Google की 9.3 करोड़ रुपये की नौकरी छोड़ने वाले यूसुफ इमरान क्यों हो रहे वायरल?

ज्यादातर लोग Google जैसी कंपनी में करोड़ों रुपये के पैकेज वाली नौकरी पाने का सपना देखते हैं. लेकिन अमेरिका में रहने वाले यूसुफ इमरान ने ऐसा सपना छोड़कर अपना रास्ता चुना. उनका कहना है कि AI की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही थी कि उन्हें लगा अगर अभी कदम नहीं उठाया तो शायद जिंदगी का सबसे बड़ा मौका हाथ से निकल जाएगा.

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41 साल के यूसुफ इमरान साल 2020 में गूगल से जुड़े थे (Photo:X/@mangosteenceo) 41 साल के यूसुफ इमरान साल 2020 में गूगल से जुड़े थे (Photo:X/@mangosteenceo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:38 AM IST

AI की वजह से नौकरियां जाने की खबरें आपने खूब पढ़ी होंगी, लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने AI की वजह से अपनी करोड़ों की नौकरी खुद छोड़ दी. गूगल के पूर्व अकाउंट एग्जीक्यूटिव यूसुफ इमरान ने बिजनेस इनसाइडर में प्रकाशित अपने लेख में बताया कि आखिर क्यों उन्होंने करीब 9.3 करोड़ रुपये सालाना कमाई वाली नौकरी छोड़कर खुद का AI स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया.

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करोड़ों की कमाई, फिर भी मन नहीं लगा

41 साल के यूसुफ इमरान साल 2020 में गूगल से जुड़े थे. उनका काम कंपनियों को गूगल के AI और मशीन लर्निंग प्रोडक्ट्स अपनाने में मदद करना था. उनकी बेस सैलरी करीब 1.6 करोड़ रुपये थी, लेकिन इंसेंटिव और कमीशन मिलाकर 2025 में उनकी कुल कमाई करीब 9.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.इतनी बड़ी कमाई के बावजूद उन्हें लगने लगा कि AI इंडस्ट्री में जो बदलाव हो रहा है, उसका हिस्सा बनने के लिए सिर्फ जॉब करना काफी नहीं है.

AI बूम ने पैदा किया FOMO

यूसुफ बताते हैं कि OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों की तेजी से बढ़ती वैल्यू उन्हें लगातार सोचने पर मजबूर कर रही थी. इन कंपनियों के शुरुआती कर्मचारियों को मिलने वाले शेयर भविष्य में बड़ी संपत्ति बन सकते हैं.उनके मन में सवाल उठने लगा कि अगर AI के इस दौर में असली फायदा इक्विटी यानी कंपनी में हिस्सेदारी से मिलने वाला है, तो वह किसी और की कंपनी में हिस्सेदारी क्यों बढ़ाएं. बेहतर होगा कि अपनी कंपनी बनाई जाए.यहीं से उनके भीतर FOMO (Fear of Missing Out) यानी मौका छूट जाने का डर पैदा हुआ.

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बांग्लादेश से अमेरिका... फिर गूगल तक का सफर

यूसुफ का परिवार तब बांग्लादेश से न्यूयॉर्क आया था, जब वह सिर्फ पांच साल के थे. वह कहते हैं कि प्रवासी परिवार में पले-बढ़े होने की वजह से बचपन से ही मेहनत उनकी आदत बन गई.करीब 15 साल तक सेल्स की दुनिया में काम करने के बाद उन्होंने गूगल जॉइन किया. उनके मुताबिक, सेल्स ऐसा पेशा है जहां कई बार आपकी प्रतिभा आपकी डिग्री से ज्यादा मायने रखती है.

