उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं. जहां उन्नाव के बशीरतगंज क्षेत्र में एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाले मार्ग और टोल प्लाजा के आसपास करीब दो फीट तक पानी भर गया. इससे एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालात यह रहे कि टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक बारिश का पानी पहुंच गया और कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी.
बताया जा रहा है कि सोमवार को कुछ घंटे हुई बारिश के बाद बशीरतगंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे के एंट्री प्वाइंट पर पानी जमा हो गया. एक्सप्रेसवे के साथ-साथ सर्विस रोड भी जलमग्न हो गई. इससे दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गईं. कई बाइक पानी में फंसकर बंद हो गईं, जिन्हें दूसरे लोगों की मदद से खींचकर जलभराव वाले हिस्से से बाहर निकाला गया.
टोल बूथ में घुसा पानी, पैर ऊपर रखकर बैठा कर्मचारी
जलभराव की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टोल प्लाजा के केबिन के अंदर तक पानी पहुंच गया. टोल वसूलने वाला कर्मचारी कुर्सी पर पैर ऊपर रखकर बैठने को मजबूर नजर आया. एक्सप्रेसवे के कर्मचारियों ने जनरेटर लगाकर पानी निकालने का काम शुरू किया. दोपहर से लेकर देर रात तक पानी निकालने की कोशिश जारी रही, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बावजूद पानी पूरी तरह बाहर नहीं निकाला जा सका.
कुछ दिन पहले सड़क धंसने से भी उठे थे सवाल
गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव की यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले ही एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे. करीब 12 से 14 दिन पहले मेरठ से प्रयागराज जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 42.1 के पास सड़क में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा हो गया था.
इसके बाद कार्यदायी संस्था ने बारिश के दौरान ही सड़क की मरम्मत कराई और पैचवर्क किया. हालांकि, मरम्मत के बाद सड़क पर दोबारा दरारें दिखाई देने लगीं. अब बारिश के बाद टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे के एंट्री मार्ग पर भारी जलभराव ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
36 हजार करोड़ से ज्यादा की लागत से बना है एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. करीब 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार यह छह लेन का एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा है. इसका उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.
ऐसे में महज कुछ घंटे की बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के चढ़ने वाले मार्ग और टोल प्लाजा पर दो फीट तक पानी भरने से निर्माण के साथ-साथ जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था इस जलभराव की वजह क्या बताती है और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
एक्सप्रेसवे की देखरेख करने वाली एजेंसी ने क्या कहा?
कार्यदायी एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजर आरएस मिश्रा ने बताया कि टोल के पास हाईटेंशन टावर की विद्युत लाइन है. जिसमें इलेक्ट्रिक तार और रोड के बीच की दूरी 14 मीटर होनी चाहिए. इस वजह से यहां पर टोल अधिक ऊंची जगह पर नहीं बनाया जा सकता था. जल भराव की उम्मीद नहीं थी. भारी वर्षा से ऐसा हुआ. इसके चलते गड्ढा भी बन गया है. अब जब ऐसा हुआ है तो टोल के किनारे दीवार उठाकर इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा.
सूरज सिंह