किसी घर में तीन लोग थे. पिता, मां और बेटा. करीब 10 साल पहले पिता की मौत हो गई. इसके बाद घर में सिर्फ दो लोग रह गए- मां और बेटा. दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर जिंदगी काट रहे थे. फिर एक दिन मां-बेटा बाइक से घर से निकले. उन्हें क्या पता था कि ये उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बनने वाला है. रास्ते में एक छुट्टा सांड आया. कुछ ही सेकेंड में उसने दोनों पर हमला कर दिया. मां-बेटा बुरी तरह घायल हो गए. लोगों ने सांड को भगाया. दोनों को अस्पताल पहुंचाया. डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखी तो बीएचयू ट्रॉमा सेंटर भेज दिया. लेकिन वहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई.
अब उस घर में न पिता हैं, न मां और न बेटा. एक परिवार, जो दस साल पहले ही अधूरा हो चुका था, अब पूरी तरह खत्म हो गया. घटना भदोही के गोपीगंज थाना क्षेत्र की है. पर्वतपुर गांव के रहने वाले प्रियांशु सिंह अपनी मां विनीता सिंह के साथ बाइक से अमवा गए थे. दोनों बाइक से जा रहे थे. तभी रास्ते में एक छुट्टा सांड आ गया. सांड ने अचानक मां-बेटे पर हमला कर दिया. हमला इतना गंभीर था कि दोनों जमीन पर गिर पड़े और बुरी तरह घायल हो गए.
मौके पर चीख-पुकार मच गई. आसपास के लोग दौड़कर पहुंचे. किसी तरह सांड को वहां से भगाया गया. फिर घायल मां-बेटे को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. हालत गंभीर थी. डॉक्टरों ने दोनों को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया. मां और बेटे को बेहतर इलाज की उम्मीद में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया.
यह भी पढ़ें: ग्वालियर: ट्यूशन से लौट रहे 6 साल के मासूम को सांड ने मारी टक्कर, सिर पर आए 25 टांके,
इलाज शुरू हुआ. लेकिन दोनों की हालत गंभीर बनी रही. डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद दोनों को बचाया नहीं जा सका. इलाज के दौरान पहले बेटे प्रियांशु की मौत हुई और फिर मां विनीता की भी जान चली गई. एक ही हादसे ने एक परिवार की बची हुई आखिरी उम्मीद भी छीन ली.
अब इस कहानी को जरा पीछे ले चलते हैं. प्रियांशु के पिता की करीब दस साल पहले मौत हो गई थी. पिता के जाने के बाद परिवार में मां और बेटा ही रह गए थे. मां ने बेटे को संभाला. बेटा मां का सहारा बना. पिता के जाने के बाद जो खालीपन आया था, उसे दोनों ने मिलकर भरने की कोशिश की. छोटी-सी दुनिया थी. लेकिन दुनिया थी.औ र अब वो भी नहीं रही. एक तरफ बेटा चला गया. दूसरी तरफ मां भी नहीं रहीं. यानी जिस घर में पहले तीन लोग रहते थे, वहां अब कोई नहीं बचा.
हादसे के वक्त स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की. लोगों ने सांड को खदेड़ा और घायल मां-बेटे को अस्पताल पहुंचाया. दोनों को गंभीर हालत में बीएचयू भेजा गया. पर जिंदगी और मौत के बीच चल रही इस लड़ाई में दोनों हार गए. पुलिस ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया है. गांव में मातम पसरा हुआ है. लोगों के लिए ये सिर्फ एक हादसा नहीं है. ये उस परिवार का अंत है, जिसे उन्होंने अपनी आंखों के सामने टूटते देखा.
यह भी पढ़ें: बाजार बना सांडों का अखाड़ा, आधे घंटे तक चला 'दंगल'... MLA की गाड़ी भी फंसी, बुलानी पड़ी जेसीबी
अब जरा घटना से बाहर निकलकर देखिए. सड़कों पर घूमते छुट्टा पशु लंबे वक्त से लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं. कभी बाइक सवार से टक्कर. कभी अचानक सड़क के बीच आ जाना. कभी किसी राहगीर पर हमला. लेकिन भदोही में इस बार इसकी कीमत एक परिवार ने अपनी जिंदगी से चुकाई. प्रियांशु अपनी मां के साथ बाइक से जा रहे थे. उन्हें शायद ये भी नहीं पता था कि सड़क पर खड़ा एक सांड उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बनने वाला है.
पर्वतपुर गांव में अब इस परिवार की कहानी सुनाने के लिए सिर्फ लोग बचे हैं. पिता की मौत के बाद मां और बेटे ने किसी तरह जिंदगी आगे बढ़ाई थी. अब मां और बेटा दोनों साथ चले गए. शायद यही इस कहानी की सबसे कड़वी बात है. सवाल ये है कि अगर सड़कों पर घूमता एक छुट्टा सांड किसी परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ सकता है, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इस सवाल का जवाब शायद उन लोगों के पास होना चाहिए, जिनके जिम्मे सड़कों पर घूमते इन पशुओं और लोगों की सुरक्षा का इंतजाम है. प्रियांशु और विनीता अब वापस नहीं आएंगे. लेकिन अगर इस हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया, तो क्या होगा.
महेश जायसवाल