चार पत्नियां, 58 बच्चे और गरीबी से जूझता परिवार, अफगान शख्स की कहानी चौंका देगी

अफगानिस्तान के मोहम्मद सादिक की कहानी हैरान करने वाली है. चार पत्नियों और 58 जीवित बच्चों वाले सादिक के परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब है. वह एक कार डीलरशिप पर काम करता है, लेकिन उसकी कमाई से परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं.

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हालात ऐसे हैं कि कई बार बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ता है. ( Photo: ITG) हालात ऐसे हैं कि कई बार बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ता है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:32 AM IST

अफगानिस्तान से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बड़े परिवार और गरीबी के बीच की मुश्किलों को दिखाती है. यहां मोहम्मद सादिक नाम का एक शख्स अपने 58 जीवित बच्चों और चार पत्नियों के साथ रहता है. उसके कुल 70 से ज्यादा बच्चे पैदा हुए, लेकिन उनमें से कई की मौत हो चुकी है. परिवार की हालत ऐसी है कि कई बार बच्चों को भूखे पेट सोना पड़ता है. हैरानी की बात यह है कि सादिक को अपने सभी बच्चों के नाम तक याद नहीं रहते.

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बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सादिक अफगानिस्तान के उरुज़गान प्रांत में रहता है. उसके परिवार में खाने-पीने से लेकर कपड़ों और दूसरी जरूरी चीजों तक की कमी है. इतने बड़े परिवार की जिम्मेदारी उठाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो गया है, लेकिन परिवार का खर्च चलाने के लिए उसके पास कमाई का सीमित जरिया ही है.

बच्चों के नाम तक याद नहीं रहते
सादिक ने बताया कि बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उसे सभी के नाम याद नहीं रहते. वह ज्यादातर बच्चों को उनके नाम से बुलाने के बजाय 'बेटा' या 'बच्चा' कहकर बुलाता है. उसका सबसे छोटा बच्चा भी महज तीन महीने का बताया गया है. यह बात सिर्फ हैरान करने वाली नहीं, बल्कि इस परिवार की मुश्किलों की ओर भी ध्यान खींचती है. जब घर में बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही चुनौती बन जाए, तो उनके खाने, कपड़ों और पढ़ाई का इंतजाम करना कितना कठिन होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

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एक कार बेचने पर मिलते हैं करीब 1,500 रुपये
मोहम्मद सादिक एक कार डीलरशिप पर काम करता है. उसे हर कार बेचने पर 1,000 अफगानी मिलते हैं, जो भारतीय रुपये में करीब 1,500 रुपये होते हैं. यही कमाई इतने बड़े परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी नहीं पड़ती. परिवार के रहने की हालत भी बेहद खराब है. वे मिट्टी से बने घर में रहते हैं, जहां कमरों में ठीक से दरवाजे और खिड़कियां तक नहीं हैं. कमरों के बीच पर्दे लगे हुए हैं. लकड़ी खरीदने के पैसे नहीं होने पर परिवार को खाना पकाने के लिए कभी-कभी कागज जलाने पड़ते हैं. कई बच्चे बिना जूते-चप्पल के रहते हैं और कभी-कभी उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है.

चार पत्नियां, कम उम्र में हुई थीं शादियां
सादिक की चार पत्नियां हैं. उसने बताया कि उसकी सभी पत्नियों की शादी कम उम्र में हुई थी. उसके मुताबिक, बच्चों की देखभाल का अनुभव कम होने के कारण भी परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उसने अपने कुछ बच्चों की कम उम्र में मौत होने की बात भी कही. हालांकि, बच्चों की मौत के पीछे की वजहों को लेकर उसके दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

अब खुद मान रहा है कि जिम्मेदारी नहीं निभा पाया
सादिक ने माना कि वह अपने परिवार की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहा है. उसने यह भी कहा कि अगर उसे पहले पता होता कि इतने बच्चों के लिए खाना जुटाना तक मुश्किल हो जाएगा, तो शायद वह इतने बच्चे पैदा नहीं करता. हालांकि, परिवार की आर्थिक हालत खराब होने के बावजूद उसके यहां बच्चों का जन्म जारी रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इस बारे में कोई साफ वजह नहीं बताई कि वह परिवार बढ़ाना क्यों जारी रखे हुए है.

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उसकी कहानी अफगानिस्तान में गरीबी और कम उम्र में शादी जैसी गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान खींचती है. इस परिवार के हालात बताते हैं कि बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी परवरिश, शिक्षा, भोजन और दूसरी बुनियादी जरूरतों की जिम्मेदारी भी बढ़ती है. अगर परिवार के पास पर्याप्त कमाई और जरूरी सुविधाएं न हों, तो इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की जिंदगी पर पड़ता है.

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