जापान में शादी के कई दशक बाद पति-पत्नी के अलग होने का चलन चर्चा में है. इसे ‘सिल्वर डिवोर्स’ कहा जाता है. इसका मतलब है कि ऐसे पति-पत्नी का तलाक लेना, जो लंबे समय से शादीशुदा हैं और आमतौर पर उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जब उनके बच्चे बड़े होकर अलग रहने लगते हैं. जापान में कुल तलाक के मामले पहले के मुकाबले कम हुए हैं, लेकिन 20 साल या उससे ज्यादा समय से शादीशुदा कपल के बीच तलाक के मामले बढ़ रहे हैं. इसके पीछे पति-पत्नी के बीच बातचीत की कमी, घर और बच्चों की जिम्मेदारियों का बोझ और रिटायरमेंट के बाद बदलती जिंदगी जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं.
बच्चों के बड़े होते ही क्यों बदलने लगा शादी का रिश्ता?
जापान की 62 साल की अयुमी की कहानी इस बदलाव को समझने में मदद करती है. उनकी शादी को दो दशक से ज्यादा हो चुके थे. उनके पति लंबे समय तक काम करते थे, जबकि अयुमी घर संभालने और बच्चों की परवरिश में लगी रहती थीं. शुरुआत में दोनों के बीच अच्छा तालमेल था, लेकिन समय के साथ उनके बीच बातचीत कम होती गई. दोनों बेटियों के बड़े होकर घर से चले जाने के बाद अयुमी को महसूस हुआ कि उनके और पति के बीच पहले जैसा रिश्ता नहीं बचा है. अब दोनों तलाक की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. अयुमी की कहानी दिखाती है कि कई बार पति-पत्नी सालों तक बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते रहते हैं. लेकिन जब बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, तो उन्हें अपने रिश्ते की असल स्थिति का एहसास होता है.
रिटायरमेंट के बाद पति-पत्नी के बीच क्यों बढ़ रही दूरी?
जापान में पहले परिवारों में अक्सर ऐसा होता था कि पति नौकरी करते थे और पत्नी घर संभालती थीं. पति लंबे समय तक ऑफिस में रहते थे, जबकि पत्नी बच्चों की देखभाल, खाना बनाने और घर की दूसरी जिम्मेदारियां निभाती थीं. ऐसे में कई महिलाओं की अपनी जरूरतें और इच्छाएं पीछे छूट जाती थीं. पति के रिटायर होने के बाद जब वे ज्यादा समय घर पर बिताने लगते हैं, तो दोनों के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल हो सकता है. कुछ महिलाओं को लगता है कि घर की जिम्मेदारियां अब भी उन्हीं पर हैं, जबकि पति उनसे पहले की तरह देखभाल और ध्यान देने की उम्मीद करते हैं. इससे रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है. जापान में इस स्थिति को समझने के लिए ‘रिटायर्ड हसबैंड सिंड्रोम’ यानी रिटायरमेंट के बाद पति के साथ रहने से जुड़ा तनाव जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया जाता है.
तलाक के बाद गुजारा कैसे करेंगी महिलाएं?
लंबे समय तक घर संभालने वाली महिलाओं के लिए तलाक लेने में सबसे बड़ी परेशानी पैसों की हो सकती है. अगर महिला ने नौकरी नहीं की है या उसकी अपनी कमाई नहीं है, तो पति से अलग होकर खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है. जापान में पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव ने कुछ महिलाओं के लिए यह रास्ता आसान किया है. साल 2007 से तलाक लेने वाले पति-पत्नी के बीच शादी के दौरान जमा हुई रोजगार से जुड़ी पेंशन के बंटवारे का प्रावधान लागू हुआ. इससे कुछ महिलाओं को पति से अलग होने के बाद आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है.
यानी अब कुछ महिलाओं के लिए यह फैसला लेना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है कि वे अपनी बाकी जिंदगी किस तरह बिताना चाहती हैं. हालांकि, पेंशन में हिस्सा मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को तलाक के बाद पर्याप्त पैसा मिल ही जाएगा.
क्या शादी के इतने साल बाद भी नई शुरुआत संभव है?
जापान में ‘सिल्वर डिवोर्स’ की बढ़ती चर्चा यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या सिर्फ बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों के लिए शादी निभाते रहना जरूरी है. कई जोड़े सालों तक अपने बच्चों की परवरिश और घर चलाने में व्यस्त रहते हैं. इस दौरान उनके बीच भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है. बच्चे बड़े होकर अलग रहने लगते हैं, तो पति-पत्नी को अपने रिश्ते पर नए सिरे से सोचने का मौका मिलता है.
कुछ महिलाएं इस उम्र में भी अपनी पसंद, आजादी और सुकून को महत्व देना चाहती हैं. वे चाहती हैं कि जीवन के बचे हुए साल अपनी शर्तों पर बिताएं. वहीं, तलाक के बाद अकेलेपन, खर्च और भविष्य की सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी बनी रहती हैं. इसलिए ‘सिल्वर डिवोर्स’ को केवल तलाक की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि बदलती सोच और शादी से जुड़ी उम्मीदों के रूप में भी देखा जा रहा है. जापान में कुल तलाक के मामले कम होने के बावजूद लंबे समय से शादीशुदा जोड़ों के बीच अलगाव बढ़ना इसी बदलाव की ओर इशारा करता है.
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