Makemytrip पर होटल बुक किया, पहुंचे तो था ही नहीं! कार में गुजारी रात, रिफंड मांगा तो...

MakeMyTrip के जरिए कश्मीर में बुक किए गए दो होटल मौके पर गायब मिले, जिसके कारण पीड़ित परिवार को -4°C में कार में रात बितानी पड़ी. लापरवाही पर एक्शन लेते हुए गुरदासपुर कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी पर ₹48,775 का जुर्माना लगाया है.

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एक परिवार ने जो होटल बुक किए थे उनका कोई नाम-ओ-निशां नहीं मिला. (Photo: ITG) एक परिवार ने जो होटल बुक किए थे उनका कोई नाम-ओ-निशां नहीं मिला. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

ऑनलाइन होटल बुक करते समय लोग यही सोचते हैं कि होटल की फोटो, लोकेशन और बुकिंग की जानकारी सही होगी. लेकिन अगर आप पैसे देकर जिस होटल में ठहरने पहुंचें और वहां होटल ही मौजूद न हो, तो क्या होगा? शायद ये आपकी जिंदगी के सबसे बड़े शॉक्स में से एक होगा. ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला पंजाब के गुरदासपुर से सामने आया है. एक परिवार ने MakeMyTrip के जरिए कश्मीर में दो होटल बुक किए थे, लेकिन श्रीनगर पहुंचने पर पहला होटल तय जगह पर मिला ही नहीं. इसके बाद जब परिवार गुलमर्ग पहुंचा तो दूसरा होटल भी मौके पर मौजूद नहीं था. हालात इतने खराब हो गए कि परिवार को -4 डिग्री टेंपरेचर में अपनी कार के अंदर पूरी रात गुजारनी पड़ी.

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मामला जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा,  जिसके बाद MakeMyTrip पर जुर्माना लगाया गया. अब कंपनी को परेशान हुए परिवार को कुल 48,775 रुपये देने का आदेश दिया गया है. इसमें बुकिंग की रकम का रिफंड, ब्याज, मानसिक और शारीरिक परेशानी का मुआवजा और मुकदमे का खर्च शामिल है.

परिवार ने पहले से कर रखी थी दोनों होटलों की बुकिंग
आयोग के आदेश के मुताबिक, राजेश चौहान अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कश्मीर घूमने गए थे. उन्होंने 27 से 28 दिसंबर 2025 के लिए श्रीनगर के Hotel Heritage Rose Inn में फैमिली रूम बुक किया था. इसके लिए उन्होंने 5,788 रुपये की पेमेंट की थी. इसके अगले दिन यानी 28 से 29 दिसंबर के लिए गुलमर्ग में Hotel Apple Tree Resorts के दो कमरे बुक किए गए थे. इन कमरों के लिए 12,987 रुपये चुकाए गए थे.  

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श्रीनगर पहुंचे तो होटल की जगह मिला प्राइवेट होमस्टे
राजेश चौहान जब अपने परिवार के साथ श्रीनगर पहुंचे और बुकिंग में दी गई लोकेशन पर होटल तलाशने लगे तो उन्हें बड़ा झटका लगा. जिस जगह Hotel Heritage Rose Inn दिखाया गया था, वहां होटल मौजूद ही नहीं था. शिकायतकर्ता के मुताबिक, वहां एक प्राइवेट होमस्टे था. होटल में चेक-इन नहीं हो पाने के बाद परिवार को मजबूरी में दूसरी जगह रहने का इंतजाम करना पड़ा. लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई थी.

गुलमर्ग में भी होटल नहीं मिला, कार में गुजारी पूरी रात
अगले दिन परिवार गुलमर्ग पहुंचा. वहां उन्होंने पहले से बुक किए गए Hotel Apple Tree Resorts को तलाशा, लेकिन इस होटल का नाम-ओ-निशान वहां नहीं था. 