दिन में Google, रात में AI

गूगल में काम करने के दौरान AI सिर्फ उनकी नौकरी का हिस्सा नहीं रहा. ऑफिस के बाद भी वह देर रात तक ChatGPT, Claude और Gemini जैसे AI टूल्स के साथ प्रयोग करते थे.शुरुआत छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स से हुई. वह खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं हैं, इसलिए कई AI टूल्स की मदद लेकर धीरे-धीरे ऐप बनाना सीखते गए.करीब डेढ़ साल में उन्होंने कई छोटे AI प्रोडक्ट तैयार किए. यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि अब अपनी कंपनी शुरू करने का समय आ गया है.

गूगल की छंटनी ने भी बदली सोच

यूसुफ बताते हैं कि गूगल में हुई छंटनी ने उनके फैसले को और मजबूत कर दिया.उन्होंने देखा कि सिर्फ कमजोर प्रदर्शन करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि बेहद प्रतिभाशाली कर्मचारी भी नौकरी खो रहे थे. इससे उन्हें समझ आया कि आज के दौर में कोई भी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.उन्हें लगा कि अगर जोखिम लेना ही है, तो वह अपने सपने के लिए लिया जाए.

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नौकरी छोड़ने से पहले बनाई पूरी योजना

यूसुफ कहते हैं कि उन्होंने भावनाओं में आकर इस्तीफा नहीं दिया.उन्होंने पहले अपने स्टार्टअप के लिए दो साल का खर्च अलग रखा. इसके लिए करीब दो लाख डॉलर की व्यवस्था की. साथ ही घर के खर्च, मॉर्गेज और दूसरी जरूरतों के लिए भी लगभग डेढ़ लाख डॉलर बचाकर रखे.

उनका उद्देश्य था कि शुरुआत में किसी निवेशक से पैसा न लेना पड़े, क्योंकि ऐसा करने पर कंपनी की हिस्सेदारी कम हो जाती है.

ब क्या कर रही है उनकी कंपनी?

अप्रैल 2026 में गूगल छोड़ने के बाद उन्होंने Mangosteen Studio नाम से AI प्रोडक्ट लैब शुरू की.यह कंपनी ऐसे AI टूल्स बना रही है, जो सेल्स प्रोफेशनल्स और अकाउंट एग्जीक्यूटिव्स के काम को आसान बना सकें. यूसुफ का कहना है कि उन्होंने 20 साल तक सेल्स की दुनिया में काम किया है, इसलिए वह वही टूल बना रहे हैं, जिनकी कमी उन्हें खुद महसूस होती थी.

फिलहाल वह छोटी टीम के साथ काम कर रहे हैं और कई सेल्स प्रोफेशनल्स उनकी AI सर्विस का मुफ्त इस्तेमाल भी कर चुके हैं.

AI ने बदल दी बिजनेस की तस्वीर

यूसुफ का मानना है कि AI ने बिजनेस शुरू करना पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है.उनके मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के पास किसी क्षेत्र का अच्छा अनुभव है, तो जरूरी नहीं कि वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो. AI की मदद से वह अपनी जानकारी को प्रोडक्ट में बदल सकता है.वह कहते हैं कि आज सबसे बड़ी ताकत सिर्फ कोडिंग नहीं, बल्कि किसी समस्या को गहराई से समझना है.

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यूसुफ मानते हैं कि गूगल छोड़ना आसान फैसला नहीं था. वहां शानदार टीम, अत्याधुनिक AI प्रोजेक्ट्स और बेहतरीन सुविधाएं थीं. लेकिन उन्हें लगा कि अगर अभी जोखिम नहीं लिया, तो शायद पूरी जिंदगी यह अफसोस रहेगा कि उन्होंने कोशिश ही नहीं की. उन्होंने कहा कि  मैंने सिर्फ नौकरी नहीं छोड़ी, बल्कि अपने अनुभव और भरोसे पर दांव लगाया है.

यूसुफ इमरान की कहानी बताती है कि AI सिर्फ नौकरियां बदल नहीं रहा, बल्कि लोगों को अपनी कंपनी शुरू करने और नए अवसर तलाशने का हौसला भी दे रहा है.

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