ताबूत से आ रही थी गुनगुनाने की आवाज... मरने के 2 दिन बाद जग गई थी महिला!

दो दिन पहले जिस महिला की मौत हो चुकी थी. वह अचानक जिंदा हो गई. रिश्तेदारों ने उसे ताबूत से बाहर निकाला. कुछ घंटे तक फिर से उसकी सांसें चलती रही. एक दिन बाद फिर से उसकी मौत हो गई.

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मरने के बाद ताबूत में बंद महिला फिर से जग गई (Photo - AI Generated) मरने के बाद ताबूत में बंद महिला फिर से जग गई (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:40 AM IST

किसी परिवार को लगता है कि उनके घर के बुजुर्ग की मौत हो गई है. शव को ताबूत में रख दिया जाता है और अंतिम संस्कार की तैयारी होने लगती है. लेकिन अचानक उसी ताबूत के अंदर से गुनगुनाने जैसी आवाज आने लगे. परिवार ताबूत खोलता है तो महिला की सांसें चल रही होती हैं. वह आंखें भी खोलने लगती है. चीन में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है.

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक,  यह मामला उत्तरी चीन के हेबेई प्रांत का बताया जा रहा है. यहां 70 साल से ज्यादा उम्र की एक महिला को परिवार ने मृत मान लिया था. इसके बाद उनके शव को एक रेफ्रिजरेटेड ताबूत में रख दिया गया. लेकिन करीब एक दिन बाद ताबूत के अंदर से हल्की-हल्की गुनगुनाने की आवाज सुनाई दी. परिवार ने तुरंत ताबूत खोला तो महिला में जीवन के संकेत दिखाई दिए.

लंबे समय से बीमार थीं महिला
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुजुर्ग महिला कई साल से सेरेब्रल थ्रोम्बोसिस यानी दिमाग की नस में खून का थक्का जमने की बीमारी से जूझ रही थीं. इसके साथ ही उन्हें कैंसर भी था.

जब डॉक्टरों ने बताया कि कैंसर का इलाज अब संभव नहीं है, तो परिवार उन्हें घर ले आया था. यहां वह जिंदगी के आखिरी दौर में थीं और परिवार उनकी देखभाल कर रहा था.

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8 सितंबर को नहीं दिखे थे जिंदगी के संकेत
बताया गया कि 8 सितंबर को परिवार के लोगों ने महिला में जिंदगी के कोई साफ संकेत नहीं देखे. उन्हें लगा कि उनकी मौत हो चुकी है.

परिवार के कुछ सदस्य बाहर थे और उनके लौटने का इंतजार किया जा रहा था, ताकि सभी लोग आखिरी बार महिला को देख सकें. इसी वजह से शव को सुरक्षित रखने के लिए महिला को रेफ्रिजरेटेड ताबूत में रख दिया गया. लेकिन अगले दिन यानी 9 सितंबर की शाम कुछ ऐसा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

ताबूत के अंदर से आई गुनगुनाने की आवाज
महिला की बहू ने ताबूत के अंदर से हल्की सी गुनगुनाने जैसी आवाज सुनी. आवाज सुनकर परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत ताबूत खोला. इसके बाद उन्हें पता चला कि महिला पूरी तरह मृत नहीं थीं. उनमें जिंदगी के संकेत मौजूद थे.

परिवार ने उन्हें ताबूत से बाहर निकाला. 11 सितंबर को जब परिवार के दूसरे सदस्य वहां पहुंचे, तब महिला ने आंखें भी खोलीं और उन्हें होश आने लगा था. हालांकि उनकी हालत बेहद गंभीर थी. वह न तो ठीक से खा पा रही थीं और न ही पानी पी पा रही थीं.

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा यह है कि महिला के अंदर जिंदगी के संकेत मिलने के बाद भी उनकी हालत नहीं सुधरी. 11 सितंबर की रात महिला की फिर मौत हो गई. इसके बाद 13 सितंबर को परिवार की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया.

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यानी जिस महिला को परिवार 8 सितंबर को मृत मान चुका था, वह कुछ समय बाद ताबूत के अंदर से आवाज देने लगीं और फिर दोबारा जिंदगी के संकेत दिखे. हालांकि इसके करीब दो दिन बाद उनकी वास्तव में मौत हो गई.

इस घटना के सामने आने के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला 'अपैरेंट डेथ' यानी ऐसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है, जिसमें शरीर की गतिविधियां बेहद धीमी हो जाती हैं और इंसान को मृत समझना आसान हो जाता है.

ऐसी स्थिति में सांस और दिल की धड़कन इतनी धीमी हो सकती है कि उन्हें सामान्य तरीके से पहचानना बेहद मुश्किल हो. शरीर का मेटाबॉलिज्म भी काफी धीमा हो सकता है और व्यक्ति गहरी बेहोशी या कोमा जैसी अवस्था में जा सकता है.

हालांकि किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर तय मेडिकल मानकों का इस्तेमाल करते हैं. सिर्फ सांस या धड़कन का दिखाई न देना ही हमेशा मौत की अंतिम पुष्टि नहीं माना जाता.

रेफ्रिजरेटेड ताबूत ने निभाई अहम भूमिका?
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने ताबूत में डीप फ्रीजिंग के बजाय रेफ्रिजरेशन का इस्तेमाल किया था. इसका मकसद शव को ठंडा रखना था, ताकि दूसरे रिश्तेदारों के आने तक उसे सुरक्षित रखा जा सके.

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बताया गया कि महिला बेहद कम शारीरिक गतिविधि वाली अवस्था में थीं. ऐसे में ताबूत के अंदर का ठंडा वातावरण उनकी शारीरिक गतिविधियों को और धीमा कर सकता था. इसी वजह से बाद में उनमें जिंदगी के संकेत दिखाई देने की संभावना जताई गई.

सोशल मीडिया पर भी हुई चर्चा
इस अजीबोगरीब घटना ने चीन के सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी. कुछ लोगों ने कहा कि परिवार को महिला को ताबूत में रखने से पहले अस्पताल से आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्र लेना चाहिए था.

वहीं कुछ लोगों ने पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रथाओं का जिक्र किया. उनका कहना था कि पुराने समय में कई जगहों पर मृत व्यक्ति को अंतिम संस्कार से पहले कुछ समय तक घर में रखा जाता था. इससे परिवार के लोगों को अंतिम विदाई देने का समय मिल जाता था.

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि कितनी सावधानी से की जानी चाहिए. खासकर उन मरीजों में, जिनकी सांस और दिल की धड़कन बेहद धीमी हो चुकी हो.

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