सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वीडियो को ज्यादा व्यूज दिलाने की चाह में लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन अमेरिका में एक 9 साल के बच्चे ने अपने वीडियो को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए जो किया, उसका बिल देखकर उसके पिता भी हैरान रह गए. बच्चे ने करीब तीन हफ्तों में यूट्यूब विज्ञापनों पर 1.18 लाख डॉलर यानी करीब 1.13 करोड़ रुपये खर्च कर दिए.
मामला एक गेमिंग यूट्यूब चैनल का है, जिसका नाम माइटी माइक प्लेज है. इस चैनल पर बच्चा रोब्लॉक्स और माइनक्राफ्ट के वीडियो डालता है. यह पूरा मामला बच्चे के पिता डेविड सार्किसियन के बताए इंसिडेंस पर बेस्ड है.
शुरुआत सिर्फ 20 डॉलर से हुई थी
मामला इतना बड़ा कैसे हो गया, इसकी शुरुआत सिर्फ करीब 20 डॉलर से हुई थी. बच्चे को शिकायत थी कि उसके वीडियो पर ज्यादा व्यूज नहीं आ रहे हैं. इसके बाद उसके पिता ने उसे यूट्यूब के ऐड टूल के जरिए एक छोटा ऐड कैंपेन चलाना समझाया.
पिता ने बजट तय करने, दर्शक चुनने और विज्ञापन शुरू करने का तरीका बच्चे को दिखाया. लेकिन एक बड़ी गलती पहले ही हो चुकी थी. बच्चे के खाते में पिता की कंपनी का क्रेडिट कार्ड सेव था.
इसके बाद बच्चे ने खुद नए ऐड कैंपेन चलाने शुरू कर दिए. पिता के मुताबिक, बच्चे को यह समझ नहीं आया कि 20 डॉलर सिर्फ उस एक अभियान का बजट था. उसे लगा कि वीडियो को जितना ज्यादा पैसा देकर प्रमोट किया जाएगा, उतने ज्यादा लोग उसे देखेंगे.
तीन हफ्ते तक चलता रहा खर्च
इसके बाद करीब तीन हफ्तों तक अलग-अलग विज्ञापन अभियान चलाए गए. इनमें माइटी माइक, एपिक रोब्लॉक्स और माइनक्राफ्ट से जुड़े वीडियो शामिल थे.
पिता के मुताबिक, इस दौरान कंपनी के क्रेडिट कार्ड से कुल करीब 1.18 लाख डॉलर का विज्ञापन खर्च हो गया. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 1.13 करोड़ रुपये बैठती है.
मामले का पता बच्चे के पिता को खुद क्रेडिट कार्ड का बिल देखकर नहीं चला. उन्हें कंपनी के मैनेजर और वित्त टीम की बैठक में बुलाया गया. वहां उन्हें तीन हफ्तों के विज्ञापन खर्च का पूरा हिसाब दिखाया गया और पूछा गया कि कंपनी के कार्ड से इतनी बड़ी रकम कहां खर्च हुई.
पिता ने बताया कि उस समय उन्हें समझ आया कि यह पैसा उनके बेटे के यूट्यूब चैनल के प्रचार में जा रहा था. उनके मुताबिक, कंपनी के कार्ड पर करीब पांच अंकों से ज्यादा की रकम देखकर उन्हें तुरंत समझ आ गया कि मामला गंभीर है.
पैसे खर्च हुए तो व्यूज भी बढ़े
इस कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा यह है कि पैसे खर्च करने से चैनल को व्यूज मिले भी. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रमोट किए गए वीडियो करीब 2 लाख व्यूज तक पहुंचे. कई लोगों ने बताया कि उन्हें माइनक्राफ्ट और रोब्लॉक्स के लंबे वीडियो यूट्यूब विज्ञापन के तौर पर दिखाई दिए थे.
लेकिन ज्यादा व्यूज मिलने का मतलब यह नहीं था कि अभियान सफल रहा. एक बच्चे के वीडियो को प्रमोट करने के लिए कंपनी के कार्ड से इतनी बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी.
पिता ने अपनी गलती भी मानी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ बच्चे का विज्ञापन चलाना नहीं थी. पिता ने खुद माना कि उन्होंने कंपनी का कार्ड बच्चे के खाते में सेव कर दिया था.
उन्होंने पहले इसी कार्ड से बच्चे के लिए रोब्लॉक्स की इन-गेम करेंसी खरीदने के लिए पेमेंट किया था. बाद में वही भुगतान जानकारी खाते में सेव रह गई. इसी खाते से बच्चे को विज्ञापन चलाने की सुविधा भी मिल गई. यानी एक छोटा सा भुगतान करने के लिए सेव किया गया कार्ड बाद में लाखों डॉलर के विज्ञापन खर्च की वजह बन गया.
अब चैनल बंद कर दिया गया
मामला सामने आने के बाद माइटी माइक प्लेज चैनल को फिलहाल रोक दिया गया है. पिता ने कहा है कि आगे पेमेंट की जानकारी हटाई जाएगी, खर्च की लिमिट तय की जाएगी. पिता ने यह भी बताया है कि उन्हें अभी नहीं पता कि कंपनी इस नुकसान को लेकर क्या फैसला करेगी और उनकी नौकरी पर इसका क्या असर पड़ेगा.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क