2 साल से बंद 100 बेड का अस्पताल, गेट पर डॉक्टर ने शुरू की फ्री OPD, पुलिस पहुंची तो कांग्रेस ने किया विरोध

कानपुर में दो साल से तैयार 100 बेड का सरकारी अस्पताल अब तक शुरू नहीं हो पाया है. डॉक्टरों और कर्मचारियों की तैनाती नहीं होने से लाखों लोगों को परेशानी हो रही है. इसके विरोध में MBBS डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने अस्पताल के गेट पर मुफ्त ओपीडी शुरू कर दी. पुलिस उन्हें हटाने पहुंची तो कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया.

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मरीजों का मुफ्त इलाज कर रहे MBBS डॉक्टर.(Photo: Screengrab) मरीजों का मुफ्त इलाज कर रहे MBBS डॉक्टर.(Photo: Screengrab)

रंजय सिंह

  • कानपुर,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:09 PM IST

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को लेकर एक डॉक्टर ने अनोखा विरोध शुरू किया है. बीजेपी मुख्यालय के पास बनी 100 बेड की आलीशान अस्पताल बिल्डिंग पिछले दो साल से बंद पड़ी है. अस्पताल में ताला लगा है और डॉक्टरों व कर्मचारियों की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में कानपुर मेडिकल कॉलेज से MBBS डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने अस्पताल के गेट के बाहर ही अपनी निशुल्क ओपीडी शुरू कर दी है.

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डॉक्टर शशिकांत अपने कंपाउंडर और मेडिकल ऑपरेटर के साथ सड़क पर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं. उन्होंने यहां दवाइयां भी रखी हैं और मरीजों को मुफ्त में दवा दे रहे हैं. इसके लिए वह किसी से कोई शुल्क नहीं लेते. उनका कहना है कि जब तक अस्पताल शुरू नहीं होता, तब तक वह इसी तरह मरीजों की सेवा करते रहेंगे.

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डॉक्टर ने अस्पताल के गेट पर एक बैनर भी लगाया है. वह 'नर सेवा नारायण सेवा' सामाजिक संस्था से जुड़े हुए हैं. उनका यह कदम प्रशासन और सरकार का ध्यान बंद अस्पताल की ओर आकर्षित करने की कोशिश है. गुरुवार से शुरू हुई उनकी ओपीडी शुक्रवार को भी जारी रही, लेकिन इसी दौरान पुलिस उन्हें वहां से हटाने पहुंच गई.

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दो साल से तैयार है अस्पताल, डॉक्टर और स्टाफ की नहीं हुई तैनाती

दरअसल, कानपुर के दक्षिणी इलाके में बीजेपी मुख्यालय के पास स्थित जमीन को सरकार ने खाली कराकर वहां 100 बेड का अस्पताल बनाने की मंजूरी दी थी. अस्पताल की आलीशान बिल्डिंग करीब दो साल पहले बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन यहां अब तक डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की पोस्टिंग नहीं हो सकी. इस वजह से पूरी इमारत तैयार होने के बावजूद अस्पताल में इलाज शुरू नहीं हो पाया है.

इस अस्पताल के शुरू होने से दक्षिणी कानपुर के लाखों लोगों को फायदा मिल सकता था. फिलहाल क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों और डॉक्टरों ने अस्पताल चालू कराने के लिए कई बार प्रशासन को पत्र लिखे हैं. बीजेपी मुख्यालय के पास होने के कारण यहां आने वाले नेताओं से भी लोगों ने अस्पताल शुरू कराने की अपील की है.

विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल शुरू नहीं हो पाया. इसी समस्या को लेकर क्षेत्र के डॉक्टर शशिकांत मिश्रा ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अस्पताल के बंद गेट पर ही मरीजों का इलाज शुरू करने का फैसला किया.

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MBBS डॉक्टर बोले- यह विरोध नहीं, प्रशासन का ध्यान खींचने का तरीका

डॉक्टर शशिकांत मिश्रा कानपुर मेडिकल कॉलेज से MBBS हैं. वह प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. बाद में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया और अब उनकी अपनी क्लिनिक भी चलती है. उन्होंने बताया कि अस्पताल शुरू कराने के लिए वह कई अधिकारियों से मिल चुके हैं और कई बार लिखित शिकायत भी दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

डॉक्टर के मुताबिक, अस्पताल बंद होने से लाखों लोगों को परेशानी हो रही है. इसलिए उन्होंने इसके गेट पर ही सड़क किनारे मुफ्त ओपीडी लगाने का फैसला किया. उनका कहना है कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि सरकार और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का एक तरीका है.

उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है और उन्हें मुफ्त दवाइयां भी दी जा रही हैं. डॉक्टर को उम्मीद है कि उनके इस कदम से उनकी आवाज प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी और अस्पताल जल्द शुरू हो सकेगा.

पुलिस डॉक्टर को हटाने पहुंची, बैनर हटाया तो कांग्रेस ने किया विरोध

डॉक्टर शशिकांत की ओपीडी शुक्रवार सुबह भी शुरू हुई तो स्थानीय पुलिस के दरोगा और सिपाही मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने डॉक्टर को वहां से हटने के लिए कहा और उनका बैनर भी गेट से हटा दिया. पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से ओपीडी संचालित नहीं करने की हिदायत दी.

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इसी दौरान सूचना मिलने पर कांग्रेस के विधानसभा प्रभारी विकास अवस्थी भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने डॉक्टर के समर्थन में पुलिस की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया. विकास अवस्थी ने सवाल उठाया कि जब दो साल से अस्पताल बनकर तैयार है और प्रशासन उसे शुरू नहीं करा पा रहा, तो सड़क पर मरीजों को मुफ्त इलाज दे रहे डॉक्टर को हटाने पुलिस क्यों पहुंच गई?

विकास अवस्थी का कहना है कि अस्पताल बनने की प्रक्रिया करीब नौ साल से चल रही थी. अब जब बिल्डिंग तैयार है तो उसे चालू कराने के बजाय डॉक्टर को मरीजों की सेवा करने से रोका जा रहा है. उन्होंने अस्पताल जल्द शुरू कराने की मांग उठाई.

सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक चलती है ओपीडी

डॉक्टर शशिकांत की ओपीडी रोजाना सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलती है. यहां इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों में बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और अन्य लोग शामिल हैं. मरीजों का कहना है कि अस्पताल बंद होने के बावजूद डॉक्टर सड़क पर बैठकर उनका इलाज कर रहे हैं. उन्हें मुफ्त दवाइयां भी मिल रही हैं और डॉक्टर की दी हुई दवाओं से फायदा हो रहा है.

पुलिस के पहुंचने के बाद डॉक्टर ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे ओपीडी हटाने को कहा था. पुलिस की ओर से उन्हें चौकी में जाकर ओपीडी चलाने का विकल्प भी दिया गया, लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस नेता मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू हो गया.

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अब डॉक्टर शशिकांत अस्पताल शुरू होने तक इसी जगह ओपीडी चलाने पर अड़े हैं. वहीं, उनके समर्थन में विपक्षी नेता भी सामने आ गए हैं. डॉक्टर की इस पहल से कानपुर प्रशासन के सामने बंद अस्पताल को शुरू कराने का सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है. फिलहाल अस्पताल में इलाज शुरू करने के लिए प्रशासन के पास कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है.

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