मंदिर निर्माण कैसे हुआ, फैसले कौन लेता था... क्लीन चिट के बाद चंपत राय ने लिखी 9 पेज की चिट्ठी

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को एसआईटी से क्लीन चिट मिलने की खबरों के बीच सचिव पद से हटाए गए चंपत राय ने 9 पेज की चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने मंदिर की व्यवस्था, आर्थिक पारदर्शिता, निर्माण प्रक्रिया और फैसले लेने की पूरी व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी है.

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चंपत राय ने चिट्ठी में नृपेंद्र मिश्रा को लेकर खासतौर से अपनी बात रखी है. (Photo- ITG) चंपत राय ने चिट्ठी में नृपेंद्र मिश्रा को लेकर खासतौर से अपनी बात रखी है. (Photo- ITG)

संजय शर्मा

  • लखनऊ,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद के बीच चंपत राय की 9 पेज की चिट्ठी सामने आई है. एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट को क्लीन चिट मिलने की चर्चा के बीच लिखी गई इस चिट्ठी में चंपत राय ने मंदिर की व्यवस्था से लेकर निर्माण के फैसलों तक कई अहम बातें बताई हैं.

चंपत राय ने लिखा कि ट्रस्ट की सभी सेवाएं, जैसे दर्शन पास, आरती पास और प्रसाद, निःशुल्क हैं. मंदिर के अर्चक मुख्य रूप से पूजा-पाठ, वेद, रामायण और अन्य धार्मिक सेवाओं में लगे रहते हैं. श्रद्धालुओं से पूजा कराने या दक्षिणा लेने का काम नहीं होता.

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चंपत राय ने दावा किया कि ट्रस्ट के तीन बैंक खातों में पैसा रखा जाता है और कोई चेकबुक नहीं ली गई है. सभी भुगतान ऑनलाइन आरटीजीएस के जरिए किए जाते हैं. आंतरिक और वैधानिक ऑडिट भी अलग-अलग ऑडिट फर्मों से कराया जाता है. जीएसटी, टीडीएस, स्टांप फीस, लेबर सेस, पीएफ और ईएसआई समेत सभी सरकारी टैक्स जमा किए जाते हैं.

श्रद्धालुओं के लिए भी कई सुविधाओं का जिक्र है. हर निकास मार्ग पर मुफ्त प्रसाद दिया जाता है. भीड़ के समय सामान्य दर्शन में अधिकतम करीब दो घंटे लगते हैं. बुजुर्ग, दिव्यांग, बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त सुगम दर्शन पास और व्हीलचेयर की सुविधा भी है.

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मंदिर निर्माण का फैसला कैसे हुआ?

चंपत राय के मुताबिक, 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ. इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट बनाया. इसमें कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई.

चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के तौर पर नृपेन्द्र मिश्रा की भूमिका बेहद अहम रही. मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले इसी समिति में लिए जाते थे. उनके मुताबिक समिति की बैठक आम तौर पर हर महीने और कुछ समय 15 दिन में होती थी.

L&T और टाटा को कैसे चुना गया?

चिट्ठी में कहा गया है कि स्वर्गीय अशोक सिंहल के पुराने सुझावों के आधार पर लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी को मंदिर निर्माण के लिए चुना गया. प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स यानी टीसीई को जिम्मेदारी दी गई.

मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा का चयन अशोक सिंहल ने 1986 में किया था और उन्हें ही आगे भी जिम्मेदारी दी गई. दूसरे भवनों के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को चुना गया.

चंपत राय ने लिखा कि मंदिर निर्माण के ज्यादातर फैसलों में नृपेन्द्र मिश्रा की मुख्य भूमिका रही. उनके मुताबिक कोई भी ऐसा काम नहीं हुआ, जिसका फैसला निर्माण समिति में न लिया गया हो.

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चंपत राय ने यह भी लिखा कि कोरोना काल में जून 2020 से शुरू हुआ पत्थरों का विशाल मंदिर जून 2026 तक पूरा होकर समाज को समर्पित हो गया. राय ने इसका बड़ा श्रेय नृपेन्द्र मिश्रा के प्रयासों को दिया.

अनूप मित्तल की भी अहम भूमिका

चिट्ठी में पूर्व एनबीसीसी चेयरमैन अनूप मित्तल का भी जिक्र है. राय के मुताबिक मित्तल सिविल इंजीनियर के तौर पर नृपेन्द्र मिश्रा के इंजीनियरिंग सलाहकार रहे और मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते थे. चिट्ठी के अनुसार, नृपेन्द्र मिश्रा के लिखित काम भी अनूप मित्तल ही तैयार करते थे.

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