जेपी की विरासत पर यूपी में सियासत... JPNIC पर अखिलेश और सीएम योगी आमने-सामने क्यों?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने के योगी सरकार के फैसले से यूपी की राजनीति गर्मा गई है. सपा जहां इसे सरकारी परिसंपत्तियों को बेचने और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है तो बीजेपी भी आक्रामक हो गई है.

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अखिलेश यादव बनाम सीएम योगी आदित्यनाथ (Photo-ITG) अखिलेश यादव बनाम सीएम योगी आदित्यनाथ (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:25 AM IST

लखनऊ के गोमती नगर स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घमासान छिड़ गया है. योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने JPNIC परिसर को 30 साल की लीज पर 'जैसे है जहां है' की शर्त पर दो निजी कंपनियों (वृंदावन बॉटलर्स और रॉकवुड होटल्स) को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

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अखिलेश सरकार के कार्यकाल में तैयार हुआ JPNIC अब निजी क्षेत्र के हाथों संचालित किया जाएगा. इसके बदले प्राइवेट कंपनी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को शुरुआती सालाना लीज रेंट 6 करोड़ रुपये देगी, जिसमें हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी. 30 सालों की लीज अवधि के दौरान कंपनियां सरकार को कुल मिलाकर 800 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व देंगी और साथ ही करीब 200–250 करोड़ रुपये के बचे हुए कार्यों को पूरा करेंगी.

जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक था. 18 मंजिला यह इमारत अंतरराष्ट्रीय स्तर की है, लेकिन बनने के बाद से ही विवादों में रही है. पिछले नौ सालों से JPNIC अपने दिन बहुरने के इंतजार में खड़ा था, जैसे ही सरकार ने इसे लीज पर देने का फैसला किया, अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी मोर्चा खोल दिया.

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अखिलेश का ड्रीम प्रोजेक्ट और विवाद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2013 में दिल्ली के 'इंडिया हैबिटेट सेंटर' की तर्ज पर लखनऊ में JPNIC का निर्माण शुरू करवाया था. शुरुआत में इसका बजट करीब 265 करोड़ रुपये था, लेकिन समय के साथ प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ा और लागत बढ़कर करीब 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

JPNIC में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पूल, कन्वेंशन सेंटर, गेस्ट हाउस, हेलीपैड और म्यूजियम ब्लॉक प्रस्तावित है. सपा सरकार के कार्यकाल के अंत तक बिल्डिंग लगभग बनकर तैयार थी. सपा सरकार का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले 2017 में अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन कर दिया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न नहीं हो पाया था। 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आते ही इसमें वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाकर जांच के आदेश दे दिए गए। जांच चलती रही और इमारत बंद पड़ी रही.

9 साल से जारी सियासी संग्राम

सपा का कहना है कि 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद योगी सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से इस प्रोजेक्ट को रोक दिया. सपा का दावा है कि अगर सरकार चाहती तो इसे जल्द पूरा करा सकती थी, लेकिन अखिलेश यादव के क्रेडिट को रोकने के लिए इसे सालों तक उपेक्षित रखा गया. अखिलेश यादव ने सरकार से JPNIC को शुरू करने की अपील भी की थी.

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अखिलेश ने कहा था कि सरकार अगर चाहे तो नाम बदल ले, लेकिन इस विश्वस्तरीय इमारत को जर्जर न होने दे. उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि सरकार सपा को यह होल्डिंग दे तो वे चंदा जुटाकर इसे चलाने को तैयार हैं.

दूसरी ओर, भाजपा का आरोप रहा है कि सपा सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया और बजट को बिना वजह तीन गुना बढ़ा दिया. सरकार का कहना था कि आधी-अधूरी इमारत का उद्घाटन कर सपा ने वाहवाही लूटने की कोशिश की थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में इससे बेहतर कन्वेंशन सेंटर बनाने की बात कही थी. उन्होंने घोषणा की थी कि लखनऊ के सरोजिनी नगर में एक नया कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर बनी इस इमारत के निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार किया.

