उत्तराखंड के पहाड़ों में कई किलोमीटर का सफर तय करने में घंटों लग जाते हैं. सड़कें घुमावदार हैं, रास्ते लंबे हैं और कई जगहों पर सीधी कनेक्टिविटी अब भी बड़ी चुनौती है. ऐसे में अल्मोड़ा के एक युवा का बनाया हुआ उड़ने वाला इलेक्ट्रिक वाहन इन दिनों काफी चर्चा में है. अल्मोड़ा के कफलीखान गांव के रहने वाले रवि टम्टा ने एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप तैयार किया है. इसका नाम हापिडा स्कायनेक्स है. हाल ही में अल्मोड़ा में इसका टेस्ट किया गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं.
इसकी सबसे दिलचस्प बात इसका इस्तेमाल है. रवि के गांव से उनके घर तक करीब 40 किलोमीटर का सड़क रास्ता है, जिसे तय करने में करीब 90 मिनट लग सकते हैं. दावा है कि हवा के रास्ते यही दूरी करीब 10 मिनट में पूरी की जा सकती है. बता दें कि ये इनोवेशन नया नहीं है और भारत में भी कई स्टार्टअप बड़े साइज के ड्रोन या VTOL की टेस्टिंग कर रहे हैं. ये टेस्टिंग कई सालों से चल रही है. इसमें पूरा कॉन्सेप्ट ड्रोन का ही यूज किया जाता है, लेकिन साइज बड़े होने की वजह से पावरफुल प्रोपेलर और दूसरे इक्विपमेंट्स की जरूरत होती है.
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ये उड़ने वाली कार आखिर है क्या?
नाम सुनकर इसे सड़क पर चलने वाली कार समझना आसान है, लेकिन अभी यह वैसी कार नहीं है जैसी फिल्मों में दिखाई जाती है. Hapida स्कायनेक्स एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक उड़ने वाला वाहन है, जो ड्रोन जैसी तकनीक का इस्तेमाल करता है. इसमें कई प्रोपेलर लगे हैं, जिनकी मदद से यह जमीन से ऊपर उठ सकता है और हवा में आगे बढ़ सकता है. इस तरह के फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को VTOL यानी वर्टिकल टेकऑफ लैंडिंग भी कहा जाता है. इसे उड़ने के लिए रनवे की जरूरत नहीं होती और ये ड्रोन की तरह ही उड़ सकता है. इसे बड़ा ड्रोन कह सकते हैं.
भारत में ऐसी कई ड्रोन की कंपनियां हैं जो VTOL की टेस्टिंग कर चुकी हैं. कई स्टार्टअप्स का दावा है कि इस तरह के VTOL आने वाले समय में कमर्शियल लॉन्च किए जाएंगे. हालांकि अब तक ऐसे VTOL भारत में कमर्शियल नहीं हैं. इन्हें फिलहाल टेस्टिंग ही किया जा रहा है. यानी इसे फिलहाल एक शुरुआती उड़ने वाला वाहन या पर्सनल चौपर कहना ज्यादा सही होगा. यह अभी प्रोटोटाइप है और आम लोगों के लिए बिक्री या रोजाना इस्तेमाल के लिए उपलब्ध वाहन नहीं है.
रवि टम्टा कौन हैं?
रवि टम्टा अल्मोड़ा के रहने वाले हैं और Hapida से जुड़े हैं. उनकी कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, उनका काम खास तौर पर पहाड़ी इलाकों और गांवों की समस्याओं को तकनीक के जरिए हल करने पर फोकस रहा है. कंपनी ने रवि को अपना फाउंडर बताया है. हापिडा की वेबसाइट पर रवि के पुराने कामों में मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, स्मार्ट बांस की छड़ी और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग से जुड़ा एक गैजेट शामिल है. कंपनी का कहना है कि उसका फोकस पहाड़ों और गांवों में काम आने वाले नए इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार करना है.
उनकी पढ़ाई को लेकर भी एक दिलचस्प बात सामने आती है. सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें बिना इंजीनियरिंग डिग्री वाला इनोवेटर बताया गया है, लेकिन उपलब्ध प्रोफाइल में रवि टम्टा के नाम से नैनीताल के सरकारी पॉलीटेक्निक से पढ़ाई का रिकॉर्ड मिलता है. लिंक्डइन प्रोफाइल में भी सरकारी पॉलीटेक्निक नैनीताल की शिक्षा का जिक्र है.
पहाड़ों के लिए क्यों खास हो सकता है ये आइडिया?
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क बनाना और उसे हर मौसम में चालू रखना आसान नहीं है. लैंडस्लाइड, बारिश, बर्फबारी और पहाड़ी रास्तों की वजह से कई जगहों पर छोटी दूरी भी काफी लंबी हो जाती है. अगर फ्यूचर में इस तरह के इलेक्ट्रिक उड़ने वाले वाहन सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी तौर पर इस्तेमाल करने लायक बनते हैं, तो इनका इस्तेमाल सिर्फ लोगों के आने-जाने तक सीमित नहीं रह सकता.
दुर्गम इलाकों में दवाइयां पहुंचाने, आपदा के समय जरूरी सामान ले जाने या ऐसे गांवों तक पहुंच बनाने में इनका इस्तेमाल हो सकता है जहां सड़क से पहुंचना मुश्किल है.
मुन्ज़िर अहमद