इजरायल जा रहे फ्लाइट में हुई चाकूबाजी की घटना के बाद भारतीय पायलट स्मित मछार ने घायल होने के बाद भी 174 लोगों की जान बचाई. जिस प्लेन को पायलट स्मित ने जमीन पर उतारा, उसमें बड़ी संख्या में इजरायली यात्री थे. अब उनकी बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उन्हें हीरो बताया है. इसके अलावा दुनिया भर में भारतीय मूल के पायलट की बहादुरी की चर्चा हो रही है. लेकिन, इजरायलियों की जान बचाने वाली किसी भारतीय की यह पहली कहानी नहीं है.
करीब 18 साल पहले मुंबई में भी एक भारतीय महिला ने आतंकियों के बीच से एक इजरायली बच्चे को बचाया था. ये बात है साल 2008 की जब मुंबई पर हमला किया गया था. मुंबई के नरीमन हाउस को भी आतंकियों ने निशाना बनाया था. यहां इजरायली रब्बी गैब्रियल होल्त्जबर्ग और उनकी पत्नी रिवका अपने दो साल के बेटे मोशे के साथ रहते थे. आतंकियों ने नरीमन हाउस पर कब्जा कर लिया था. गोलियों की आवाज के बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपे हुए थे. इसी दौरान वहां काम करने वाली भारतीय महिला सैंड्रा सैमुअल भी अंदर फंस गई थीं. उनके साथ काजी जाकिर हुसैन भी थे. दोनों ने खुद को बचाने के लिए एक कमरे में छिपा लिया था.
अगले दिन उन्हें एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. वह दो साल का मोशे था. सैंड्रा और जाकिर ऊपर पहुंचे तो उन्होंने बच्चे को वहां पाया. उसके माता-पिता आतंकियों के हमले में मारे जा चुके थे. सैंड्रा ने बिना अपनी जान की परवाह किए बच्चे को गोद में उठाया और उसे लेकर नरीमन हाउस से बाहर निकल आईं. सैंड्रा सैमुअल और जाकिर हुसैन की इस बहादुरी की काफी चर्चा हुई थी. उनकी हिम्मत और इंसानियत ने मोशे को आतंकियों के हाथों निश्चित मौत से बचाया.
नरीमन हाउस से बचाए जाने के बाद मोशे को उसके दादा-दादी के पास इजरायल भेजा गया. सैंड्रा सैमुअल भी बाद में इजरायल गईं और मोशे की देखभाल करती रहीं. सैंड्रा के साहस के सम्मान में इजरायल ने उन्हें नागरिकता भी दी. आज मोशे बड़ा हो चुका है. लेकिन उसकी जिंदगी की कहानी में मुंबई की उस भारतीय महिला का नाम हमेशा जुड़ा रहेगा, जिसने आतंकियों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर उसे बचाया था.
अब 18 साल बाद फिर वही इंसानियत देखने को मिली और इस बार भारतीय मूल के पायलट ने कई इजरायली लोगों को बचाया. 2008 में मुंबई में एक भारतीय महिला ने इजरायली बच्चे को बचाया था. अब 2026 में हजारों फीट ऊपर एक भारतीय पायलट ने इजरायली यात्रियों समेत विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई.
30 सितंबर को क्या हुआ?
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 करीब 33 हजार फीट की ऊंचाई पर थी. तभी कॉकपिट में मौजूद को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया.
हमले में कैप्टन घायल हो गए और विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा. विमान ने कुछ ही समय में करीब 14-15 हजार फीट की ऊंचाई खो दी. हालात इतने गंभीर थे कि विमान से इमरजेंसी और संभावित हाइजैकिंग से जुड़े संकेत भी भेजे गए.
लेकिन, इस मुश्किल स्थिति में भी स्मित ने हिम्मत दिखाई. उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया, विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी फ्लाईदुबई पायलटों ने भी कॉकपिट संभालने में मदद की. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया.
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