जेपी की जयंती पर हर साल बवाल

गोमती नजर में बने जेपीएनआईसी में जय प्रकाश नारायण की एक भव्य मूर्ति भी लगाई गई है. हर साल 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर JPNIC परिसर के बाहर भारी राजनीतिक ड्रामा 9 साल से देखने को मिलता है. जयंती पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करने कन्वेंशन सेंटर जाना चाहते थे. पुलिस ने उन्हें रोक दिया करती थी. 

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अखिलेश यादव जब-जब जेपीएनआईसी माल्यार्पण करने पहुंचे, तब-तब सुरक्षा कारणों का हवाला देकर प्रशासन परिसर को सील कर दिया करता था या बैरिकेडिंग लगा देती थी. ऐसे में अखिलेश यादव दीवार फांदकर जेपी एनआईसी में घुसकर माल्यार्पण करते थे. अखिलेश द्वारा टीन की चादरों के ऊपर से कूदकर अंदर जाने की तस्वीरें देश भर में चर्चा का विषय बनीं. अब योगी सरकार ने प्राइवेट कंपनी को लीज पर देने का फैसला किया है. 
 

प्राइवेट कंपनी को देने पर सियासत तेज

योगी सरकार ने लखनऊ के गोमती नगर में लंबे समय से बंद पड़े जेपीएनआईसी को लीज पर देने का प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.  JPNIC के रखरखाव और करीब 200-250 करोड़ के बाकी बचे कामों को पूरा करने के लिए PPP मॉडल को अपना है. जेपीएनआईसी को वृंदावन बाटलर्स प्राइवेट लिमिटेड एंड राकवुड होटल्स एंड रिजार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 30 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई. इससे एलडीए (LDA) को सालाना लीज रेंट 6 करोड़ रुपये हर साल मिलेगा और सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा. 

सपा प्रमुख अखिलेश ने यूपी सरकार के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि 'भाजपा सरकार है या दुकानदार? उनका आरोप है कि सरकारी संपत्तियों का निजीकरण कर अपनी नाकामियों को छुपाया जा रहा है और अब बस सरकार को ही ठेके पर देना बचा है. इसके साथ ही कहा कि ‘कमीशन’ भ्रष्ट भाजपा की गाड़ी का तेल-पानी है और ‘निजीकरण’ उसका जुगाड़ है. 

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JPNIC के पीछे की असली राजनीति क्या है?
बीजेपी और सपा के बीच जेपीएनआईसी की लड़ाई सिर्फ एक इमारत के रखरखाव की नहीं है, बल्कि विरासत और नैरेटिव की है. लोक नायक के नाम से मशहूर जय प्रकाश नारायण मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ही थे. जेपी की समाजवादी विरासत से ही निकलकर मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी का गठन किया था. अखिलेश यादव खुद को जेपी की विरासत को आगे बढ़ाने की बात करते रहे हैं. 

अखिलेश यादव JPNIC को अपने कार्यकाल के विज़न और आधुनिक विकास के प्रतीक के रूप में पेश करते आए हैं. अखिलेश यादव की इस पूरी कवायद को जेपी की विरासत से अपना दावा पीछे नहीं छोड़ने के रूप में देखा जा रह है.  वहीं, बीजेप सरकार इसे सपा शासन काल के वित्तीय कुप्रबंधन के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करती रही है. 

योगी सरकार अब इसे निजी कंपनियों को लीज पर देकरयह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अटकी हुई और बंद परियोजनाओं को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बना रहे हैं. दूसरी ओर, सपा इसे सरकारी संपत्तियों को अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को बेचने के मुद्दे के रूप में भुनाने में जुट गई है. यह एक इमारत या लीज एग्रीमेंट का नहीं है, बल्कि विरासत का है. इसीलिए शह-मात का खेल चल रहा है.

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