जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष पिछले कई दिनों से संसद में हंगामा किए हुए है. राहुल गांधी समेत विपक्षी नेता गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की मांग कर रहे थे. लेकिन झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई ने पूरे नैरेटिव को पलट दिया. अब भाजपा विपक्ष के दोहरे मापदंड पर सवाल उठा रही है.
मॉनसून सत्र गतिरोध का शिकार बना हुआ है. हंगामे के बीच अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं. यदि वे जवाब देते हैं तो क्या कहेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इसी कल्पना को ‘Grok AI’ ने अमित शाह की शैली में शब्द दिए हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय,
मैं आज इस गरिमामय सदन में खड़ा हुआ हूं, न तो किसी दबाव में, न ही किसी आरोप की आंच से घबराकर. विपक्ष तीन हफ्तों से चिल्ला रहा था कि अमित शाह सदन में आएं, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई का जवाब दें. मैं आ गया हूं. और आज मैं केवल जवाब नहीं दूंगा, बल्कि इनके दोहरे मापदंड, इनकी झूठी नैतिकता और इनकी राजनीतिक दोगली चाल को इस सदन और देश के सामने बेनकाब करूंगा.
माननीय अध्यक्ष महोदय, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर क्या हुआ? दिल्ली पुलिस के पास स्पष्ट आदेश था. संसद क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू थी. पूरा इलाका संवेदनशील था, मॉनसून सत्र चल रहा था. प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की जगह बैरिकेड तोड़ने, संसद की ओर मार्च करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का रास्ता चुना. नतीजा? 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए. सैकड़ों बैरिकेड, बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट, शील्ड और सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए. फेस रिकग्निशन और जांच में पता चला कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों के गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड थे. हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, आर्म्स एक्ट जैसे मामले. क्या विपक्ष इन्हें भी “छात्र” बताएगा? क्या संसद की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर कार्रवाई करना “ज्यादती” है?
राहुल गांधी जी, आपने सदन में और बाहर खड़े होकर कहा. अमित शाह ने गोली चलाने का आदेश दिया, पैलेट गन चलाई, लाठी में कीलें थीं. मैं पूछता हूं कि आपके पास एक भी दस्तावेज है? एक भी आदेश की कॉपी है? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, यह सही है. लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य है, न कि किसी एक व्यक्ति का मनमाना आदेश. अगर आपका आरोप सच होता तो आपने कोर्ट में क्यों नहीं पेश किया? सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों नहीं डाली? क्योंकि झूठ का कोई सबूत नहीं होता. आपने कहा, या तो वे दोषी हैं या अक्षम. मैं कहता हूं कि आप दोनों हैं. दोषी इसलिए कि आपने बिना सबूत के देश के गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाया, और अक्षम इसलिए कि आपके नेतृत्व में विपक्ष सिर्फ हंगामा करना जानता है, तथ्य नहीं.
अब आइये झारखंड. माननीय अध्यक्ष महोदय, झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार है. हेमंत सोरेन जी मुख्यमंत्री, कांग्रेस सहयोगी. वहां छात्र JPSC-JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. 10 अगस्त को उन्होंने विधानसभा की ओर मार्च निकाला. पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. छात्र घायल हुए, पुलिसकर्मी भी घायल हुए. बैरिकेड तोड़े गए. राहुल गांधी जी, आपने तुरंत बयान दिया. शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हिंसा नहीं होनी चाहिए. बहुत अच्छा. तो जंतर-मंतर पर गलत था तो रांची में सही कैसे? दिल्ली में दिल्ली पुलिस “मोदी की पुलिस” थी, झारखंड में हेमंत सोरेन की पुलिस “लोकतंत्र की पुलिस” हो गई? यही है आपका दोहरा चरित्र.
आप पश्चिम बंगाल में क्या करते रहे हैं? जब वहां प्रदर्शन होते थे तो गुंडा एक्ट लगा दिया जाता था, गिरफ्तारियां होती थीं. तमिलनाडु में स्टरलाइट जैसे आंदोलनों में गोली चली. केरल और कर्नाटक में आपके सहयोगी सरकारों ने भी अवैध जमावड़ों पर कार्रवाई की, केस दर्ज किए. जब आप दिल्ली में “लोकतंत्र खतरे में” का रोना रोते हैं तो आपके राज्यों में वही कार्रवाई “कानून व्यवस्था” बन जाती है. यह दोहरा मापदंड देश को स्वीकार नहीं है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, विपक्ष छात्रों की चिंता का दिखावा करता है. सच्चाई यह है कि जब NEET पेपर लीक का मुद्दा उठा तो केंद्र सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया. शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया. परीक्षा व्यवस्था सुधारने के ठोस कदम उठाए गए. बातचीत हुई, आश्वासन दिए गए. लेकिन विपक्ष को छात्रों की समस्या से मतलब नहीं. उन्हें सिर्फ राजनीतिक पूंजी चाहिए. वे चाहते हैं कि दिल्ली में थोड़ी भी कार्रवाई हो तो अमित शाह इस्तीफा दे दें, लेकिन झारखंड, बंगाल, केरल में वही कार्रवाई हो तो चुप रहें.
राहुल गांधी जी, आपने कहा, अमित शाह डरते हैं, सदन में नहीं आते. मैं यहां खड़ा हूं. आप बताइए, आपके पिता की सरकार में, आपकी दादी की इमरजेंसी में, आपके पार्टी के राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर क्या हुआ? इतिहास गवाह है. हमने कभी लोकतंत्र को कुचला नहीं. हमने धारा 370 हटाई, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस अपनाया, कानून व्यवस्था मजबूत की. दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा सुनिश्चित की, संपत्ति की रक्षा की, अपराधियों को चिन्हित किया. अगर कोई हिंसा करता है तो कार्रवाई होगी. चाहे वह दिल्ली हो या रांची.
आप कहते हैं कि छात्र आंदोलन को कुचला गया. मैं पूछता हूं- क्या बैरिकेड तोड़ना, पुलिस पर हमला करना, संसद की ओर अवैध मार्च करना लोकतांत्रिक अधिकार है? नहीं. लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने का नहीं. झारखंड में भी वही सिद्धांत लागू होता है. अगर वहां की कार्रवाई गलत है तो आप अपने सहयोगी मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगिए. नहीं मांगेंगे, क्योंकि वोट बैंक और गठबंधन आपके लिए छात्रों से ज्यादा महत्वपूर्ण है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं स्पष्ट कहता हूं कि केंद्र सरकार किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान करती है. लेकिन अगर कोई हिंसा का रास्ता अपनाता है, अपराधियों को ढाल बनाता है, तो पुलिस अपना कर्तव्य निभाएगी. विपक्ष के सभी आरोप, ज्यादती, आदेश, अक्षमता झूठे साबित हो चुके हैं. तथ्य उनके खिलाफ हैं. झारखंड की घटना ने उनके नैतिक आधार को ध्वस्त कर दिया है. अब वे राम मंदिर की चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर भाग रहे हैं, क्योंकि जंतर-मंतर वाला नैरेटिव टूट चुका है. देश देख रहा है. युवा देख रहे हैं. जो विपक्ष दिल्ली में रोता है और अपने राज्यों में चुप रहता है, वह युवाओं का विश्वास नहीं जीत सकता. हम कानून के साथ खड़े हैं, व्यवस्था के साथ खड़े हैं, और देश के साथ खड़े हैं. विपक्ष चाहे जितना शोर करे, तथ्य नहीं बदलेंगे.
जय हिंद.
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