सोचिए, एक ऐसी जेल की कोठरी जहां कैदी का कमरा दीवारों से नहीं, बल्कि बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट से बना हो. जहां वह दिन के करीब 23 घंटे अकेला रहता हो और किसी दूसरे इंसान से उसका सीधा संपर्क लगभग न के बराबर हो. अगर उसे कमरे से बाहर निकालना हो तो कम से कम चार सुरक्षाकर्मी उसके साथ हों. ब्रिटेन में एक कैदी की जिंदगी कुछ ऐसी ही है.
इस कैदी का नाम रॉबर्ट मौड्सली है. उसे ब्रिटेन के सबसे खतरनाक कैदियों में गिना जाता है. वह साल 1974 से जेल में बंद है और करीब पांच दशक से ज्यादा समय से सलाखों के पीछे है. खास बात यह है कि उसके चार हत्याओं में से तीन ऐसी थीं, जो उसने जेल में बंद रहते हुए कीं. यही वजह है कि जेल प्रशासन उसे आज भी बेहद बड़ा खतरा मानता है.
पहली हत्या जेल जाने से पहले की
रॉबर्ट मौड्सली की पहली हत्या 1974 में लंदन में हुई थी. उसने जॉन फैरेल नाम के शख्स की हत्या कर दी थी. बताया जाता है कि फैरेल ने उसे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी तस्वीरें दिखाई थीं. इस मामले के बाद मौड्सली को मुकदमे का सामना करने के लिए मानसिक रूप से अयोग्य माना गया. उसे ब्रिटेन के मशहूर हाई-सिक्योरिटी मनोचिकित्सकीय अस्पताल ब्रॉडमूर हॉस्पिटल भेज दिया गया. साथ ही उसके कभी रिहा न किए जाने की सिफारिश की गई. लेकिन असली डरावना दौर इसके बाद शुरू हुआ.
साल 1977 में ब्रॉडमूर में रहते हुए मौड्सली और एक दूसरे मरीज डेविड चीजमैन ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. उनके साथ वहां डेविड फ्रांसिस भी था, जिसे बच्चों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया था. करीब नौ घंटे तक चले इस घटनाक्रम के बाद फ्रांसिस की मौत हो गई. इसके बाद मौड्सली को गिरफ्तार किया गया और उसे एचएमपी वेकफिल्ड भेज दिया गया. लेकिन जेल बदलने से उसका हिंसक व्यवहार नहीं रुका.
एक ही दिन में दो कैदियों की हत्या
1978 में वेकफील्ड जेल में मौड्सली ने एक ही दोपहर में दो कैदियों की हत्या कर दी. पहले उसने सैल्नी डारवुड नाम के कैदी की हत्या की, जो अपनी पत्नी की हत्या के मामले में जेल में था. इसके बाद वह विलियम रॉबर्ट्स की सेल तक पहुंचा. रॉबर्ट्स एक बच्ची के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामले में सजा काट रहा था.
इन घटनाओं ने जेल प्रशासन को हिला दिया. अब सवाल सिर्फ यह नहीं था कि मौड्सली ने अपराध किया है, बल्कि यह था कि वह जेल के अंदर भी दूसरे कैदियों के लिए खतरा बना हुआ है.
फिर बनाया गया 'कांच का पिंजरा'
मौड्सली को नियंत्रित करने के लिए जेल प्रशासन ने एक बेहद असामान्य फैसला लिया. साल 1983 में जेल की बेसमेंट में उसके लिए एक खास सेल बनाई गई. यह सेल बुलेटप्रूफ कांच और कंक्रीट से बनी थी. इसे आम तौर पर 'ग्लास केज' यानी कांच का पिंजरा कहा जाने लगा.
यह सेल करीब 5.5 मीटर लंबी और 4.5 मीटर चौड़ी बताई जाती है. इसके अंदर एक कंक्रीट का बेड, टॉयलेट और सिंक था. टेबल और कुर्सी भी ऐसे खास मटेरियल से बनाए गए थे, जिन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो. कई लोग इसकी तुलना फिल्म 'द साइलेंस ऑफ द लैम्ब्स' में दिखाए गए हनिबल लेक्टर के पिंजरे से करते हैं.
करीब 17,500 दिन से अकेला
मौड्सली ने करीब 17,500 दिन लगातार एकांत कारावास में बिताए हैं. यह अवधि ब्रिटिश जेल इतिहास में सबसे लंबी अवधियों में से एक मानी जाती है. उसका दूसरे लोगों से शारीरिक संपर्क लगभग खत्म कर दिया गया है. जब उसे व्यायाम के लिए सेल से बाहर निकाला जाता है, तो उसके साथ कम से कम चार सुरक्षाकर्मी रहते हैं.
यहां तक कि उसके पैर के नाखून काटने के लिए भी दरवाजे में बनी एक छोटी सी जगह से उसके पैर बाहर निकालने पड़ते हैं. यानी जिस काम के लिए आम कैदी के पास कोई कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति सीधे पहुंच सकता है, मौड्सली के मामले में भी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही किया जाता है.हालांकि इतने लंबे समय तक अकेले रखने को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं.
अदालत से पूछा- मुझे 23 घंटे क्यों बंद रखते हैं?
साल 2000 में मौड्सली ने अदालत से यहां तक अपील की थी कि उसे मरने की इजाजत दी जाए. उसका सवाल था कि आखिर उसे रोजाना करीब 23 घंटे बंद रखने का क्या मतलब है और वह वास्तव में किसके लिए खतरा है. लेकिन उसके पुराने रिकॉर्ड और जेल के अंदर किए गए अपराधों को देखते हुए उसे आजादी नहीं मिली.
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और अब भी मौड्सली खुद मानता है कि अगर उसे मौका मिला तो वह दोबारा हिंसा कर सकता है. हाल ही में जेल से दिए एक इंटरव्यू में उसने कहा कि अगर उसे किसी ऐसे यौन अपराधी को नुकसान पहुंचाने का मौका मिला, जिसने किसी का यौन शोषण किया हो, तो वह ऐसा कर सकता है. उसने यह भी कहा कि अगर उसे किसी ऐसे व्यक्ति का सामना करना पड़े जिसने उसका यौन शोषण किया हो, तो वह उसे मारने की कोशिश करेगा.
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