गाजियाबाद में डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को फंसाकर ठगी करने वाले एक गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों की पहचान राहुल गुप्ता, मणिकांत, मोहित और विशाल राजपूत के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, गिरोह गाजियाबाद के RDC इलाके में 'लॉर्ड ऑफ़ विंग्स क्लब'चला रहा था.
कैसे लोगों को फंसाते थे ठग?
पुलिस के अनुसार, आरोपी टिंडर, हैपन और टूगेदर जैसे डेटिंग ऐप्स पर लड़कियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल के जरिए पुरुषों से बातचीत की जाती थी और उन्हे मिलने के बहाने क्लब में बुलाया जाता था. क्लब पहुंचने के बाद अलग-अलग लड़कियां उनसे मिलती थीं. और खाने-पीने की चीजों के साथ शराब, शैम्पेन और हुक्का ऑर्डर करती थीं.
लोगों का वीडियो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
पुलिस का आरोप है कि सामान का वास्तविक बिल बनने के बाद उसमें कई गुना रकम जोड़ दी जाती थी. इसके बाद युवकों से बढ़ी हुई रकम वसूलने की कोशिश की जाती थी. अगर कोई व्यक्ति बिल का भुगतान करने से इनकार था, तो उसे डराया-धमकाया जाता था. जांच के मुताबिक, गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों के वीडियो भी बनाते थे और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करने की धमकी देकर पैसे मांगते थे.
ठगी की रकम का क्या करते थे आरोपी?
पुलिस का कहना है कि ठगी से मिलने वाली रकम आरोपियों के बीच बांट ली जाती थी. क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक सुज़ुकी फ्रॉन्क्स कार बरामद की है. बरामद कार का रजिस्ट्रेशन नंबर UP14GR0356 बताया गया है. पुलिस के मुताबिक, यह क्लब करीब एक महीने से चल रहा था. और इसी तरिके से कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की गई थी.
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मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मणिकांत के खिलाफ वर्ष 2024 और 2025 में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के दो मामले भी दर्ज हैं. पुलिस अब पुराने मामलों और मौजूदा गिरोह के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है. ये मामला सामने आने के बाद डेटिंग ऐप्स के जरिए मिलने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि ऑनलाइन मिलने वाले अनजान लोगों के बुलावे पर किसी नीजी स्थान या संदिग्ध क्लब में जाने से पहले पूरी जानकारी की जांच करें और संदिग्ध लेनदेन से बचें.
अंशुल सिंह