उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक और देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शुमार गंगा एक्सप्रेसवे बारिश के चलते धंस गया है. मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 36000 करोड़ से अधिक की लागत आई थी, लेकिन बारिश की शुरुआती फुहारों में ही इसकी क्वालिटी की पोल खुल गई है.
दरअसल, मेरठ से प्रयागराज जाने वाले रूट पर उन्नाव क्षेत्र के पास किलोमीटर संख्या 421 पर एक्सप्रेसवे की सड़क और साइड रेलिंग के पास करीब 10 मीटर लंबा गहरा गड्ढा हो गया.
अचानक सड़क धंसने से वहां से गुजरने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया. घटना की सूचना मिलते ही कार्यदायी संस्था और यूपीडा (UPEIDA) के अधिकारियों में हड़कंप मच गया. विभाग के अधिकारी बारिश के बीच ही आनन-फानन में मौके पर पहुंचकर सड़क और रेलिंग की मरम्मत कराने के कार्य में जुट गए हैं. देखें VIDEO:-
उद्घाटन के महज 3 महीने बाद धंसी सड़क
बता दें कि 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को प्रदेश के 12 जिलों से जोड़कर बनाया गया है, जिससे मेरठ से प्रयागराज तक का 12 घंटे का सफर घटकर मात्र 6 घंटे रहने का दावा किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 29 अप्रैल को उद्घाटन किया था.
इसके महज 3 महीने बाद ही एक्सप्रेसवे का इस तरह धंसना इसकी निर्माण सामग्री और इंजीनियरिंग की क्वालिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारी अपनी कमियों को छिपाने के लिए बारिश में ही लीपापोती करने में लगे हैं.
प्रोजेक्ट हेड ने दी सफाई
गंगा एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट हेड आरके मिश्र ने अपने बयान में कहा है, ''प्रायः एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद पहली बरसात में कहीं-कहीं थोड़ी बहुत समस्या सामने आती है. एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई की जाती है और बारिश के दौरान मिट्टी के बैठने से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है. महत्वपूर्ण यह है कि मौके पर मौजूद तकनीकी टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ तत्काल सुधार कार्य में जुट जाती हैं, ताकि आवागमन बाधित न हो.
गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और निर्धारित मानकों का प्रयोग किया गया है. दक्ष तकनीकी टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता के अनुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है. गंगा एक्सप्रेसवे पर निर्बाध आवागमन जारी है.''
सूरज सिंह