नौकरी गई तो 2 साल के बेटे को लेकर ऑफिस पहुंचा पिता, फिर जो हुआ उसने बदल दी सोच

बेंगलुरु के एक शख्स की नौकरी चली गई थी. नौकरी जाने के बाद उसे कंपनी का लैपटॉप लौटाने ऑफिस जाना पड़ा. उस समय उसकी पत्नी काम पर थी और 2 साल के बच्चे को संभालने वाला कोई नहीं था, इसलिए वह बेटे को साथ लेकर ऑफिस पहुंच गया.

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इस घटना के बाद उस शख्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपना अनुभव शेयर किया. ( Photo: ITG) इस घटना के बाद उस शख्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपना अनुभव शेयर किया. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

नौकरी जाना किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं होता. खासकर तब, जब घर चलाने की जिम्मेदारी हो और परिवार आपकी कमाई पर निर्भर हो. ऐसे समय में इंसान को नौकरी जाने का दुख तो होता ही है, साथ ही आगे की जिंदगी को लेकर चिंता भी सताने लगती है. इसी बीच बेंगलुरु के एक शख्स ने नौकरी जाने के बाद अपने साथ हुई एक घटना सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसने कॉरपोरेट दुनिया और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है. शख्स के मुताबिक, हाल ही में उसकी नौकरी चली गई थी.

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नौकरी खत्म होने के बाद उसे ऑफिस जाकर कंपनी का लैपटॉप वापस करना था और लास्ट फॉर्मेलिटी पूरी करनी थी. लेकिन उस दिन उसके सामने एक अलग परेशानी थी. उसकी पत्नी भी काम पर गई हुई थी और घर पर उनके 2 साल के बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं था. ऐसे में उसके पास अपने छोटे बेटे को साथ लेकर ऑफिस जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. वह अपने बेटे को लेकर कंपनी पहुंच गया. उसका कहना था कि उसे सिर्फ कुछ मिनट के लिए ऑफिस जाना था और लैपटॉप जमा करके वापस आ जाना था. 

ऑफिस के गेट पर रोक दिया गया बेटा
शख्स के मुताबिक, जब वह अपने 2 साल के बेटे के साथ ऑफिस पहुंचा तो उसे बताया गया कि बच्चे को ऑफिस के अंदर जाने की अनुमति नहीं है. यानी पिता को तो अंदर जाकर अपना लैपटॉप जमा करना था, लेकिन उसका छोटा बच्चा बाहर ही रहेगा. उसने बताया कि वह कंपनी के नियमों को समझता है और यह भी मानता है कि हर ऑफिस में सुरक्षा से जुड़े नियम हो सकते हैं. लेकिन उस समय वह पहले ही नौकरी जाने के तनाव से गुजर रहा था. ऐसे में बच्चे को अंदर न ले जाने की स्थिति उसके लिए काफी मुश्किल बन गई. आखिरकार उसने अपने एक सहकर्मी से मदद मांगी. सहकर्मी ने करीब 15 मिनट तक उसके बच्चे को संभाला और तब जाकर वह ऑफिस के अंदर जाकर अपना लैपटॉप जमा कर पाया.

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इस घटना के बाद उस शख्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपना अनुभव शेयर किया. उसने कहा कि इस घटना ने उसे एक जरूरी बात समझा दी है. उसके मुताबिक, कर्मचारी अक्सर अपनी कंपनी को परिवार जैसा समझने लगते हैं. लोग नौकरी के लिए लंबे समय तक काम करते हैं. कई बार देर रात तक ऑफिस में रहते हैं, छुट्टियों में भी काम करते हैं और परिवार के साथ समय कम कर देते हैं. उन्हें लगता है कि कंपनी भी उनके साथ उसी तरह खड़ी रहेगी. लेकिन नौकरी जाने के बाद कई बार तस्वीर अलग नजर आती है. उस शख्स ने अपनी पोस्ट में इसी बात को लेकर लोगों को सलाह दी कि नौकरी को अपनी पूरी जिंदगी न बना लें. परिवार, दोस्त और ऑफिस के बाहर की अपनी जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत दें. 

क्या कंपनी गलत थी?
इस मामले में उस व्यक्ति ने यह साफ किया कि वह कंपनी पर नियम तोड़ने का आरोप नहीं लगा रहा था. उसका मुद्दा कंपनी के नियमों से ज्यादा उस परिस्थिति को लेकर था, जिसमें वह खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा था. एक तरफ उसकी नौकरी जा चुकी थी. दूसरी तरफ उसे कंपनी का लैपटॉप लौटाने के लिए ऑफिस आना पड़ा और बच्चे की देखभाल के लिए उसके पास कोई व्यवस्था नहीं थी. यही वजह है कि उसकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई.

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पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने कॉरपोरेट कंपनियों के नियमों और कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल उठाए. कुछ लोगों का कहना था कि अगर किसी कर्मचारी की नौकरी खत्म हो चुकी है, तो कंपनी लैपटॉप वापस लेने के लिए कुरियर की सुविधा भी दे सकती है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ऑफिस के सुरक्षा नियम अपनी जगह सही हो सकते हैं और हर कंपनी में बच्चों को अंदर ले जाने की अनुमति देना संभव नहीं है.

लेकिन इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है. क्या नौकरी के लिए हम अपनी निजी जिंदगी और परिवार को जरूरत से ज्यादा पीछे छोड़ देते हैं? शायद इस शख्स की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि करियर जरूरी है, पैसा जरूरी है और नौकरी भी जरूरी है, लेकिन परिवार और अपनी निजी जिंदगी को पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं है. क्योंकि कंपनी में आपकी भूमिका बदल सकती है, नौकरी जा सकती है, लेकिन परिवार के साथ बिताया समय वापस नहीं आता. 

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