मुंबई की चॉल में रहने का अनुभव एक शख्स के लिए इतना अलग रहा कि उसने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को नए नजरिए से देखना शुरू कर दिया. Reddit पर शेयर की गई उसकी पोस्ट में उसने बताया कि वह एक रिश्तेदार से मिलने चॉल गया था. रात काफी हो चुकी थी, इसलिए रिश्तेदारों ने उसे वहीं रुकने के लिए कहा. उसने भी रात वहीं बिताने का फैसला किया.
शख्स ने बताया कि चॉल में रहने का अनुभव उसके लिए काफी अलग था. उसके मुताबिक, एक छोटे से कमरे में 5-6 लोग सो रहे थे. उसने वहां प्राइवेसी की कमी और आसपास के शोर का भी जिक्र किया.लेकिन अगली सुबह का अनुभव उसके लिए सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था.
सुबह टॉयलेट के लिए लगानी पड़ी लाइन
शख्स ने बताया कि सुबह उठने के बाद उसे साझा टॉयलेट का इस्तेमाल करना था. इसके लिए उसे लाइन में लगना पड़ता. उसके मुताबिक, उसके आगे करीब 10 लोग खड़े थे और हर व्यक्ति के हाथ में अपनी बाल्टी थी.उसने Reddit पोस्ट में लिखा कि वह लाइन में खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा सका और आखिरकार टॉयलेट का इस्तेमाल ही नहीं किया.
हालांकि, शख्स ने यह भी नोट किया कि उसके रिश्तेदार और चॉल में रहने वाले दूसरे लोग अपनी जिंदगी से खुश नजर आए. वे अक्सर चॉल में रहने वाले लोगों के बीच मजबूत रिश्तों और आपसी मदद की बात करते थे.
उनका कहना था कि चॉल में रहने वाले लोग एक परिवार की तरह हैं और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करते हैं. इसके मुकाबले फ्लैट में रहने वाले लोगों के बीच ऐसी सामुदायिक भावना कम देखने को मिलती है.
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अपने फ्लैट लौटकर बदला नजरिया
चॉल में एक रात बिताने के बाद जब वह अपने घर लौटा और अपने निजी टॉयलेट का इस्तेमाल किया, तो उसे यह सुविधा पहले से कहीं ज्यादा खास लगी.उसने बताया कि अपने फ्लैट में लौटने के बाद उसे एहसास हुआ कि रोजमर्रा की कई छोटी सुविधाएं वास्तव में कितनी बड़ी हैं. अब वह इन चीजों को हल्के में नहीं लेगा.
Reddit पर लोगों ने शेयर किए अपने अनुभव
इस पोस्ट के बाद Reddit पर चॉल में रह चुके कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. हालांकि, सभी की राय एक जैसी नहीं थी.
कुछ लोगों ने चॉल की जिंदगी को मुश्किल बताते हुए कहा कि वहां शोर, झगड़े, प्राइवेसी की कमी और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल का अभाव हो सकता है. एक यूजर ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि चॉल में रहने के दौरान आसपास होने वाले कार्यक्रमों और शोर की वजह से पढ़ाई करना मुश्किल होता था.
एक अन्य यूजर ने बताया कि उसने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा चॉल में बिताया. उसके मुताबिक, घर में टॉयलेट नहीं था, AC और प्राइवेसी जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं. बाद में आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर वह वहां से निकल गया और अब दोबारा उस जिंदगी में लौटना नहीं चाहता.
वहीं कुछ लोगों ने चॉल की जिंदगी का सकारात्मक पक्ष भी बताया.
एक Reddit यूजर ने कहा कि वह चॉल में पला-बढ़ा और अपनी उस जिंदगी को किसी कीमत पर बदलना नहीं चाहेगा. उसके मुताबिक, उनके चॉल में लोग एक-दूसरे के बेहद करीब थे और जरूरत के समय पड़ोसी हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे. खासकर बीमारी या किसी मुश्किल समय में आसपास के लोग परिवार की तरह साथ खड़े होते थे.
यानी सोशल मीडिया पर सामने आए अनुभवों से साफ है कि चॉल की जिंदगी को लेकर लोगों के अनुभव एक जैसे नहीं हैं. कुछ लोगों के लिए साझा टॉयलेट, कम जगह और प्राइवेसी की कमी बड़ी परेशानी है, तो कुछ लोगों के लिए पड़ोसियों का साथ और मजबूत सामुदायिक रिश्ता इस जिंदगी की सबसे बड़ी खासियत है.
क्या कहते हैं चॉल में रहने वाले
चॉल अक्सर काम की जगह, बाजार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के करीब होती हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी आसान रहती है. चॉल में रहने वाले नितिन का कहना है कि पड़ोसियों के बीच आपसी मदद और परिवार जैसा माहौल भी कई लोगों को चॉल से जोड़े रखता है. उनके मुताबिक, मुंबई में उन्हें यहां रहने का आसरा मिल गया है और वह इस जगह को बुरा नहीं कह सकते. हालांकि, इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि कम जगह, प्राइवेसी की कमी और साझा टॉयलेट जैसी सुविधाओं की परेशानी भी यहां रहने वालों को झेलनी पड़ सकती है.
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