‘पेटवा पिरात है’ सुनकर समझ जाती हैं दर्द, कन्नड़ भाषी डॉक्टर अनीता की अवधी सुन मरीज भूल जाते हैं बीमारी

गोंडा की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा की मातृभाषा कन्नड़ है, लेकिन वह अपने मरीजों से फर्राटेदार अवधी में बात करती हैं. कर्नाटक के मंगलूर से गोंडा आईं डॉ. अनीता ने मरीजों की परेशानी समझने के लिए पहले हिंदी और फिर अवधी सीखी. अब वह अवधी में बताई गई महिलाओं की समस्याओं को आसानी से समझकर उनका इलाज करती हैं.

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मरीजों की बात समझने के लिए डॉक्टर ने सीखी अवधी. (Photo: Screengrab) मरीजों की बात समझने के लिए डॉक्टर ने सीखी अवधी. (Photo: Screengrab)

अंचल श्रीवास्तव

  • गोंडा,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

जिसकी मातृभाषा कन्नड़ हो और वह अवधी भाषा में धड़ल्ले से बातचीत करे, तो यह बात किसी को भी हैरान कर सकती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा में यह हकीकत है. यहां की मशहूर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा अपने मरीजों से उन्हीं की भाषा यानी अवधी में बात करती हैं. डॉ. अनीता मिश्रा मूल रूप से कर्नाटक के मंगलूर जिले की रहने वाली हैं. तुलु और कन्नड़ भाषी परिवार से आने वाली अनीता ने शादी के बाद गोंडा को अपना घर बनाया. आज गोंडा नगर में उनका अपना निजी नर्सिंग होम है, जहां बड़ी संख्या में महिला मरीज इलाज के लिए पहुंचती हैं.

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डॉ. अनीता की खासियत सिर्फ उनका चिकित्सा अनुभव नहीं है. मरीजों की भाषा को समझने और उसी भाषा में उनसे बातचीत करने की उनकी कोशिश ने उन्हें महिलाओं के बीच खास पहचान दिलाई है. कर्नाटक के मंगलूर जिले में एक बिजनेस मैन की कन्नड़ भाषी बेटी अनीता मिश्रा ने मनिपाल यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू की थी. साल 1997 में जब वह एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की छात्रा थीं, उसी दौरान उनकी मुलाकात गोंडा निवासी पूर्णोदय मिश्रा से हुई.

पूर्णोदय उनसे दो साल सीनियर थे. पढ़ाई के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और उसी साल यानी 1997 में दोनों ने शादी कर ली. शादी के बाद अनीता के जीवन में गोंडा की एंट्री हुई. साल 2000 में उन्होंने राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से एमएस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह अपने पीहर कर्नाटक से उत्तर प्रदेश के गोंडा स्थित ससुराल आ गईं. गोंडा आने के बाद डॉ. अनीता के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाषा की थी. उनकी मातृभाषा कन्नड़ थी और गोंडा में रोजमर्रा की बातचीत हिंदी और अवधी में होती थी.

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गोंडा आईं तो सामने आई भाषा की मुश्किल

उन्होंने सबसे पहले हिंदी सीखी और धीरे-धीरे हिंदी में पारंगत हो गईं. इसके बाद साल 2005 में डॉक्टर दंपती ने गोंडा नगर में अपना निजी नर्सिंग होम शुरू किया. दोनों ने वहीं अपनी प्रैक्टिस शुरू कर दी. लेकिन डॉक्टर के सामने एक और चुनौती थी. नर्सिंग होम में आने वाली ज्यादातर महिला मरीज अपनी बीमारी और तकलीफ अवधी भाषा में बताती थीं. डॉ. अनीता के लिए शुरुआत में मरीजों की अवधी में कही गई बातों को समझना आसान नहीं था. यहीं से उन्होंने एक और भाषा सीखने का फैसला किया. इस बार उन्होंने अवधी सीखना शुरू किया.

डॉ. अनीता ने धीरे-धीरे अवधी बोलना और समझना शुरू किया. लगातार मरीजों से बातचीत करते हुए उनकी अवधी पर पकड़ मजबूत होती चली गई. अब स्थिति यह है कि वह महिला मरीजों से उनकी अपनी भाषा में ही बातचीत करती हैं. मरीज जब अपनी तकलीफ अवधी में बताती हैं तो डॉ. अनीता आसानी से उनकी बात समझ लेती हैं. इससे मरीजों को भी डॉक्टर से अपनी परेशानी बताने में सहजता महसूस होती है. डॉ. अनीता बताती हैं कि मरीज जब अवधी में अपनी समस्या बताती हैं तो वह उन्हें बहुत म्यूजिकल लगता है. उन्होंने मरीजों की बातचीत के उदाहरण भी बताए.

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वह कहती हैं कि जब कोई मरीज कहती है, ‘पेटवा पिरात है’, ‘कनवा कुकुआत है’ या ‘गटईवा खासखसात है’, तो सुनने में यह बहुत अच्छा और म्यूजिकल लगता है. मरीजों की इसी भाषा को अपनाकर डॉ. अनीता ने उनके साथ एक अलग तरह का जुड़ाव बनाया है. अब महिला मरीज अपनी परेशानी खुलकर उनके सामने रखती हैं और डॉक्टर भी उनकी बात उसी सहजता से समझती हैं. डॉ. अनीता मिश्रा और उनके पति पूर्णोदय मिश्रा का एक बेटा भी है. वह राजीव गांधी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है.

इस तरह डॉक्टर दंपती ने गोंडा में अपनी चिकित्सा प्रैक्टिस के साथ परिवार को भी यहीं स्थापित कर लिया है. कर्नाटक से गोंडा तक का यह सफर अनीता मिश्रा के लिए सिर्फ शादी के बाद नए शहर में बसने तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने यहां के लोगों की भाषा भी सीखी और उसे अपनी बातचीत का हिस्सा बना लिया.

कत्थक की शौकीन, सोशल मीडिया पर भी रहती हैं सक्रिय

डॉ. अनीता मिश्रा को कत्थक नृत्य का भी शौक है. वह अक्सर अपनी रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं. उनकी ये रील सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं. डॉक्टरी के साथ नृत्य में उनकी दिलचस्पी उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू है. वह मरीजों के बीच अपनी सहज बातचीत और सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता को लेकर भी चर्चा में रहती हैं. डॉ. अनीता के मुताबिक वह बीते सालों में मिसेज इंडिया और मिसेज एशिया भी बन चुकी हैं.

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कर्नाटक की कन्नड़ और तुलु भाषाई पृष्ठभूमि से निकलकर गोंडा की अवधी को अपनाने वाली डॉ. अनीता मिश्रा की कहानी इसलिए अलग है, क्योंकि उन्होंने मरीजों को अपनी भाषा सीखने के लिए मजबूर नहीं किया. बल्कि खुद उनकी भाषा सीखी. आज गोंडा में महिला मरीजों के बीच उनकी पहचान ऐसी डॉक्टर के रूप में है, जो उनकी बीमारी के साथ उनकी भाषा को भी समझती हैं.
 

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