छाता गिरने से लेकर नमक बिखरने, काली बिल्ली के रास्ता काटने और आईना टूटने तक... रोजमर्रा की कई छोटी-छोटी चीजों को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तरह-तरह की मान्यताएं सुनने को मिलती हैं. पाकिस्तान में भी ऐसे कई लोकविश्वास दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुछ मान्यताएं तो इतनी अजीब हैं कि पहली बार सुनकर यकीन करना मुश्किल हो सकता है.
2024 में जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड सोशल स्टडीज में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर 'मिथ्स एंड रियलिटीज: हाउ डिफरेंट फॉर्म्स ऑफ सुपरस्टिशियस बिलीफ्स क्रिएट गुड एंड बैड लक फॉर पीपल इन पाकिस्तान थ्रू एन एंथ्रोपोलॉजिकल लेंस' में पाकिस्तान में प्रचलित कई तरह की मान्यताओं का अध्ययन किया गया. आइये कुछ उसी के बारे में बताते हैं.
पेपर में स्वच्छता, गहनों, शादी, मौत, शीशे और छाते से जुड़े कई लोकविश्वासों का जिक्र है. इसी हिस्से में एक महिला उत्तरदाता ने बताया कि अगर किसी महिला का छाता जमीन पर गिर जाए तो उसे खुद नहीं उठाना चाहिए. उसके मुताबिक, महिला द्वारा अपना गिरा हुआ छाता खुद उठाने की मान्यता को जीवन में दोबारा शादी न होने से जोड़ा जाता है.
यानी इस लोकविश्वास में छाता सिर्फ बारिश से बचाने वाली चीज नहीं रह जाता, बल्कि उसे महिला की शादी और भविष्य से जोड़ दिया जाता है.
आखिर ऐसी मान्यता आई कहां से?
रिसर्च इस खास छाते वाली मान्यता की कोई निश्चित ऐतिहासिक उत्पत्ति नहीं बताती. इसलिए यह दावा करना सही नहीं होगा कि यह विश्वास पूरे पाकिस्तान में इसी कारण से शुरू हुआ था.
रिसर्च का व्यापक निष्कर्ष यह है कि अंधविश्वास अक्सर पीढ़ियों से चले आ रहे रीति-रिवाजों, परंपराओं और सामूहिक मान्यताओं से बनते हैं. इनके पीछे लोग किसी अनजानी या असामान्य घटना को समझाने की कोशिश भी करते रहे हैं.
यानी छाते को लेकर यह विश्वास भी एक स्थानीय लोकमान्यता के रूप में समझना ज्यादा सही होगा, न कि किसी वैज्ञानिक नियम या प्रमाणित तथ्य के रूप में.
छाता ही नहीं, और भी कई अजीब मान्यताएं
इस रिसर्च में पाकिस्तान के कुछ समुदायों में रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई अन्य अंधविश्वास भी दर्ज किए गए हैं.मसलन, रिसर्च में एक स्थानीय के मुताबिक रात में झाड़ू लगाने को शुभ नहीं माना जाता. ऐसी मान्यता है कि रात में घर से कचरा बाहर निकालने के साथ घर की बरकत भी चली जाती है.इसी तरह कुछ मान्यताओं में रात में नहाने को भी नुकसान से जोड़ा गया. पेपर में गहनों से जुड़े ऐसे विश्वासों का भी उल्लेख है जिनमें किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी शादी की अंगूठी पहनने देने को वैवाहिक बेवफाई से जोड़ा गया है.
छाते को लेकर एक और विश्वास
रिसर्च में सिर्फ महिलाओं के गिरे हुए छाते की बात नहीं है. इसमें एक अन्य प्रचलित मान्यता का भी जिक्र किया गया है कि बिस्तर पर छाता रखने को दुर्भाग्य को बुलाने वाला माना जाता है.इसके अलावा समुद्री यात्रा के दौरान काले छाते को भी अशुभ मानने की बात दर्ज की गई है.
हालांकि, इन सभी बातों को वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता. ये उस समाज में मौजूद लोकविश्वास और अंधविश्वासों के उदाहरण हैं.
रिसर्च का मकसद भी इस मान्यता को सच साबित करना नहीं था. शोधकर्ताओं ने पाकिस्तान में मौजूद अलग-अलग अंधविश्वासों और उनके सामाजिक प्रभावों को मानवशास्त्रीय नजरिए से दर्ज किया है.पेपर के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसी मान्यताएं कई बार सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकती हैं. उन्होंने शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के प्रसार को अंधविश्वासों को कम करने का महत्वपूर्ण तरीका बताया.
तो कहानी का सच क्या है?
इसलिए "पाकिस्तान में महिलाएं गिरे हुए छाते को नहीं उठातीं" कहना बहुत व्यापक दावा होगा.सही बात यह है कि पाकिस्तान के लोअर दिर क्षेत्र में किए गए एक मानवशास्त्रीय अध्ययन में एक महिला उत्तरदाता ने ऐसी लोकमान्यता बताई थी, जिसके मुताबिक महिला का अपना गिरा हुआ छाता खुद उठाना उसकी दोबारा शादी न होने से जोड़ा जाता है.
यह विश्वास कितना व्यापक है, रिसर्च उससे जुड़ा कोई राष्ट्रीय आंकड़ा नहीं देती. इसलिए इसे पूरे पाकिस्तान की महिलाओं की मान्यता बताने के बजाय पाकिस्तान में दर्ज एक स्थानीय लोकविश्वास के तौर पर पेश करना ही तथ्यात्मक रूप से सही होगा.
दिलचस्प बात यही है कि रोजमर्रा की एक मामूली चीज यानी छाता भी किसी समाज में शादी, किस्मत और दुर्भाग्य से जुड़ी मान्यताओं का हिस्सा बन सकता है.
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