलाइन पहुंच रहे हैं, उससे payout और funds पर सवाल कर रहे हैं और वह खुद उनसे बातचीत कर रहा है, तो क्या जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की डिजिटल कड़ियों को जोड़कर उस तक पहुंच पाएंगी?

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