इस बार परिवार के सामने हालात और मुश्किल थे. बाहर तापमान करीब -4 डिग्री सेल्सियस था और भारी बर्फबारी के बीच उन्हें रात बिताने के लिए कोई बुक किया हुआ होटल नहीं मिला. आयोग के मुताबिक, परिवार को आखिरकार अपनी कार के अंदर ही पूरी रात गुजारनी पड़ी. इस परेशानी के कारण परिवार अपनी पहले से बुक की गई गोंडोला टिकटों का भी इस्तेमाल नहीं कर सका और अगले ही दिन वापस गुरदासपुर लौट गया.

MakeMyTrip से मदद और रिफंड मांगा, लेकिन नहीं मिली राहत
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरी स्थिति के दौरान उसने MakeMyTrip से कई बार संपर्क किया, लेकिन उसे न तो संतोषजनक मदद मिली और न ही बुकिंग की रकम वापस की गई.

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दूसरी तरफ MakeMyTrip ने आयोग के सामने कहा कि वह सिर्फ एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बुकिंग की सुविधा देने वाला माध्यम है. कंपनी ने दलील दी कि वो खुद इन होटलों को नहीं चलाती है, इसलिए होटल मालिकों को भी मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था. कंपनी ने ये भी कहा कि होटल की तरफ से बुकिंग को 'नो शो' बताया गया था और होटल की नॉन-रिफंडेबल पॉलिसी के कारण पैसे वापस नहीं किए गए.

आयोग ने कहा- होटल था ही नहीं तो 'नो शो' कैसे?
उपभोक्ता आयोग ने MakeMyTrip की इस दलील को खारिज किया. आयोग ने साफ कहा कि ग्राहक ने पैसे सीधे MakeMyTrip को दिए थे और कंपनी ने ही उसे कंफर्म बुकिंग वाउचर जारी किए थे.

आयोग के मुताबिक, जिस होटल में ग्राहक को ठहरना था अगर वो वहां मौजूद नहीं था, तो ग्राहक को 'नो शो' कहना सही नहीं है. आयोग ने ये भी पाया कि श्रीनगर की बताई गई प्रॉपर्टी होटल नहीं बल्कि एक प्राइवेट होमस्टे थी, जबकि गुलमर्ग की प्रॉपर्टी मौजूद ही नहीं थी.

ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी से नहीं बच सकता
आयोग ने MakeMyTrip के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वो सिर्फ एक इंटरमीडियरी है. आयोग ने कहा कि जब कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्राहक से पूरा भुगतान लेता है, कंफर्म बुकिंग देता है और होटल की सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा देता है, तो लिस्ट की गई प्रॉपर्टी के फर्जी पाए जाने पर वो अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकता.

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आयोग ने ये भी माना कि परिवार ने अपनी परेशानी के दौरान कंपनी से संपर्क किया था, लेकिन MakeMyTrip ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे ये साबित हो कि ग्राहक के लिए कोई वैध और वास्तविक होटल उपलब्ध कराया गया था और उसने खुद वहां ठहरने से इनकार किया था.

आयोग ने MakeMyTrip को दिए ये आदेश
गुरदासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने MakeMyTrip को उपभोक्ता को कुल 48,775 रुपये देने का आदेश दिया है. इसमें 18,775 रुपये बुकिंग की रकम वापस करनी होगी. इस रकम पर 25 दिसंबर 2025 से भुगतान होने तक 9 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा. परिवार को हुई शारीरिक परेशानी, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान के लिए 25,000 रुपये मुआवजा देना होगा. मुकदमे के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये देने होंगे.

आयोग ने इस मामले में कंपनी को लापरवाही, सेवा में कमी और अनुचित बिजनेस बिहेवियर के लिए जिम्मेदार माना.

ऑनलाइन होटल बुक करते समय सिर्फ फोटो देखकर भरोसा न करें
ये मामला उन लोगों के लिए भी एक बड़ा सबक है जो यात्रा से पहले होटल ऑनलाइन बुक करते हैं. बुकिंग करने से पहले होटल की लोकेशन, हाल की रिव्यूज और दूसरी जगहों पर मौजूद जानकारी को क्रॉस-चेक करना जरूरी है. खासकर पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में जाने पर होटल का सही पता और फोन नंबर पहले से जांच लेना बेहद जरूरी है, ताकि मौके पर बुकिंग से जुड़ी कोई बड़ी परेशानी खड़ी न हो.

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