योगी सरकार में कितना बदला अन्नदाता का हाल, बागपत के किसानों की जुबानी

बागपत के किसानों ने बिजली, पानी, खाद, गन्ने के भुगतान और कानून-व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव साझा किए. किसानों का कहना है कि खाद के लिए लंबी कतारों, सिंचाई के लिए बिजली और रात में खेतों पर जाने जैसी परेशानियों में बदलाव आया है.

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बागपत के किसानों ने खेती से जुड़े मुद्दों पर बताया अपना अनुभव. बागपत के किसानों ने खेती से जुड़े मुद्दों पर बताया अपना अनुभव.

मनुदेव उपाध्याय

  • बागपत,
  • 26 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में किसान हमेशा से सबसे बड़ा मुद्दा रहा है, लेकिन बागपत की गन्ना बेल्ट में जब हमने किसानों के बीच जाकर सरकार के कामकाज का हाल जाना, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई. किसानों ने बिजली, पानी, खाद से लेकर गन्ने के भुगतान और कानून-व्यवस्था तक कई मुद्दों पर अपनी राय रखी. किसानों का कहना है कि पहले जिन समस्याओं के लिए उन्हें लंबी कतारों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, उनमें अब काफी बदलाव आया है. खास तौर पर गन्ना किसानों का कहना है कि भुगतान व्यवस्था में सुधार हुआ है और गन्ने के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है.

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दरअसल, ये बागपत की वो धरती है, जहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीद भी पलती है. कहीं किसान खेत में खड़ा है, कहीं गन्ने की फसल लहलहा रही है, तो कहीं किसान जुताई में जुटा है. किसानों से जब हमने पूछा कि पिछले कुछ सालों में खेती और किसान की जिंदगी में क्या बदला, तो किसानों ने बिजली, पानी, खाद और गन्ने के भुगतान को सबसे अहम मुद्दा बताया.

किसानों का कहना है कि अब खाद के लिए पहले जैसी लंबी कतारों का सामना नहीं करना पड़ता. सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता में भी सुधार महसूस होता है. किसान के लिए खेत में पानी सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि पूरी फसल की जिंदगी है. बागपत के किसानों का कहना है कि बिजली और पानी की व्यवस्था पहले के मुकाबले बेहतर हुई है, जिसका सीधा असर उनकी खेती पर पड़ रहा है. अब उन्हें रात के समय खेतों की सिंचाई करने में पहले जैसी परेशानी महसूस नहीं होती और बिजली की उपलब्धता में बदलाव आया है.

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खाद को लेकर चिंता खत्म

किसान के लिए दूसरी बड़ी चिंता खाद की होती है. किसानों का दावा है कि पहले खाद लेने के लिए लंबी कतारें लगती थीं, घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब हालात में बदलाव आया है. बागपत के कुछ किसानों ने कानून-व्यवस्था में बदलाव को भी अपनी जिंदगी से जोड़कर देखा. किसानों का कहना है कि पहले रात के वक्त खेत पर जाने में डर महसूस होता था, लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं हैं. यानी किसान के लिए कानून-व्यवस्था का मतलब सिर्फ अपराध के आंकड़े नहीं, बल्कि रात में अपने खेत तक बेफिक्र होकर पहुंच पाना भी है. किसानों ने कहा कि अब रात में खेत पर जाने को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहती.

लेकिन बागपत की बात हो और गन्ने की बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है. बागपत पश्चिमी यूपी की गन्ना बेल्ट का अहम हिस्सा है. यहां किसान के लिए गन्ना सिर्फ फसल नहीं, बल्कि परिवार की आमदनी का बड़ा आधार है. किसानों से जब पूछा गया कि गन्ने की खरीद और भुगतान को लेकर क्या बदलाव महसूस हुआ, तो किसानों ने पुराने अनुभवों और मौजूदा व्यवस्था के बीच फर्क बताया.

समय पर मिल रहा है गन्ने का दाम

किसानों का कहना है कि पहले गन्ने की खरीद और भुगतान को लेकर परेशानी रहती थी, जबकि अब समय पर भुगतान मिलने और गन्ने के दाम बढ़ने से उन्हें राहत मिली है. बागपत के किसानों की बातों में एक चीज साफ नजर आई. खेत में बिजली कितनी मिली, खाद के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ी, सिंचाई कितनी आसान हुई और गन्ने का पैसा कब खाते में आया, इससे होता है. इन मुद्दों पर बागपत के जिन किसानों से हमने बात की, उन्होंने मौजूदा सरकार को किसान हितैषी बताया.

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