'यूपी में अब विदेशी आक्रांता के नाम पर कोई आयोजन नहीं, पहले होते थे उर्स', सीएम योगी का निशाना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच दौरे के दौरान नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया. इसके साथ ही, सीएम योगी ने बहराइच से नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन तक नई ट्रेन को रवाना किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने विदेशी आक्रांताओं के नाम पर होने वाले उर्स की भी निंदा की.

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सीएम योगी बहराइच दौरे पर थे. (Photo- X/Yogi Adityanath) सीएम योगी बहराइच दौरे पर थे. (Photo- X/Yogi Adityanath)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:25 PM IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं. नेपाल त्रासदी के सम्मान में सीएम योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो मिनट का मौन रखा. 

बहराइच में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'हाल ही में नेपाल के अंदर एक भीषण त्रासदी के कारण न सिर्फ मित्र राष्ट्र नेपाल, बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों के लोगों को प्राकृतिक आपदा की त्रासदी का शिकार होना पड़ा. 

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सीएम योगी ने इस दौरान बिना किसी सजावट और बिना हरी झंडी दिखाए बहराइच से नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन तक नई ट्रेन को भी रवाना किया गया. 

(Photo- ITGD)

बहराइच को मिलीं नई रेल सेवाओं की सौगात

योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान बहराइच में नई रेल कनेक्टिविटी पर भी बात की. उन्होंने कहा, 'आज के विकास का कार्य अब बहराइच से खलीलाबाद के लिए भी नई रेल लाइन बिछ रही है. आपने देखा होगा रेल मंत्री ने जो एक नई रेल सेवा की बात की थी. गोरखपुर से सिद्धार्थनगर, उतरौला, बलरामपुर होते हुए और उसे बहराइच तक की कनेक्टिविटी और फिर वही इस नेपालगंज रोड को जोड़ने की भी ये रेल एक नई शुरुआत हो रही है.'

'महाराजा सुहेलदेव की विजयगाथा का प्रतीक बना भव्य स्मारक'

इस दौरान इतिहास और महाराजा सुहेलदेव के योगदान को याद करते हुए CM योगी ने कहा, 'महाराज सुहेलदेव ने 1000 साल पहले इसी बहराइच में विदेशी आक्रांता सालार मसूद को मिट्टी में मिलाने का काम किया था और विदेशी आक्रांताओं से भारत की धरती को मुक्त रखने का काम किया था.'

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उन्होंने आगे कहा, 'हैरानी होती है कि दशकों तक आजादी के बाद भी महाराज सुहेलदेव को विस्मृत किया गया. जो आक्रांता बाहर से आकर भारत को अपमानित करना चाहता था, उसके नाम पर यहां उर्स और मेला लगवाकर भारत को अपमानित किए जाने का काम किया जाता था. आज विदेशी आक्रांता के नाम पर कोई आयोजन नहीं, महाराज सुहेलदेव की विजयगाथा को कहता हुआ महाराज सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनकर तैयार हो चुका है.'

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