आज के समय में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो यूपीआई का इस्तेमाल नहीं करता हो. चाय की दुकान हो, सब्जी वाला हो या फिर बड़ा शोरूम. हर जगह लोग मोबाइल से कुछ ही सेकंड में पेमेंट कर देते हैं. यही वजह है कि कैश पैसे रखने की आदत भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है.
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि यूपीआई की वजह से आपकी जेब से पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं? दिल्ली की एक महिला ने इसी सवाल का जवाब जानने के लिए एक अनोखा एक्सपेरिमेंट किया. उसने करीब ढाई महीने तक यूपीआई का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया और सिर्फ कैश से खर्च करना शुरू किया. इसके बाद उसे जो फर्क महसूस हुआ, उसने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी.
ढाई महीने तक नहीं किया यूपीआई का इस्तेमाल
दिल्ली की कंटेंट क्रिएटर सदफ ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने करीब ढाई महीने तक UPI से एक भी पेमेंट नहीं की. इस दौरान उन्होंने रोजमर्रा के लगभग सभी खर्च कैश पैसे से किए. उनका मकसद सिर्फ इतना था कि वह यह समझ सकें कि डिजिटल पेमेंट और कैश से पेमेंट करने में असल फर्क क्या है. शुरुआत में उन्हें थोड़ी परेशानी हुई, क्योंकि आज ज्यादातर दुकानों पर लोग सीधे यूपीआई से पेमेंट करते हैं. लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें इस फैसले का असर साफ दिखने लगा.
फिजूल खर्च अपने आप हो गया कम
सदफ ने बताया कि पहले यूपीआई से पेमेंट करना बेहद आसान था. मोबाइल निकाला, क्यूआर कोड स्कैन किया और कुछ ही सेकंड में पैसे कट गए. कई बार छोटे-छोटे खर्च का एहसास भी नहीं होता था. लेकिन जब उन्होंने कैश से पेमेंट करना शुरू किया तो हर बार पर्स खोलना, नोट निकालना और पैसे गिनकर देना पड़ता था. इससे उन्हें हर खर्च का एहसास होने लगा. नतीजा यह हुआ कि उन्होंने गैरजरूरी चीजें खरीदना काफी हद तक बंद कर दिया. उनका कहना है कि जब अपनी आंखों के सामने पैसे कम होते दिखाई देते हैं तो इंसान खरीदारी करने से पहले दो बार जरूर सोचता है.
बजट बनाना भी हो गया आसान
महिला ने बताया कि पहले दिनभर में कई छोटे-छोटे यूपीआई ट्रांजैक्शन हो जाते थे. महीने के आखिर में बैंक स्टेटमेंट देखने पर पता चलता था कि काफी पैसे खर्च हो चुके हैं. लेकिन कैश इस्तेमाल करने के दौरान उन्होंने पहले से ही तय कर लिया कि रोज कितना खर्च करना है. जब पर्स में रखे पैसे कम होने लगते थे तो वह बाकी खर्च टाल देती थीं. इससे उनका बजट भी कंट्रोल में रहने लगा और बचत भी बढ़ने लगी.
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
महिला का वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी राय दी. कई यूजर्स ने लिखा कि उनके साथ भी ऐसा ही होता है. यूपीआई की वजह से पैसे खर्च करना इतना आसान हो गया है कि कई बार जरूरत और इच्छा का फर्क ही खत्म हो जाता है. हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आज के समय में पूरी तरह कैश पर निर्भर रहना आसान नहीं है. ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी, टैक्सी बुकिंग और कई दूसरी सेवाओं में डिजिटल पेमेंट ही सबसे आसान विकल्प है.
क्या सच में यूपीआई से खर्च बढ़ जाता है?
फाइनेंनसियल एक्सपर्ट का कहना है कि यूपीआई खुद कोई समस्या नहीं है. यह एक सुरक्षित और तेज पेमेंट सिस्टम है. लेकिन डिजिटल पेमेंट की आसान प्रक्रिया कई लोगों को बिना सोचे-समझे खर्च करने के लिए प्रेरित कर सकती है. यही वजह है कि अगर आपको लगता है कि आपके खर्च बढ़ रहे हैं, तो हर महीने बजट तय करें. रोजाना अपने बैंक ट्रांजैक्शन पर नजर रखें. जरूरत पड़ने पर कुछ खर्च कैश में भी करें. इससे पैसों पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है.
क्या है इस कहानी की सीख?
दिल्ली की इस महिला का अनुभव बताता है कि कई बार पैसा बचाने का तरीका कमाने से भी ज्यादा जरूरी होता है. यूपीआई ने जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन अगर खर्च पर नजर न रखी जाए तो छोटी-छोटी पेमेंट भी महीने के अंत में बड़ा बिल बन सकती हैं. इसलिए यूपीआई छोड़ने की जरूरत नहीं है. जरूरत इस बात की है कि डिजिटल सुविधा का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए. अगर खर्च पर कंट्रोल रखना है तो बजट बनाइए, ट्रांजैक्शन पर नजर रखिए और जहां जरूरी लगे, वहां कैश का इस्तेमाल भी कीजिए.
aajtak.in