बिना नहाए, पसीने की गंध के साथ डेट पर क्यों जा रहे Gen-Z! आया नया ट्रेंड

जेन-जी के कई युवा डेट पर जाने से पहले नहाना छोड़ रहे हैं. 'फेरोमोन-मैक्सिंग' नाम के इस ट्रेंड में उनका मानना है कि शरीर की नेचुरल गंध उन्हें ज्यादा आकर्षक बना सकती है. लेकिन सवाल है कि क्या साइंस भी इस दावे का समर्थन करती है?

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कुछ लोग डेट से पहले डियोडोरेंट लगाने से बचते है (Photo: AI generated) कुछ लोग डेट से पहले डियोडोरेंट लगाने से बचते है (Photo: AI generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST

अगर आप सोचते हैं कि डेट पर जाने से पहले अच्छी तरह तैयार होना, नहाना और डियोडोरेंट लगाना जरूरी है, तो जेन-जी का एक नया ट्रेंड आपको हैरान कर सकता है. सोशल मीडिया पर इन दिनों 'फेरोमोन-मैक्सिंग' नाम का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. इस ट्रेंड को फॉलो करने वाले कुछ युवा डेट पर जाने से पहले नहाने, डियोडोरेंट लगाने और यहां तक कि साफ कपड़े पहनने से भी बच रहे हैं.

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उनका मानना है कि शरीर की नेचुरल गंध यानी बॉडी ओडर उन्हें संभावित पार्टनर के लिए ज्यादा आकर्षक बना सकती है. टिकटॉक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस ट्रेंड से जुड़े वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं. यूएस और यूके के जेन-जी इस ट्रेंड पर टिकटॉक रील्स भी बना रहे हैं.

क्या है फेरोमोन-मैक्सिंग ट्रेंड?

फेरोमोन-मैक्सिंग का मूल विचार यह है कि इंसान की नेचुरल स्मेल को छिपाने के बजाय उसे बनाए रखा जाए. इस ट्रेंड को मानने वाले लोग दावा करते हैं कि शरीर से निकलने वाली नेचुरल महक दूसरे लोगों को आकर्षित कर सकती है.

इसी वजह से कुछ लोग डेट से पहले डियोडोरेंट लगाने से बचते हैं. कुछ लोग तो कई-कई हफ्तों तक नहाना भी छोड़ देते हैं. कई लोग पसीने से लथपथ शर्ट पहनकर अपने पार्टनर से मिलने जा रहे हैं. उनका मानना है कि इससे बॉडी की नेचुरल स्मेल बनी रहेगी और पार्टनर आकर्षित होगा.

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वाइस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ रही है, जो मानते हैं कि आकर्षण को बढ़ाने के लिए शरीर की प्राकृतिक गंध को बनाए रखना फायदेमंद हो सकता है.

यह ट्रेंड 'लुक्समैक्सिंग' नाम की एक बड़ी ऑनलाइन संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें लोग अपनी आकर्षकता बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. इनमें कुछ तरीके सामान्य होते हैं, जबकि कुछ काफी अजीब और अतिवादी भी माने जाते हैं.

क्या इंसानों में भी होते हैं फेरोमोन?

फेरोमोन ऐसे रासायनिक संकेत होते हैं, जिनका इस्तेमाल कई जानवर अपने व्यवहार और प्रजनन से जुड़े संदेश देने के लिए करते हैं. जानवरों की दुनिया में इनका प्रभाव अच्छी तरह दर्ज किया गया है. लेकिन जब बात इंसानों की आती है, तो तस्वीर उतनी साफ नहीं है.

वैज्ञानिकों ने कई दशकों से यह समझने की कोशिश की है कि क्या इंसानों में भी ऐसे फेरोमोन होते हैं, जो आकर्षण को प्रभावित करते हैं. कुछ रिसर्च में पाया गया कि लोग अनजाने में कुछ खास प्राकृतिक गंधों की ओर आकर्षित हो सकते हैं. मशहूर 'स्वेटी टी-शर्ट एक्सपेरिमेंट्स' में भी ऐसे संकेत मिले थे कि शरीर की गंध और आकर्षण के बीच कोई संबंध हो सकता है. हालांकि, अब तक वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि इंसानों में जानवरों की तरह काम करने वाले फेरोमोन मौजूद हैं.

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क्या न नहाने से बढ़ जाएगा आकर्षण?

यही वह जगह है, जहां सोशल मीडिया और विज्ञान के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है.विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर की गंध और आकर्षण के बीच संबंध अगर मौजूद भी है, तो वह बेहद जटिल और सूक्ष्म है. इसे सिर्फ नहाना छोड़कर या डियोडोरेंट न लगाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता.

शरीर की गंध कई चीजों पर निर्भर करती है. इसमें व्यक्ति की जेनेटिक्स, खानपान, हार्मोन, त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और व्यक्तिगत साफ-सफाई की आदतें शामिल हैं. यानी सिर्फ शॉवर छोड़ देने से किसी व्यक्ति का आकर्षण बढ़ जाएगा, ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण फिलहाल मौजूद नहीं है.

सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

विशेषज्ञ मानते हैं कि फेरोमोन-मैक्सिंग को अकेले नहीं देखा जा सकता. यह 'मैक्सिंग कल्चर' का हिस्सा है, जिसमें लोग अपनी जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं को 'ऑप्टिमाइज' करने की कोशिश करते हैं.

ऑनलाइन समुदायों में यह विचार लोकप्रिय हो रहा है कि आकर्षण, रिश्ते और डेटिंग को कुछ खास तरीकों से 'हैक' किया जा सकता है. कई युवा पुरुषों के लिए यह ट्रेंड डेटिंग, आत्मविश्वास और पहचान से जुड़ी चिंताओं का भी प्रतिबिंब माना जा रहा है.

इंटरनेट पर मौजूद कुछ समूह यह दावा करते हैं कि रिश्तों में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को अपनी हर विशेषता को अधिकतम स्तर तक ले जाना चाहिए, चाहे वह लुक्स हों, फिटनेस हो, आत्मविश्वास हो या फिर शरीर की गंध.

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क्या कहती है साइंस?

फिलहाल वैज्ञानिक समुदाय में इस बात पर सहमति नहीं है कि इंसानों में ऐसे फेरोमोन मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर किसी को रोमांटिक या यौन रूप से आकर्षित कर सकते हैं.

कुछ शोध यह जरूर संकेत देते हैं कि प्राकृतिक गंध आकर्षण में एक छोटी भूमिका निभा सकती है, लेकिन यह प्रभाव इतना सरल नहीं है कि उसे नहाना छोड़कर बढ़ाया जा सके.

यानी डेट पर जाने से पहले नहाना छोड़ देना आपको ज्यादा आकर्षक बना देगा, इस दावे के पीछे फिलहाल कोई मजबूत वैज्ञानिक आधार नहीं है.

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