बिना परमिट भारत के इन 4 सुंदर राज्यों में भारतीयों की भी नो-एंट्री, घूमने से पहले नोट कर लें नाम, वरना लौटना पड़ेगा वापस

विदेश जाने के लिए वीजा तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के 4 राज्यों में घूमने के लिए भारतीय नागरिकों को 'इनर लाइन परमिट' (ILP) की जरूरत होती है? जानिए क्यों लागू है यह नियम और इसके लिए कैसे आवेदन करें.

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भारत में परमिट वाले राज्य बहुत सुंदर हैं. (PHOTO:AI) भारत में परमिट वाले राज्य बहुत सुंदर हैं. (PHOTO:AI)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

एक देश से दूसरे देश जाने के लिए वीजा और परमिट की जरूर पड़ती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय पासपोर्ट भारत के हर कोने में बिना किसी रुकावट सफर की गारंटी नहीं देता. विदेश तो छोड़िए देश के अंदर ही कुछ ऐसे खूबसूरत राज्य हैं, जहां कदम रखने के लिए भारतीय नागरिकों को भी एक खास अनुमति पत्र की जरूरत होती है. इसलिए अगर आपको भी घूमने का शौक है और आप टाइम मिलते ही ट्रिप पर निकल जाते हैं तो आपको यह जानना जरूरी है कि भारत के किन प्रदेशों में जाने से पहले आपको एक खास परमिट की जरूरत पड़ेगी. 

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एक तो इससे सफर में कोई परेशानी नहीं होगी और आपके पास पहले से परमिट होगा तो आपका समय भी बर्बाद नहीं होगा. नॉर्थ-ईस्ट भारत के चार राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम या मणिपुर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके पास इनर लाइन परमिट होना जरूरी है.

इनर लाइन परमिट (ILP) क्या है?

ILP राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक डॉक्यूमेंट है. यह उस राज्य के बाहर के भारतीय नागरिकों को एक तय समय के लिए वहां  एंट्री करने और ठहरने की इजाजत देता है. यह कोई वीजा नहीं है और न ही पर्यटन पर बैन, बल्कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है. अब ज्यादातर राज्यों में इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा मौजूद है.

इतिहास और इस व्यवस्था की जरूरत

ILP व्यवस्था की जड़ें ब्रिटिश काल से जुड़ी हैं. साल 1873 में अंग्रेजों ने बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन लागू किया था, जिसके तहत एक इनर लाइन बनाई गई. इसका मुख्य उद्देश्य चाय और लकड़ी के व्यापार के दौरान मैदानी इलाकों के लोगों और जनजातीय समुदायों के बीच टकराव को रोकना था.

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आजादी के बाद इस कानून को बरकरार रखा गया, लेकिन इसका उद्देश्य बदल गया. आज ILP का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर की स्थानीय जनजातियों की संस्कृति, परंपराओं, भूमि अधिकारों और जनसांख्यिकी की सुरक्षा करना है.

किन 4 राज्यों में जरूरी है ILP?

अरुणाचल प्रदेश: बाहरी पर्यटकों के लिए ई-परमिट (eILP) की व्यवस्था है. 14 दिनों तक के रहने के लिए ₹300 से ₹500 फीस तक होती है.

नागालैंड: यहां घरेलू पर्यटकों के लिए 30 दिनों का परमिट ऑनलाइन लिया जा सकता है, जिसकी फीस ₹200 है. दीमापुर जैसे प्रवेश बिंदुओं पर भी काउंटर मौजूद हैं.

मिजोरम: यहां पर्यटकों को आमतौर पर 15 दिनों के लिए अस्थायी परमिट दिया जाता है, जिसे आगे 15 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है.

मणिपुर: दिसंबर 2019 में मणिपुर इस व्यवस्था में शामिल होने वाला चौथा राज्य बना. यहां आने वाले लोगों के लिए 30 दिनों का अस्थायी परमिट ₹100 में मिल जाता है.

आवश्यक दस्तावेज

आवेदन करते समय आपको एक सरकारी फोटो पहचान पत्र, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, यात्रा विवरण और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय संपर्क जानकारी देनी होती है. 

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